इस गांव में कई युवाअों की टूट गई शादियां, साथ छोड़ रहे रिश्तेदार

उन्नाव में एचआईवी पॉजिटिव का दंश, युवाओं की शादी के लाले

By: Ruchi Sharma

Published: 10 Feb 2018, 02:36 PM IST

उन्नाव. झोलाछाप डॉक्टर की सिरिंज से बांटी गयी लाइलाज बीमारी का दंश यहां के अविवाहित युवक और युवतियों को झेलना पड़ रहा है। एड्स की आशंका में इन गांवों को न तो कोई अपनी लडक़ी देना चाहता है न लडक़ी लेना चाहता है। इससे बड़ी सामाजिक समस्या पैदा हो गयी है। अपनों का ही तिरस्कार मिलने से गांव वाले मानसिक पीड़ा तो सह ही रहे हैं अब युवाओं में भी निराशा छाने लगी है। शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। कुछ की शादियां पहले से तय थीं, कुछ की तय होनी थीं। लेकिन, एड्स फैलने की वजह से कई रिश्ते टूट गए हैं। कई की लगी लगाई शादी टूट चुकी है।

बांगरमऊ के मोहल्ला प्रेम गंज सहित चक मीरापुर, किरबिदियापुर आदि गांवों में पिछले दिनों 38 एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इसमें 15 साल से कम उम्र के छह बच्चों समेत कई जवान युवक-युवतियां भी शामिल थे। इस तथ्य के उजागर होने के बाद पूरे क्षेत्र में एक अनजाना सा खौफ व्याप्त है। पड़ोसी-पड़ोसी से बात नहीं करना चाहता। लोग समझ नहीं पा रहे कि एक डॉक्टर की लापरवाही से मिली इस सजा से वह कैसे निजात पाएं। शासन-प्रशासन जागरूकता अभियान चला रहा है। लेकिन, इस घटना के बाद इन गांवों के लोगों को अब दूसरे गांवों के लोग तिरस्कार की नजरों से देख रहे हैं। लोगों के बच्चों की शादियां टूट रही हैं। वे इससे हैरान हैं।
यह है रिपोर्ट
नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाईजेशन और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी की संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। तमाम लोगों के टेस्ट किए। लोगों से बातचीत की। लेकिन, लोगों की धारणा को बदलने में वे भी नाकाम रहे। एड्स नियंत्रण सोसायटी के अनुसार वर्ष 2018 में 6131 लोगों का परीक्षण किया गया है। जिसमें 62 एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें महिलाओं की संख्या 22 है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने का असर यह हुआ कि लोग अब यहां शादियां करने से कतराने लगे हैं। इसकी वजह से परिवार भी टूट रहे हैं।
बच्चों ने भी स्कूल जाना बंद किया
प्रेम गंज, चक मीरापुर, किरबिदियापुर जैसे तमाम गांवों के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। कुछ एडस पीडि़त बच्चों की पहचान सार्वजनिक होने की वजह से दोस्त-यार ने दूरियां बना ली हैं। स्कूल में उन्हें अलग निगाहों से देखा जा रहा है। इसलिए वे मारे शर्म की वजह से स्कूल जाना बंद कर चुके हैं। चक मीरापुर के कक्षा 8 के एक छात्र को उसकी मां ने स्कूल जाना बंद करवा दिया है। ताकि विद्यालय में किसी प्रकार की असहज स्थिति उत्पन्न ना हो।
छोड़ रहे हैं गांव
एचआईवी पीडि़त लोगों का कहना है कि तिरस्कार और जिल्लत की जिंदगी जीने से अच्छा है गांव छोडकऱ दूसरी जगह स्थापित हो जाएं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाईजेशन और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी की संयुक्त टीम का नेतृत्व कर रही डॉक्टर आशा हेगड़े और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी कीडॉ. प्रीति पाठक का कहना है कि ग्रामीणों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही हालात सुधरेंगे। जबकि, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी चौधरी का कहना है कि एचआईवी पॉजिटिव के इतने ज्यादा मामले आने के मूल कारण को खोजने का प्रयास जारी है। ग्रामीणों में दहशत है। सामाजिक कारणो और डर की वजह से शादियां टूटने की बात सामने आ रही है। टीम जागरूकता अभियान चला रही है।

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