कंपोजिट ग्रांट घोटाला - डीएम, बीएसए सहित 14 एसडीआई के खिलाफ कार्रवाई तय

- 3137 विद्यालयों को जानी थी कंपोजिट ग्रांट

- छात्र संख्या के आधार पर बटनी थी कंपोजिट ग्रांट

- मां वैष्णो एजेंसी जौनपुर से खरीदारी हुई

By: Narendra Awasthi

Published: 16 Sep 2020, 03:41 PM IST

उन्नाव. कंपोजिट ग्रांट घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू आर्थिक अपराध शाखा ने शासन को सौंप दी है। जिसमें तत्कालीन डीएम देवेंद्र कुमार पांडे, तत्कालीन बीएसए बीके शर्मा सहित खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत करने की संस्तुति की गई है। गौरतलब है सदर कोतवाली में कंपोजिट ग्रांड घोटाले की एफआइआर. दर्ज कराई गई थी। जिसकी जांच ईओडब्ल्यू ने की। जांच में तत्कालीन डीएम तत्कालीन, बीएसए, मां वैष्णो एजेंसी जौनपुर के संचालक जितेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी रामकिशुन यादव, कृष्ण देव यादव, आशीष चौहान, दिनेश सिंह, शैलेंद्र कुमार शर्मा, सुरेंद्र मौर्य, मृत्युंजय यादव, सुषमा सेंगर, नसरीन फारूखी, अरुण कुमार अवस्थी, अशोक कुमार सिंह, प्रवीण कुमार दीक्षित, मधुलिका बाजपेई, राजेश कुमार को दोषी पाया गया था। इस संबंध मेंं तत्कालीन डीएम देवेंद्र कुमार पांडे विगत 22 फरवरी 2020 को शासन ने निलंबित करते हुए शासन से संबद्ध कर दिया था।

शैक्षिक सत्र 2018-19 का मामला

मामला 2018 - 19 शैक्षिक सत्र के लिए पौने दस करोड़ रुपए की लागत से 3137 विद्यालयों में सामग्री खरीदने का है। कंपोजिट ग्रांट के माध्यम से हुई खरीदारी मां वैष्णो एजेंसी जौनपुर से हुई थी इनमें डस्टबिन दिवाल घड़ी पेंसिल आदि शामिल है घटिया क्वालिटी और कीमत कई गुना को लेकर कंपोजिट ग्रांट चर्चा में आ गई। गौरतलब है प्राइमरी और जूनियर विद्यालयों के खातों में पहले किश्त 1,43,58,125 और दूसरी किस्त 8,29,91,875 रुपये भेजी गई थी। जिससे छात्र संख्या के आधार पर सभी विद्यालयों को भेजा जाना था।

छात्र संख्या के आधार पर मिलनी थी ग्रांट

इसमें 1 से 100 छात्र की संख्या वाले विद्यालय को ₹20 हजार, 100 से 175 छात्र संख्या वाले विद्यालय को पचास हजार रुपए, 200 छात्र वाले विद्यालय को 75 हजार और 200 से 250 छात्र संख्या वाले विद्यालय को ₹1 लाख की ग्रांट भेजी गई थी। कमिश्नर की जांच में सामने आया कि खंड शिक्षा अधिकारी व प्रधानाध्यापकों पर मां वैष्णो एजेंसी जौनपुर से सामग्री खरीदने का दबाव बनाया गया था। सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने उपरोक्त मामले को विधानसभा में भी उठाया था। जिसके बाद राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान विजय किरण आनंद ने कमिश्नर को मामले की जांच के आदेश दिए थे।

  1. 5 गुना से अधिक कीमत पर खरीदी गई सामग्री

आरोप है कि सामग्री की 5 गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया और उसकी गुणवत्ता भी मानक विहीन थी 400 से साडे ₹500 के बीच स्टील के कूड़ेदान को 1980 रुपए तक खरीदा गया दिवाल घड़ी ₹637 में स्टील के कटोरे 655 रुपए के हिसाब से खरीदा गया जिसका खुलासा विद्यालयों के नाम पर जारी किए गए दिल से निकल कर सामने आया।

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