रिपोर्ट: दिवाली पर बनारस में चिंताजनक स्तर तक पहुंचा वायु प्रदूषण

  • 'क्लाइमेट एजेंडा' ने जारी की दिवाली के दिन प्रदूषण की विस्तृत रिपोर्ट
  • संस्था का दावा बनारस में 18 स्थानों पर वायु मापक यंत्र लगाकर जुटाए गए आंकड़े
  • एनजीटी बैन के बावजूद पटाखे फूटने से वायु गुणवत्ता चिंताजनक स्तर तक पहुंची

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. इस दिवाली बनारस समेत 13 शहरों में पटाखों पर बैन रहा, जो अभी 30 नवंबर तक लागू रहेगा। यह इस मकसद से किया गया था ताकि दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। पर क्या ऐसा सच में हुआ यह एक सवाल है। क्लाइमेट एजेंडा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पटाखा बैन के बावजूद इस बार दिवाली में बनारस का वायु प्रदूषण बढ़ा रहा और दिवाली पर वायु गुणवत्ता बेहद चिंताजनक स्तर पहुंच गई। संस्था की ओर से लगातार पांचवे वर्ष दिवाली के आंकड़ों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए कहा गया है कि इस बाद दिवाली के मौके पर शहर में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर भारत सरकार के मानकों की तुलना में 4 गुना अधिक रहा।

 

क्लाइमेट एजेंडा का दावा है कि शहर के 18 स्थानों पर वायु गुणवत्ता जांचने की मशीनें लगाकर दिवाली की अगली सुबह 3 बजे से लेकर आठ बजे तक ये आंकड़े इकट्ठा किये गए। इसकी रिपोर्ट 16 नवंबर को जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड 19 संक्रमण के खतरे के मद्देनजर बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रहने के उद्देश्य से जारी एनजीटी के दिशा निर्देशों की अवहेलना हुई है। वाराणसी में रोक के बावजूद पटाखे फूटते रहे। जिनके चलते शहर में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर खतरनाक रूप से मानक की तुलना में चार से साढ़े चार गुना अधिक रहा।

 

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Climate Agenda IMAGE CREDIT: Source

 

आशापुर रहा सबसे प्रदूषित

क्लाइमेट एजेंडा के मुताबिक उन्होंने शहर के 18 विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता जांच की मशीनें लगाकर दिवाली की अगली सुबह 3 बजे से 8 बजे तक जो आंकड़े एकत्रित किये उसमें प्रदूषण स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला। मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि शहर में पी एम 10 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा। आशापुर सबसे अधिक प्रदूषित रहा जहां PM-2.5 और PM-10 की मात्रा भारत सरकार के मानकों की तुलना में क्रमशः 4 और 4.5 गुणा अधिक पायी गयी। पांडेयपुर क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहा जहां PM-2.5 और PM-10 प्रदूषक कण क्रमशः 4 और 3.5 गुना रहा। शीर्ष 5 प्रदूषित क्षेत्रों में आशापुर, पांडेयपुर के अलावा सारनाथ, काशी स्टेशन और कचहरी पाया गया, जबकि तुलनात्मक तौर पर रविन्द्रपुरी क्षेत्र थोड़ा साफ़ रहा जहां PM-2.5 और PM-10 मानक से दो गुना अधिक पाया गया।

 

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कोविड के खतरे को देखते हुए लगा था प्रतिबंध

एकता शेखर ने कहा कि विभिन्न राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा जारी अध्ययनों के अनुसार हवा में बढ़ते हुए प्रदूषण से कोविड 19 संक्रमण भी बढ़ने का खतरा पाया गया है। इन्ही अध्ययनों का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने अत्यधिक प्रदूषित हवा वाले शहरों में पटाखे बेचने और खरीदने पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाने का आदेश जारी किया था। उनका कहना है कि इस आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी राज्य शासन की ओर से सम्बंधित जिला प्रशासनों को दी गई थी, लेकिन वो इसमें फेल रहे। नतीजतन न केवल शहर की आबोहवा खराब हुई, बल्कि श्वांस संबंधी रोगों का उपचार कराने वाले सहित अन्य बच्चे, बूढ़े व कोविड 19 के मरीजों के सामने एक विकट परिस्थिति भी पैदा हुई है।

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खस्ताहाल सड़कें और खराब कचरा प्रबंधन भी जिम्मेदार

संस्था के हवाले से जारी रिपोर्ट में PM-10 के चिंताजनक आंकड़ों के हवाले से पटाखों के साथ साथ शहर की खस्ताहाल सड़कों और बेहद खराब कचरा प्रबंधन को भी इसका जिम्मेदार बताया गया है। हालांकि, शहर में तीन नए वायु गुणवत्ता मापन यंत्रों की स्थापना सम्बन्धी पिछले सप्ताह जारी आदेश एक अच्छी पहल है, जिसे काफी पहले ही लिया जाना चाहिए था।

रफतउद्दीन फरीद
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