काशी में वायु प्रदूषण खतरनाक, स्वांस, फेफड़े के रोगियों में 40 फीसदी तक का इजाफा

खोदे गए गड्ढ़ों से उड़ती धूल, कूड़ों के नियमित निस्ताण में कमी, डीजल चालित वाहनों में बेहिसाब इजाफा प्रदूषण का प्रमुख कारण।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 10 Nov 2017, 03:01 PM IST

Varanasi, Uttar Pradesh, India

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. दिल्ली ही नहीं काशी में भी प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। आलम यह है कि इस वायु प्रदूषण के चलते शहर में श्वांस, त्वचा और फेफड़ों के मरीजों में 30 से 40 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन कान में तेल डाल कर सो रहा है। शहर की आबोहवा की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत समाजसेवी संस्थाओं और चिकित्सकों का कहना है कि लगता है कि प्रशासन को इंतजार है किसी बड़ी अनहोनी का। शहर के प्रमुख चिकित्सकों ने सरकार से हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग की है।

केयर 4 एयर की प्रमुख एकता शेखर ने बताया कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से ही शहर की आबोहवा बिगड़ी शुरू हो गई। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में ही पीएम-10 और पीएम 2.5 के आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के घोषित मानक (50 और 25 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) की तुलना में क्रमशः तीन व पांच गुना बढ़ चुके थे। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में यह प्रदूषक 10 से 14 गुना बढ़ गए। पिछले 15 दिनों में य आंकड़े बेतरतीबी के साथ बढ़े हैं। बावजूद इसके इन बिगड़ती स्थितियों पर नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने कहा कि हालात जब बेकाबू हो जाएंगे तो प्रशासन सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू करेगा लेकिन यह कोई मर्ज का स्थाई हल नहीं। शहर में कचरे के निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में नगर निगम कर्मियों के साथ आम लोगों के पास भी कचरे को जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सड़कों का हाल बुरा है। बिजली के तारों को भूमिगत करने के लिए पूरा शहर खोद डाला गया है। इससे उड़ने वाली धूल लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। साथ ही ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था के चलते कदम- कदम पर लगने वाले जाम के कारण डीजल व पेट्रोल वाहनों से निकलने वाले काले धुएं वायु प्रदूषकों को बढ़ाने में कारगर साबित हो रहे है।

काशी में प्रदूषण की स्थिति

पत्रिका के सवाल कि क्या बनारस और आसपास के इलाकों में भी किसान परौली (धान की खूंटी) और पत्तों को जलाने की समस्या भी वायु प्रदूषण को बढ़ा रही है दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा, पंजाब की तरह। एकता का जवाब था कि हरियाणा और पंजाब की तुलना में पूर्वांचल में इसकी मात्रा कहीं ज्यादा है, यह जरूर है कि पूर्वांचल हरियाणा, पंजाब की तुलना में ज्यादा फैला हुआ है इसलिए सघनता की कमी के कारण इसका उतना असर नहीं दिखता लेकिन वायु प्रदूषकों के विस्तार में यह भी एक प्रमुख कारण है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस पर रोक के लिए छोटे-छोटे बायो गैस संयंत्र नहीं स्थापित किए जाने चाहिए, इससे जहां धान की परौली व पत्तों की बिक्री हो सकेगी किसान को भी लाभ होगा और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही बिजली भी मिलेगी। एकता ने कहा कि इससे बेहतर और क्या हो सकता है। लेकिन सरकार जागे, इस तरफ उसका ध्यान दे। विशेषज्ञों से बात करे तब तो। इस दिशा में तो कोई सोचता ही नहीं।

प्रदूषण नियंत्रण की लड़ाई लड़ने वाली एकता शेखर

वायु प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभाव की बाबत शहर के प्रमुख चेस्ट विशेषज्ञ डॉ आरएन वाजपेयी ने पत्रिका से सवाल के जवाब में बताया कि पिछले एक महीने में शहरी क्षेत्र में स्वांस, त्वचा और फेफड़ों के रोगियों की संख्या में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग ज्यादा है। उन्होंने बताया कि पीएम 2.5 कण अपने अति सूक्ष्म आकार के कारण श्वांस नली से होते हुए व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंचते हैं फिर रक्त में घुल कर धमनियों में बहने लगता है। ऐसे में व्यक्ति धीरे-धीरे कई समस्याओं से ग्रसित होने लगता है। डॉ वाजपेयी ने सरकार से हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की मांग की।

चिकित्सकीय सलाह
डॉ वाजपेयी ने बताया कि जब तक धुंध की चादर पूरी तरह से खत्म न हो जाए तब तक घरों से बाहर न निकलें।
बहुत जरूरी हो तो नाक व मुंह पूरी तरह से ढंक कर निकलें।
पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
बच्चों और बुजुर्गों को कतई बाहर न निकलने दें।
वर्जिश आदि कतई न करें।

वाराणसी में वायु प्रदूषण की स्थिति

तिथि PM10 PM 2.5
1 अक्टूबर 158 193
2 अक्टूबर 144 220
3 अक्टूबर 131 207
4 अक्टूबर 153 257
5 अक्टूबर 131 207
6 अक्टूबर 153 257
10 अक्टूबर 500 188
11 अक्टूबर 445 140
12 अक्टूबर 489 309
13 अक्टूबर 500 352
14 अक्टूबर 382 369
15 अक्टूबर 479 402
16 अक्टूबर 500 346
19 अक्टूबर 453 477
25 अक्टूबर 403 343
26 अक्टूबर 411 388
27 अक्टूर 302 369
28 अक्टूबर 418 354
29 अक्टूबर 319 348
30 अक्टूबर 359 315
2 नवंबर 196 240
4 नवंबर 294 428
6 नवंबर 422 490
7 नवंबर 446 395
8 नवंबर 449 395
10 नवंबर Avg: 465-Max: 500 Avg: 478-Max: 500

 

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