अराजकता की भेंट चढ़ गया BHU, आए दिन कहीं पेट्रोल बम का धमाका तो कहीं लाठियों की फटकार

अराजकता की भेंट चढ़ गया BHU, आए दिन कहीं पेट्रोल बम का धमाका तो कहीं लाठियों की फटकार

Ajay Chaturvedi | Publish: May, 09 2018 01:16:33 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

सर्व विद्या की राजधानी बीएचयू में शिक्षा का माहौल ही नहीं।

वाराणसी. स्व. डॉ लालजी सिंह के कार्यकाल के बाद से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय पूरी तरह से अराजकता की भेंट चढ़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस अराजकता पर अंकुश लगा पाने में पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहा है। आलम यह है कि पिछले चार साल से आए दिन हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ का सिलसिला कायम है। अब तो चाकूबाजी और पेट्रोल बम तक आम बात हो गई है। आंतरिक सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से तार-तार हो गया है। उम्मीद की जा रही थी कि नए कुलपति के आने के बाद परिस्थितियां बदलेंगी लेकिन विश्वविद्यालय के शिक्षकों और अधिकारियों का कॉकस उन्हें भी कठोर निर्णय नहीं लेने दे रहा बल्कि अगर यह कहें कि यह कॉकस ही आए दिन होने वाले बवाल का सबब बन गया है। हाल इतने बदतर हो गए हैं कि सालाना करोड़ों रुपये सुरक्षा बजट पर खर्च करने वाले बीएचयू में सिविल पुलिस के बिना काम ही नहीं चल रहा। हर कुछ-कुछ दिन पर परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो जा रही है। यह स्थानीय पुलिस प्रशासन के लिए भी बड़ा सिरदर्द बन गया है। हालांकि पाठकों को स्मरण होगा कि पूर्व एसएसपी आकास कुलहरि ने गुस्से में ही सही यहां तक कह दिया था कि बीएचयू तो नासूर बन गया है तो वह गलत नहीं कहा था।

ऩए कुलपति के आने के बाद से सब कुछ सामान्य चल रहा था कि कि अचानक चीफ प्रॉक्टर का बयान कि सितंबर 2017 में छेड़खानी के विरोध में छत्राओं का आंदोलन प्रायोजित था। अब उसे लेकर छात्र-छात्राएं उत्तेजित हुईं। चीफ प्रॉक्टर के कमरे में तोड़-फोड़ हुई तो 12 छात्र-छात्राओं के खिलाफ संगीन मामलों में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। यहां तक कि बीए के विद्यार्थियों पर हत्या के प्रयास तक का मुकदमा दर्ज कराया गया। अब उन छात्र-छात्राओं के निष्कासन की बिसात तैयार की जा रही है। इसी बीच तीन पहले ही चाकूबाजी की घटना हो गई। उसके बाद जम कर पथराव हुआ तो फिर पुलिस को बुलाना पड़ा। जब तक पुलिस परिसर में रही तब तक सब कुछ शांत रहा पुलिस के बाहर निकलते ही मंगल-बुधवार की रात परिसर फिर से धधक उठा। आधी रात के बाद करीब एक बजे बिड़ला और लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास में रहने वाले छात्र सड़क पर उतर आए और ईंट-पत्थर के बीच पेट्रोल बम चलने लगे। फिर कई थानों की पुलिस पहुंची। कुछ देर गेट पर इंतजार करने के बाद पुलिस परिसर में घुसी तो जा कर स्थिति सामान्य हो पाई। ऐसे में विश्वविद्यालय के शिक्षक ही यह सवाल करने लगे हैं कि पिछले साल भर के अंदर कम से कम आधा दर्जन बार बिड़ला और लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास की तलाशी ली जा चुकी है, तलाशी में कुछ निकलता नहीं फिर ये अचानक पेट्रोल बम कहां से चलने लगते हैं। ऐसे छात्रों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की नजर क्यों नहीं जाती।

बता दें कि जब डॉ राकेश भटनागर ने विश्वविद्यालय के वीसी का पदभार ग्रहण किया था तब उन्होंने दावा किया था कि माहौल को बातचीत से सामान्य किया जाएगा। मगर समय-समय पर चीफ प्रॉक्टर से ही छात्र-छात्राएं आक्रोशित हो रहे है। मंगलवार की रात एक बार फिर विश्वविद्यालय अशान्त हो गया। विश्वविद्यालय में अधिकारियों के चक्रमण के साथ पुलिस की पूरी रात हूटर बजता रहा। देर रात विश्वविद्यालय के बिड़ला और एलबीएस छात्रावास के छात्र आमने-सामने हो गए जिसके बाद जमकर ईंट-पत्थर तो चले ही साथ ही पेट्रोल बम का इस्तेमाल भी हुआ। दोनों छात्रावास के छात्र इतने आक्रोशित थे कि कई चक्र में पुलिस और प्रोक्टोरियल बोर्ड के समझाना छात्रों का उपद्रव सुबह करीब 4 बजे शांत हुआ। दरअसल मंगलवार की रात अचानक बढ़े इस बवाल के पीछे दो दिन पूर्व हुए एलबीएस के छात्र आशुतोष मौर्या के साथ चाकूबाजी की घटना को कारण बताया जा रहा है। इसके अलावा पिछले हफ्ते एलबीएस के सीनियर और बिड़ला हॉस्टल के जूनियर छात्रों के बीच मारपीट की घटना हुई थी। इन्ही बातों को लेकर बिड़ला और एलबीएस हॉस्टल के छात्रों के बीच मंगलवार की आधी रात अचानक ही पथराव शुरू हो गया। इस दौरान छात्रों ने एक-दूसरे के हॉस्टल पर पेट्रोल और देशी बम भी फेंके। पथराव में दो छात्र घायल हो गए। जिन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। बीच-बीच में बम फूटने की भी आवाजें लगातार आती रहीं जिसकी वजह से कैंपस में काफी अराजकता का माहौल बना रहा। हालात यह है कि छात्र जमकर पत्थरबाजी और बमबाजी करते रहें और यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। दोनों तरफ से एक दूसरे पर ईंट-पत्थर बरसाए जाते रहे। पुलिस जब तक विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल होती छात्रों का उपद्रव बढ़ चुका था। एसपी सिटी सहित अन्य अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद मामला सुबह 4 बजे शांत हुआ। फिलहाल विश्वविद्यालय की स्थिति शांतिपूर्ण मगर तनावग्रस्त बताई जा रही है। मौके पर आधा दर्जन थाने की फोर्स व पीएसी तैनात है।

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