दिव्यांगजन वैधानिक संरक्षकता माता-पिता के अलावा यह भी ले सकते हैं - विनय उत्तम

- चल अचल संपत्ति के साथ बैंक खाते का प्रबंधन की वैधानिक संरक्षक होता है नियुक्ति

By: Narendra Awasthi

Published: 07 Sep 2020, 09:52 PM IST

उन्नाव. ऐसे दिव्यांगजन जो स्वपरायणता, प्रमस्तिस्क अंगघात, मानसिक मंदता एवं बहुनिःशक्तता से ग्रस्त है एवं उनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है। उनको राष्ट्रीय न्याय अधिनियम 1999 के अंतर्गत वैधानिक संरक्षकता प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी विनय उत्तम यह जानकारी दी। उन्होंने ने बताया कि उक्त के अंतर्गत दिव्यांगता से ग्रस्त दिव्यांगजनों के अनुरक्षण एवं देखभाल, अचल संपत्तियों का प्रबन्धन, चल संपत्ति का प्रबन्ध तथा बैंक खाते का संचालन आदि हेतु वैधानिक संरक्षक के नियुक्ति का प्राविधान है। सामान्य स्थिति में निःशक्त व्यक्ति के माता-पिता दोनों में से कोई भी वैधानिक संरक्षक बन सकते है। माता पिता द्वारा संयुक्त रूप से संरक्षकता ली जा सकती है।

रजिस्ट्री किस संगठन भी ले सकते हैं वैधानिक संरक्षकता

उन्होंने बताया राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अधीन निःशक्त व्यक्ति के माता पिता के अलावा उसके नातेदार तथा रजिस्ट्रीकृत संगठन भी निःशक्त व्यक्ति के वैधानिक संरक्षक नियुक्त किये जाने के लिए पहल कर सकते हैं। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी ने बताया कि जनपद के इस प्रकार की दिव्यांगता से गस्त निःशक्त व्यक्तियों के माता पिता के अलावा उसके नातेदार तथा रजिस्ट्रीकृत संगठन वैधानिक संरक्षकता के लिये आवेदन पत्र विभागीय वबेसाइट पर आनलाइन अपलोड कराते हुये आवेदनपत्र की हार्डकापी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय को उपलब्ध करायें।

 

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