फेफड़े का कैंसर फैलने की सबसे बड़ी वजह बना वायु प्रदूषण

फेफड़े का कैंसर फैलने की सबसे बड़ी वजह बना वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण

Ajay Chaturvedi | Updated: 21 May 2019, 02:50:15 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

बीते तीन साल में वाराणसी को प्रदूषण से बचाने की कोई कोशिश नहीं
हवा में घुला जहर बन गया बीमारी का घर।

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. वायु प्रदूषण इस कदर आम आदमी के जीवन को प्रभावित कर रहा है जिसका कोई जवाब नहीं। ये हवा में घुलता जहर अब फेफड़े के कैंसर का कारण बनता जा रहा है। इसके अलावा तमाम ऐसी बीमारियां हैं जिनका कोई इलाज नहीं। बावजूद इसके इस तरफ किसी की ध्यान हीं। शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधि सभी ने इस तरफ से मुंह मोड़ रखा है। आलम यह है कि 20 मई को बनारस में पीएम 2.5- 122 और पीएम 10-265 रहा जो किसी स्वस्थ्य मनुष्य के लिए घातक है।

वायु प्रदूषण पर काम करने वाली संस्था क्लाइमेट एजेंडा की डायरेक्टर एकता शेखर और प्रमुख कार्यकर्ता शानिया अनवर ने पत्रिका को बताया कि पिछले महीने "स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019" की रिपोर्ट बताती है कि भारत में वायु प्रदूषण के कारण 1.2 मिलियन लोगो की मौत 2017 में हुई है। उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि वायु प्रदूषण से होने वाली जानलेवा बीमारियों में दिल के दौरे, स्ट्रोक, मधुमेह, फेफड़े के कैंसर आदि प्रमुख हैं। साथ ही रिपोर्ट यह भी बताती है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों के जीवन का औसत दो साल छह महीने कम हो जाएगा। भारत में, सभी स्वास्थ्य जोखिमों में होने वाली मृत्यु में वायु प्रदूषण तीसरा सबसे बड़ा कारण है।

क्लाइमेट एजेंडा की डायरेक्टर एकता शेखर बताती है कि पिछले 03 सालो में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं अपनी रिपोर्टो में वायु प्रदूषण के बढ़ते जोखिम की असल तसवीर दिखा रही हैं। लगभग सभी रिपोर्ट्स में भारत प्रदूषण में अव्वल नंबर पर रहता है। इसमे हमारी सरकारों और प्रशासन की उदासीनता एवं लापरवाही प्रमुख है। देश में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ कार्यनीति, घरेलू स्वच्छ इंधन के लिए उज्जवला योजना, परिवहन के लिए बी एस 6 स्वच्छ वाहन मानक तो बन गए हैं, मगर व्यावहारिक रूप से ये सारी नीतियां कागज़ों तक ही सीमित है। इससे न तो पर्यवारण शुद्ध हो रहा है और ना ही आम आदमी का स्वास्थ्य सुधर रहा है।

वह आगे बताती है कि आज के समय में जितनी तेज़ी से प्रदूषण बढ़ रहा है, प्रदूषण रोकने के प्रयास उतने ही धीमी गति से हो रहा है। यह कल्पना अब बिल्कुल झूठी साबित हो रही है कि प्रदूषण केवल ठंड के मौसम में ही बढ़ता है। वाराणसी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पिछले 10 दिन आंकड़े देखे जाए तो यह मानक से दो से तीन गुना अधिक आ रहे हैं। इसका कारण खराब सड़को से उड़ती धूल, गाड़ियों में मानकों की अनदेखी करते हुए उससे निकलने वाले ज़हरीले धुंए, हरियाली का अभाव, कचरा जलाया जाना आदि प्रमुख है, जो शहर की आबोहवा को जानलेवा बना रहा है।

वह बताती हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट 2018 की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी दुनिया के 4300 शहरों में से तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। कहा कि ये आपात स्थिति को दर्शाता है। अब तो सरकारी और स्थानीय प्राधिकरणों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। यहां खुले आम सड़कों पर कूड़ा जलाया जा रहा है। इस पर कोई नियंत्रण नहीं हो रहा है।

प्रमुख फिजिशियन और आईएमए के पूर्व पदाधिकारी डॉ पीके तिवारी कहते हैं कि पिछले तीन साल से लगातार प्रदूषण के पीड़तों की संख्या बढ़ रही है। इसमें फेफड़े के रोगी तो हैं हीं जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है। साथ ही पेट के रोगियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। फेफड़े इस कदर संक्रमित हो रहे हैं कि कैंसर के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता।

स्किन स्पेसलिस्ट डॉ एनके मिश्र कहते हैं कि यह सच है कि हाल के वर्षों में स्किन डिजीज में बढ़ोत्तरी हुई है। इसका एक प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है। जहां-तहां उड़ती धूल, डीजल व पेट्रोल के काले धुएं लोगों की चमडी को बर्बाद कर रहे हैं।

वाराणसी वायु प्रदूषण की अद्यतन स्थिति

दिनांक- PM 2.5 PM 10
20 मई- 122- 265
19 मई- 68- 221
18 मई- 82- 317
17 मई- 96- 330
16 मई- 89- 284
15 मई- 77- 264
14 मई- 102- 298
13 मई- 86- 287
12 मई- 73- 274
11 मई- 82- 301

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