कोविड-19 लॉक डाउन के बीच गेहूं की कटाई, फ्लोर मिल ले जाने को मजबूर, किसानों को रजिस्ट्रेशन में आएंगी इस बात की समस्या

- जरूरतमंद किसान गेहूं फ्लोर मिल पहुंचाकर निकाल रहे हैं अपना खर्चा

- क्रय केंद्रों में सन्नाटा

- रजिस्ट्रेशन के लिए यह कागजात साथ लेकर आएं

By: Narendra Awasthi

Updated: 18 Apr 2020, 07:29 PM IST

उन्नाव. कोविड-19 लॉक डाउन का असर खेती किसानी में बड़े पैमाने पर दिखाई पड़ रहा है। जनपद में गेहूं की फसल तैयार खड़ी है। लेकिन काटने के लिए श्रमिकों का अभाव देखा जा रहा है। दूसरी तरफ मौसम में भी बड़े पैमाने पर परिवर्तन हो रहा है। आज सुबह बादल गरजने के साथ हल्की-फुल्की बूंदाबांदी हुई। लेकिन मौसम विभाग की भविष्यवाणी से किसानों में के माथे पर शिकन ला दिया है। जनपद में 60 क्रय केंद्र बनाए गए हैं।जिनके माध्यम से गेहूं क्रय करने का लक्ष्य 66 हजार एमटी रखा गया है। लेकिन विभिन्न क्रय केंद्रों से आने वाली खबरें काफी निराशाजनक है।

 

थ्रेसर संचालकों द्वारा ओने पौने दामों में फ्लोर मिल पहुंचाया जा रहा गेहूं

जनपद में लगभग 20 से 25 प्रतिशत गेहूं की कटाई हुई है। लेकिन क्रय केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहा है। क्रय केंद्रों पर गेहूं ना पहुंचकर फ्लोर मिल पहुंच रहा है। जहां फ्लोर मिल में ₹16.50 से ₹17:00 के बीच गेहूं खरीदा जा रहा है। लेकिन इसमें थ्रेसर चलाने वाले काफी हैं। जिन्हें अपने खर्च के लिए नगद रुपया चाहिए। इस संबंध में बातचीत करने पर गजौली निवासी अर्जुन यादव ने बताया कि लेबर ना मिलने के कारण गेहूं की कटाई में समस्या खड़ी हो रही है। फिर भी लोग डाउन का अनुपालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर गेहूं की कटाई कराएंगे।

 

क्रय केंद्रों में सन्नाटा

क्रय केंद्रों में सन्नाटा पसरा है जिला प्रशासन ने किसानों के लिए टोकन सिस्टम लागू किया है जिससे कि क्रय केंद्र पर लॉक डाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता रहे लेकिन यह सब कागजों पर ही है आज जिला अधिकारी प्रवीण कुमार ने नवीन मंडी स्थित क्रय केंद्र का निरीक्षण कर क्रय केंद्र प्रभारी को किसानों से संपर्क करने और उनका रजिस्ट्रेशन के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए।

 

रजिस्ट्रेशन के लिए इन चीजों की जरूरत

इस संबंध में बातचीत करने पर नवीन सब्जी मंडी क्रय केंद्र से विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि गत वर्ष किसानों के सामने रजिस्ट्रेशन में ही काफी समस्या आएगी। उन्होंने कहा की पोर्टल आधार कार्ड में दर्ज नाम के आधार पर रजिस्ट्रेशन कर रहा है, जबकि अकाउंट खतौनी में दर्ज नाम से है। ऐसे में किसानों को नया अकाउंट खुलवाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अब तक के 2 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। विनोद कुमार गुप्ता के अनुसार रजिस्ट्रेशन के लिए खतौनी, आधार कार्ड और पासबुक की आवश्यकता पड़ती है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को किसानों को आसानी से पांच सुलभ कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां पर बड़े और छोटे किसानों का भेदभाव सामने आ रहा है।

 

Narendra Awasthi
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