यहां सरकार का नहीं विद्यालय प्रबंधन का चलता है कानून

यहां सरकार का नहीं विद्यालय प्रबंधन का चलता है कानून

Ashish Pandey | Publish: May, 17 2018 09:03:41 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

परेशान अभिभावक पहुंचे जिलाधिकारी की चौखट पर।

 

उन्नाव. जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद भी विद्यालय प्रबंधन द्वारा छात्र और अभिभावकों का शोषण बंद नहीं हो पा रहा है। जिससे अभिभावक अधिकारियों की दर पर हाजिरी लगाते लगाते परेशान हो रहे हैं। कभी जिलाधिकारी तो कभी जिला विद्यालय निरीक्षक। लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान सामने नहीं आ रहा है। जिलाधिकारी द्वारा एक कमेटी बनाई गई थी। परंतु वह भी खानापूरी में ही सिमट कर रह गई। इसी संदर्भ में अभिभावकों ने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंचकर प्रभारी जिलाधिकारी/अपर जिलाधिकारी से बातचीत कर अपनी समस्याओं को रखा और समाधान की मांग की। प्रभारी जिलाधिकारी ने कहा कि आपकी समस्याओं का समाधान होगा। यदि समाधान नहीं होता है तो आप मंडल स्तर पर बने समिति के सामने अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जहां से आप को न्याय अवश्य मिलेगा और शासनादेश के विपरीत अधिकार हो रहा है तो विद्यालय की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

आदर्श विद्या मंदिर गीता पुरम का मामला

मामला आदर्श विद्या मंदिर गीतापुरम का है। उक्त विद्यालय के अभिभावकों ने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी समस्याओं को रखा। जिलाधिकारी की अनुपस्थित में अपर जिलाधिकारी ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि आपकी समस्याओं का समाधान होगा। गौरतलब है आदर्श विद्या मंदिर गीतापुरम के अभिभावकों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर विद्यालय में हो रही अनियमितताओं की जानकारी दी थी। जिस पर कार्यवाही करते हुए जिलाधिकारी ने एक कमेटी बनाई थी। जिसका अध्यक्ष अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को बनाया गया था। इस संदर्भ में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट उदय भान सिंह द्वारा आदर्श विद्या मंदिर गीतापुरम के प्रबंधक को नोटिस भेजकर निम्न जानकारी मांगी गई थी।

जांच होने तक फीस नहीं लेने का था आदेश आ रहा रोज मैसेज

प्रत्येक वर्ष वार्षिक शुल्क विद्यालय प्रबंधक द्वारा बिना अभिभावकों की सहमति के बढ़ा दिया जाता है। जो शासनादेश के विपरीत है। बगैर अभिभावकों की सहमत के मासिक शुल्क में भी 2 गुना तक वृद्धि कर दी गई। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर शिक्षा जो की अनिवार्य शिक्षा के अंतर्गत आती है कि भी फीस अलग से दोगुना वसूल की जा रही है। इसके साथ ही एक ही अभिभावक के दो बच्चों के शुल्क में भी कोई रियायत नहीं की जाती है। बसों के कन्वेंस शुल्क में हर वर्ष वृद्धि की जाती है। साथ ही छोटे बच्चों को उनके घर तक भेजने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। परीक्षा शुल्क वर्ष में दो बार लिया जाता है और जिस में वृद्धि भी की जाती है। नवंबर 2018 का अग्रिम शुल्क अप्रैल माह में ही जबरन जमा कराया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार दो-तीन माह का अग्रिम शुल्क जमा कराया जाता है। जो शासनादेश के विपरीत है।

धूप में खड़ा करके दंडित किया जा रहा मासूम छात्रों को

उपरोक्त नोटिस में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने प्रबंधक को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जब तक प्रश्नगत प्रकरण की जांच पूरी ना हो जाए। तब तक आप किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूललेंगे। यदि कोई प्रकरण फीस वसूलने का संज्ञान में आता है। तो आप के विरुद्ध विधिक कार्यवाही की जाएगी। विगत 4 मई को दी गई उपरोक्त नोटिस के बाद भी विद्यालय प्रबंधन लगातार अभिभावकों को मैसेज भेजकर शुल्क जमा करने की हिदायत देता है और साथ ही चेतावनी। कुछ अभिभावकों ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन फीस ना जमा होने के कारण उनके बच्चों को धूप में एक-दो घंटे खड़ा करा दिया जाता है। गुरुवार को दिए गए ज्ञापन में अपरजिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि शासनादेश के विपरीत विद्यालय में कोई कार्य नहीं होने दिया जाएगा। यदि आप की समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो आप मंडल स्तर पर बनाए गए समिति के सामने अपनी शिकायत ले जा सकते हैं। शिकायत करने वालों में कल्याण शंकर चतुर्वेदी रविंद्र सिंह, गंगा बख्श सिंह, प्रदीप कुमार, बबलू सिंह, आशीष कुमार, कुलदीप कुमार, महेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य लोग शामिल हैं

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