बनारस की चढ़ाई के बाद लखनऊ में ललकारेंगे नीतीश  

बनारस की चढ़ाई के बाद लखनऊ में ललकारेंगे नीतीश  
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यूपी में शराबबंदी को लेकर मोदी के बाद अखिलेश को घेरने 15 को लखनऊ पहुंचेंगे बिहार के सीएम

विकास बागी
वाराणसी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एकमात्र एजेंडा है बिहार की तर्ज पर पूरे देश में शराबबंदी का कानून लागू हो क्योंकि यह एक सामाजिक दायित्व है और सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एक राय होना होगा। नीतीश कुमार यह समझ रहे हैं कि शराब बंदी के एक वादे ने उन्हें बिहार में सीएम की कुर्सी दोबारा दिलवा दी है तो फिर पूरे देश में यदि जदयू ने शराबंदी को लेकर आंदोलन छेड़ दिया तो पीएम का सपना भी पूरा हो सकता है। इसके लिए पार्टी को बिहार से बाहर खड़ा करना बड़ी चुनौती है। 
 बिहार से बाहर निकलने पर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी और बिहार से सटे बनारस से बढिय़ा कोई स्थान नहीं। प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पूरी दुनिया की नजर होगी कि आखिर मोदी के गढ़ में नीतीश क्या संदेश देंगे। हालांकि नीतीश ने नया कुछ नहीं बोला लेकिन इशारों में यह जरूर बता दिया कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी का मुख्य एजेंडा शराब बंदी ही होगा। उनके पूरे भाषण में शराब और मोदी ही छाए रहे। मोदी को टारगेट करने के बाद अब नीतीश की नजर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पर है। 
पिंडरा की रैली से गदगद नजर आ रहे नीतीश कुमार ने मंच से ही ऐलान किया कि जद के नेता रहे पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के संगठन किसान मंच की ओर से यूपी में पूर्ण शराबबंदी को लेकर 15 मई को लखनऊ में होने वाली रैली में वह शिरकत करेंगे। किसान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सिंह के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि अब लखनऊ में हम मिलेंगे और यहीं से दिल्ली के लिए रास्ता तय करेंगे। 

सपा की उड़ी नींद
नीतीश के इस एलान से अब सपाइयों की नींद उडऩे लगी है। सपा को मालूम है कि बिहार में सत्ता में काबिज लोगों के मन में कहीं न कहीं इसका मलाल है कि मुलायम ने आखिर वक्त में महागठबंधन का साथ छोड़ दिया था। देश में जिस तरह का माहौल था उससे मुलायम सिंह यादव को लग रहा था कि बिहार में भी कमल खिलेगा लेकिन वह मुरझा गया। लालू प्रसाद यादव के चलते भले नीतीश अभी मुलायम अखिलेश पर खुलकर प्रहार नहीं कर रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिस तरह इंट्री मारने को जदयू बेताब है उससे सपा में बेचैनी है। शराबबंदी को लेकर यूपी में बीजेपी के कुछ विधायक भी अखिलेश सरकार से मांग कर चुके हैं लेकिन कैबिनेट मंत्री आजम खान का जवाब सुनने के बाद बीजेपी मुद्दे को लेकर शांत हो गई। अब भाजपा भी इस इंतजार में है कि लखनऊ में नीतीश कुमार मुलायम सिंह यादव व सीएम अखिलेश को कैसे घेरते हैं इस मुद्दे पर। 
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