दीपावली पर घातक हुई बनारस की आबो हवा, दो गुना बढ़ा वायु प्रदूषण

Ajay Chaturvedi

Publish: Oct, 18 2017 05:01:37 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. प्रदूषण की स्थिति केवल नई दिल्ली एनसीआर में ही घातक नहीं है। ऐतिहासिक, धार्मिक व प्राचीनतम नगरी काशी का हाल भी बहुत बुरा है। लेकिन यहां किसी तरह का प्रतिबंध नहीं है। इस शहर में पटाखा छोड़ने की बात तो दूर नगर निगम खुद कूड़ा तक जला रहा है। इस पर कहीं कोई रोक थाम नहीं। जहां तहां जलते कूड़े नजर आ जाएंगे। नतीजा यह है कि वाराणसी में दीपावली के दो दिन पहले यानी धनतेरस पर ही शहर की आबो हवा खतरानक स्तर तक पहुंच गई है। इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण वोर्ड की वेबसाइट पर भी मंगलवार शाम तीन बजे के बाद के आंकड़े नहीं दर्शाए जा रहे हैं। लेकिन आम आदमी परेशान है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर ही गौर करें तो पिछले साल की तुलना में वायु प्रदूषण में दो गुने का इजाफा हो गया है। ये हाल तब है जब इस शहर में कोई बडी इंडस्ट्री नहीं।

प्रदूषण स्तर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016 में दीवाली से एक दी पहले यानी 29 अक्टूबर को PM 10- 311.03 और PM 2.5- 141.32 माइक्रान था। इसकी तुलना में इस साल अभी दीवाली आनी शेष है ऐसे में धनतेरस को ही शाम तीन बजे PM10- 281 और PM 2.5-306 माइक्रान तक पहुंच गया था। यानी दीपावली पर गली मोहल्लों में होने वाली आतिशबाजी के बाद क्या हाल होगा इसे सोच कर ही वैज्ञानिकों की रुह कांप जा रही है। बता दें कि PM 2.5 कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसके कण दिखते नहीं और तमाम मास्क लगाने के बावजूद ये फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।

पिछले साल ही प्रदूषण में दो गुना हो गई थी वृद्दि

बता दें कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर व वायु प्रदूषण विशेषज्ञ प्रो. अभय सिंह हर साल दीपावली से तीन दिन पहले और तीन बाद तथा दीपावली के दिन शहर के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण के स्तर की जांच कराते हैं। आंकड़ों के आधार पर शोध किया जाता है। ऐसे में पत्रिका ने बुधवार को जब प्रो. सिंह से इस बाबत बातचीत की तो पता उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों की तुलना में पिछले साल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में डेढ़ से दो गुना की वृद्धि दर्ज की गई थी। बताया कि PM 2.5 व PM10 दोनों ही मानक से दोगुने स्तर तक पहुंच गए थे। ऐसे में सल्फेट, पोटैशियम, मैगनिशियम जैसे घातक पदार्थों की मात्रा बढ़ी थी। उन्होंने बताया कि इन पदार्थों के बढ़ने का असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। दमा के रोगियों की परेशानी बढ़ती है, सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उन्होंने बताया कि अध्ययन जारी है दीवाली के तीन दिन बाद ही तुलनात्मक रिपोर्ट सामने आएगी।

वो दिन दूर नहीं जब बनारस दिल्ली से खतरनाक हो जाएगा

शहर के वायु प्रदूषण पर लगातार अभियान चलाने वाली केयर 4 एयर की प्रमुख एकता शेखर व सानिया अनवर ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के आधार पर पत्रिका से बातचीत में बताया कि हालात घातक हैं। उन्होंने कहा कि मानक के तहत PM 2.5 60 माइक्रान और PM 10 100 माइक्रान से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो PM 2.5 की मात्रा इतनी ज्यादा है जो अच्छे खासे इंसान को बीमार बना दे। कहा कि धनतेरस को ही शाम तीन बजे PM10- 281 और PM 2.5-306 माइक्रान तक पहुंचना बताता है कि दीवाली पर तो सांस लेना दूभर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दरअसल इस घनी आबादी वाले शहर में वाहनों की संख्या में जबरदस्त इजाफा, कूड़ों में आग लगाने, पिछले कई सालों से हो रही सड़कों की खोदाई से उड़ने वाली धूल के साथ इस साल बिजली की जबरदस्त कटौती के चलते बाजारों में सुबह से शाम तक चलने वाले डीजल चालित जेनेरेटर प्रदूषण बढ़ाने में ज्यादा सहायक हो रहे हैं। एकता शेखर की बातों पर गौर फरमाएं तो स्थिति साफ दिखती है कि अगर अब भी शासन प्रशासन नहीं चेता तो इस बनारस की हालत दिल्ली से कहीं ज्यादा घातक हो जाएगी। सानिया कहती हैं कि कोयला, डीजल पेट्रोल का विकल्प जल्द से जल्द न ढूंढा गया तो परिणा क्या होंगे इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

ये हैं प्रमुख कारण

बता दें कि इस साल जिस तरह से आईपीडीएस को दिसंबर तक बिजली के सारे तारों को भूमिगत करने का लक्ष्य दिया गया है, उसके चलते शहर में दिन-दिन भर बिजली की कटौती हो रही है। बिजली नहीं तो लोग जेनेरेटर चला रहे हैं जिससे निकलने वाला काला धुआं प्रदूषण बढ़ाने में कहीं ज्यादा सहायक हो रहा है। इसके अलावा बिजली के तारों को भूमिगत करने का सवाल हो या सीवर लाइन को दुरुस्त करने का अथवा पेयजल पाइप लाइन को दुरुस्त करने का मामला। पूरा शहर में खोदाई हुई है। ऐसे में धूल वायु प्रदूषण की वृद्धि में सहायक हो रहा है। फिर नगर निगम जो लगातार न्यायालय व एनजीटी के आदेशों की अवहेलना कर कूड़ों में आग लगा रहा है। फिर जब नगर निगम के कर्मचारी कूड़े में आग लगाते हैं तो आम आदमी भी इन दिनों घरों व दुकानों का कूड़ा निकाल कर जहा-तहां उसमें आग लगा दे रहा है।

 

स्वयंसेवी संस्थाएं चला रहीं जागरूकता अभियान

यहां यह भी बता दें कि वायु प्रदूषण से चिंतित सर्वोच्च न्यायालय ने जैसे ही दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री और आतिशबाजी पर रोक लगाई, बनारस में केयर 4 एयर के साथ युवाओं की टीम होप के युवाओं की टोली ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की टीम को उतारा और आतिशबाजी के विरोध में जनजागरण अभियान छेड़ रखा है। एयर 4 केयर के लोग जहां हस्ताक्षर अभियान व नुक्कड़ नाटक कर रहे हैं तो होप संस्था से जुड़ी ग्रीन ग्रुप की महिलाएं तो मॉल तक में जा कर मिट्टी के दीये मुफ्त वितरित कर लोगों को दीपोत्सव को दीयों से मनाने का आह्वान कर रही हैं। वे गलियों और पॉश कॉलोनियों में जा रही हैं, छात्राओं के कॉलेजों में जागरूकता अभियान चला रही हैं। लेकिन शासन-प्रशासन पूरी तरह से हाथ पर हाथ धरे बैठे है। किसी सरकारी संस्थान की ओर से इस दिशा में कोई पहल अब तक नहीं की गई है।

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