योगी सेे मुकाबले को सोशल मीडिया के मैदान में उतरी स्मृति ईरानी

योगी सेे मुकाबले को सोशल मीडिया के मैदान में उतरी स्मृति ईरानी
smriti irani

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने को अब स्मृति ईरानी और उनके समर्थक कूदे सोशल वार में, जानिए क्या है मामला

Vikas Bagi
वाराणसी. उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में इस समय और बसपा और भाजपा के बीच जंग चल रही है। बसपा और भाजपा के बीच चल रही नूराकश्ती के बीच भाजपा के अंदरखाने में नेता खुद को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने की मुहिम छेड़ रखे हैं। गोरखपुर के सांसाद आदित्यनाथ योगी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने के लिए भाजपा का एक गुट लगातार पार्टी पर दबाव बना रहा है। उधर वरुण गांधी को लेकर भी उनके समर्थकों ने हल्ला मचा रखा है। इन सबके बीच अब उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के लिए कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने भी सोशल मीडिया पर अपनी धमक दे दी है। स्मृति ईरानी व उनके समर्थकों की ओर से फेसबुक पर स्मृति ईरान फॉर यूपी सीएम नाम से एक पेज बनाया गया है। जुलाई महीने में शुरू हुए इस पेज को अब तक 67 हजार से अधिक लोग लाइक कर चुके हैं। हालांकि सीएम की रेस के मुख्य प्रतियोगी योगी को सोशल मीडिया पर पसंद करने वालों के मुकाबले काफी कम है क्योंकि स्मृति ईरानी का जनाधार यूपी में कम है। हालांकि बनारस में चाय की अडिय़ों से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यालयों तक में इस समय भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री बनने को लेकर चल रही गुणा-गणित को लेकर खूब चटखारे लिए जा रहे हैं। पार्टी सत्ता में कैसे आए इसपर रणनीति कम बन रही है लेकिन सीएम कौन होगा इसको लेकर पार्टी में चर्चाओं को इतनी जगह मिल चुकी है कि अब कोई भी नया चेहरा सामने आते ही लोग समझ बैठ रहे है कि हो न हो यहीं भाजपा की तरफ से सीएम का चेहरा होगा। समय बताएगा कि कौन कितना सही है लेकिन फिलहाल तो हम आपको बाजार में फैली उन चर्चाओं से अवगत करा रहे हैं जो यूपी की राजनीति में नया गुल खिलाएगा। 

... कहीं इसलिए तो ईरानी से नहीं छिना मंत्रालय
बीते दिनों मंत्रीमंडल के विस्तार के बाद अचानक स्मृति ईरानी से मानव संसाधन मंत्रालय वापस लेने के साथ ही उन्हें वस्त्र मंत्रालय सौंप दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खास माने जाने वाली स्मृति को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चटखारे लिए गए कि स्मृति ईरानी के चक्कर में आप वालों ने मोदी की डिग्री ही मांगनी शुरू कर दी थी इसलिए उन्हें हटा दिया गया। अब बनारस में चाय की दुकानों पर होने वाली चर्चाओं को सुनेंगे तो आपभी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि कहीं सच में तो ऐसा नहीं नहीं। अड़ीबाजों का मानना है कि स्मृति ईरानी से इतना अहम मंत्रालय इसलिए वापस लिया गया ताकि वह उत्तर प्रदेश के चुनाव में अधिक से अधिक ध्यान दें। मानव संसाधन मंत्री के पद से हटते ही स्मृति ईरानी का फेसबुक पर स्मृति ईरानी फार सीएम यूपी के नाम से पेज भी आ गया। कहीं न कहीं टीम मोदी स्मृति ईरानी को यूपी में सीएम का चेहरा बनाने की फिराक में क्योंकि बसपा में मायावती और कांग्रेस ने शीला दीक्षित को चेहरा बनाया है। ऐसे में भाजपा भी किसी महिला को ही यूपी में सीएम के चेहरे के तौर पर पेश करेगी।

...तो इस कारण एम्स गया गोरखपुर
भाजपा के छुटभैया कार्यकर्ताओं व बनारसी अड़ीबाजों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी  अपना संसदीय क्षेत्र वाराणसी छोड़कर गोरखपुर को एम्स दे आए। काशीवासियों व बीएचयू की मांग को दरकिनार कर गोरखपुर में एम्स की स्थापना ने काशीवासियों के साथ ही पूर्वांचल व बिहार को झटका लगा है क्योंकि वाराणसी में एम्स खुलने से पूर्वांचल के साथ ही बिहार के मरीजों को काफी लाभ मिलता। अड़ीबाजों का दावा है कि योगी को मनाने के लिए ही टीम मोदी ने गोरखपुर को एम्स का तोहफा दिया है। योगी गोरखपुर में एम्स के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे। अब मोदी ने उन्हें एम्स दे दिया है तो योगी स्वयं मुख्यमंत्री बनने के लिए पार्टी पर खासा दबाव नहीं डाल पाएंगे। गोरखपुर को एम्स मिलने के बाद योगी के सुर भी बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। 


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