सपा के दंगल ने किया मोदी का मेगा शो फ्लाप

सपा के दंगल ने किया मोदी का मेगा शो फ्लाप
samajwadi dangal

राहुल की खटिया पहली कर चुके हैं खड़ी

वाराणसी. समाजवादी पार्टी के सियासी घमासान ने विरोधी दलों की नींद उड़ा रखी है। सोशल मीडिया से लेकर मीडिया और जनता के बीच भाजपा, कांग्रेस या फिर बसपा नहीं, वरन सिर्फ और सिर्फ अखिलेश, मुलायम और शिवपाल, रामगोपाल को लेकर चौराहे-चट्टी पर चर्चाओं का दौर है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंकने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी और महोबा के दौरे पर है। मोदी के दिल्ली से बाहर होते ही टीवी-चैनल से लेकर समाचार पत्रों व आम जनमानस के बीच चर्चाएं शुरू  हो जाती थी कि आज मोदी क्या करेंगे लेकिन आज सोमवार को वाराणसी से लेकर यूपी को छोडि़ए पूरे देश में मोदी इस समय सपा के सियासी संग्राम में ऐसा फंसे कि उनकी चर्चा कहीं दूर-दूर तक नहीं हो रही है। आलम यह है कि वाराणसी में डीरेका ग्राउंड पर जुटे भाजपाइयों में भी मोदी के कार्यक्रम को लेकर कम, अखिलेश व सपा के भविष्य को लेकर अधिक चर्चा थी। कहना गलत नहीं होगा कि मोदी का वाराणसी में अब से कुछ देर बाद होने वाली सभा शुरू होने से पहले ही फ्लाप हो गई क्योंकि सियासी सिनेमाहाल में अखिलेश व सपा की फिल्म सुपरहिट चल रही है जबकि मोदी समेत अन्य राजनीतिक दलों की फिल्में चल ही नहीं पा रही है।

समाजवादी पार्टी का सियासी घमासान ठीक उस समय शुरू हुआ था जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी खटिया लेकर उत्तर प्रदेश में आए। खाट सभा के बीच सपा में सियासी तुफान उठा और राहुल समेत कांग्रेसियों की खाट उड़ गई। कांग्रेस की खाट सिर्फ लूट को लेकर चर्चा में रही। सोशल मीडिया पर बस लोग चटखारे लेते रह गए कि इंसान जब मरणासन्न होता है तब खाट पकड़ लेता है। राहुल और प्रशांत किशोर की खाट पर बैठकर लोग सपा के महाभारत की चर्चा करते रहे। 

ऐसा ही कुछ भाजपा के साथ हुआ। उत्तर प्रदेश के चुनाव में मोदी का चेहरा लेकर उतर रही भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक को भुनाने में लगी थी। पार्टी इसे मुद्दा बनाने में जुटी थी लेकिन पार्टी कुछ करती उससे पहले ही सपा में फिर बम फूटा। सपा के बम के आगे भाजपा का पटाखा फुस्स हो गया। 

बसपा बॉस मायावती की पार्टी भी सपा के सियासी ड्रामे में कहीं गुम सी हो गई है। मायावती ने अपनी पार्टी की ताकत दिखाने के लिए बीते दिनों लखनऊ में शक्लि प्रदर्शन किया था लेकिन वह प्रदर्शन भी कार्यकर्ताओं की मौत के कारण मायावती को एक झटका दे गया। अखिलेश ने वहां भी मायावती से पहले मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद करके मायावती को सकते में डाल दिया था। 
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