ये है CM योगी के अफसर  दूसरे दिन भी ईश्वरगंगी तालाब से नहीं हटी मरी मछलियां देखें वीडियो...

कमिश्नर का आदेश भी बेअसर, नागरिक बेहाल।

वाराणसी. ये हैसीएम योगी आदित्य नाथ  सरकार में अधिकारियो की हालत। आलम  यह कि एक तो बिना कुछ सोचे समझे एक प्राचीन कुंड की सफाई के नाम पर पानी की निकाकसी शुरू कर दी गई। नतीजा हजारों मछलियों ने आक्सीजन और पानी की कमी के चलते दम तोड़ दिया। घटना के दूसरे दिन भी उन मछलियों को हटाने का काम नहीं हो सका। इसके चलते मरी मछलियां तालाब के चारों तरफ बिखरी पड़ी हैं और  उससे निकलने वाली दुर्घंध के चलते लोगों का बुरा हाल है। लोगों को आशंका है कि यही आलम  रहा तो इलाके में कभी भी महामारी फैल सकती है। लेकिन इससे नगर निगम को कोई सरोकार नहीं। बता दें कि क्षेत्रीय लोगों की सूचना पर गुरुवार को ही पत्रिका ने जिले और मंडल के आला अफसरों से वार्ता कर खबर चलाई थी। कमिश्नर ने नगर निगम के अफसरों को तत्काल मरी मछलियां हटाने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।


बता दें कि तकरीबन एक पखवारा पहले ही यह तय हुआ था कि ईश्वरगंगी तालाब की सफाई होगी।तालाब की सफाई के तहत यह भी तय हुआ था कि तालाब की मछलियों को निकाल कर गंगा में डाला जाएगा। सारी मछलियों के निकल जाने के बाद ही तालाब से पानी निकाला जाएगा। लेकिन इसके उलट नगर निगम ने आनन-फानन मे बुधवार और गुरुवार की रात मेंतालाब में जाल डाल कर 20-25 किलो वजन वाली बड़ी मछलियों को तो निकाल लिया।साथ ही पंप लगा कर पानी निकासी का काम भी शुरू कर दिया। नतीजा सुबह होते होते हजारों छोटी मछलियां मर गईं। मरी मछलिया तालाब के चारों तरफ बिखरी पड़ी है। उनसे दुर्घंध निकलने लगी तो लोगों ने पत्रिका से संपर्क किया। पत्रिका ने इस बाबत कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से बात की, उन्होंने फौरन ही इस बाबत नगर निगम के तहसीलदार अविनाश कुमार को निर्देश दिया कि तत्काल मरी मछलियों को हटा कर दवाओं का छिड़काव किया जाए। इस खबर को गुरुवार को ही पत्रिका ने प्रसारित किया। लेकिन  उसके 24 घंटे बाद भी मछलियां नहीं हटाईं गईं।

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इस संबंध में क्षेत्रीय नागरिक अमर नाथ चौबे ने तालाब के किनारे रहने वाले नखड़ू प्रसाद के हवाले से बताया कि बीती रात करीब 12 बजे स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारी आए थे। उन्होंने तालाब के चारों तरफ चून छिड़का और चलते बने। मरी मछलियों को हटाने की जहमत भी नहीं उठाई। रात का अंधेरा होने के चलते और किसी ने देखा नहीं लिहाजा कर्मचारी अपने काम को अंजाम दे कर चलते बने।


देखें वीडियो-

इसकी जानकारी होने पर पत्रिका संवाददाता मौके पर पहुचे तो वहां पाया कि दुर्गंध के मारे पल भर भी खड़ा हो पाना मुश्किल है। कुछ लोग दूर से इस प्रचीन कुंड की गंदगी को देखते रहे। इसमें कुछ महिलाएं भी थीं। पत्रिका ने उन महिलाओं से बात करने की कोशिश की तो उर्मिला और  साधना ने बताया कि क्या कर सकते हैं। किसी तरह नाक दबा के रह रह हैं। दो दिन हो गया घर में भी रहना मुश्किल हो गया है। कहीं कोई सुनवाई है नहीं।

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पूरे घटनाक्रम की जानकारी शुक्रवार को पत्रिका ने फिर से कमिश्नर को दी। वह यह सुन कर अवाक थे कि 24 घंटे बाद भी मरी मछलियां नहीं हटाई गईँ। उन्होंने कहा कि वह अभी नगर आयुक्त से इस बाबत स्पष्टीकरण लेते हैं।






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Ajay Chaturvedi
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