PATRIKA EXCLUSIVE AK-47 ने यूपी में जब भी आग उगली, गृहमंत्री राजनाथ के करीबी बने निशाना

PATRIKA EXCLUSIVE AK-47 ने यूपी में जब भी आग उगली, गृहमंत्री राजनाथ के करीबी बने निशाना
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उत्तर प्रदेश में ग्यारह साल बाद सुनाई दी एके-47 की गूंज, जानिए इसके पहले कौन बीजेपी नेता बना था निशाना

विकास बागी
वाराणसी. उत्तर प्रदेश के जिला गाजिायाबाद में भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया व उनके काफिले पर गुुरुवार की रात बदमाशों ने एके-47 से गोलियां बरसाई। फिलहाल ब्रजपाल तो बच गए लेकिन एके 47 से निकली गोलियां कई सवाल भी छोड़ गई हैं। उत्तर प्रदेश में लगभग ग्यारह साल बाद किसी गिरोह ने एके-47 का इस्तेमाल किया है। एके-47 से निकली गोलियों ने दूसरी बार भी बीजेपी नेता को ही निशाना बनाया है। इतना ही नहीं दोनों बार देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबियों पर ही हमले हुए।
 

उत्तर प्रदेश में एके-47 से 2005 में पूर्वांचल के कद्दावर नेता व बाहुबली विधायक कृष्णानंद राय की नृशंस तरीके से हत्या की गई थी। कृष्णानंद राय पर हमला 29 नवंबर 2005 को उस समय हुआ जब वह बनारस से गाजीपुर जा रहे थे। बदताशों ने एक के बाद एक कर लगभग ढाई सौ गोलियां भाजपा विधायक के काफिले पर बरसाई थी। पूरा इलाका गोलियों की गूंज से कांप उठा था। 


गाजीपुर से विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में बाहुबली मोख्तार अंसारी फिलहाल जेल में हैं। मोख्तार व कृष्णानंद राय के बीच राजनीतिक दुश्मनी तो थी ही, कृष्णानंद राय का माफिया व अब एमएलसी बृजेश सिंह को संरक्षण था जिसके चलते मोख्तार अंसारी की नजरों में वह चढ़े थे। इस हत्याकांड  में मुन्ना बजरंगी समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। 

यह एक अजीब संयोग है कि उत्तर प्रदेश में जब भी एके 47 ने आग उगली है गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी ही निकला। ब्रजपाल सिंह तेवतिया को राजनाथ सिंह का करीबी माना जाता है। राजनीतिक मित्र तेवतिया पर हुए हमले की खबर मिलते ही राजनाथ सिंह के बेटे पंकज अस्पताल पहुंचे थे। पूर्वांचल की माटी में जन्मे राजनाथ सिंह के कृष्णानंद राय से भी गहरे ताल्लुकात थे। उन दिनों राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में हुआ करते थे जब कृष्णानंद राय की तूती पूर्वांचल में बोलती थी।


बीजेपी के नेताओं के अलावा उत्तर प्रदेश में एक डकैत से स्वयंभू संत बने संत ज्ञानेश्वर की 11 फरवरी को संगम की रेती पर माघ मेले के दौरान बस्र्ट फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी। साधू-संतों की भीड़ में आग उगलती एके 47 ने संत ज्ञानेश्वर न उनकी चार शिष्याओं को मौत की नींद सुला दिया था। संत बनने से पूर्व ज्ञानेश्वर इनामी डकैत सदानंद तिवारी के रूप में फाइलों में दर्ज था। इस चर्चित हत्याकांड में सुल्तानपुर के सोनू सिंह-मोनू सिंह का नाम आया था जिनकी सदानंद तिवारी से पुरानी रंजिश थी। 

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