शिल्पकारों पर अखिलेश सरकार मेहरबान, पेंशन हुई डबल

हस्तशिल्पियों के उत्थान को उठाया ये कदम

वाराणसी. परिवार में मचे घमासान के बीच अखिलेश यादव का पूरा ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव में वोटरों को लुभाने पर लगा है। लैपटाप का वादा कर सत्ता में आने के बाद दोबारा वापसी के लिए अखिलेश ने स्मार्ट फोन का लालीपॉप थमाया है। चुुनावी मोड में आ चुके सीएम अखिलेश ने बीते एक वर्षों में कई ऐसे काम किए जिससे चुनाव में उन्हें सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से आंदोलन कर रहे होमगार्डों को 100 डायल में प्रशिक्षित कराकर उनका भत्ता बढ़ाया तो कभी पेंशन में बढोतरी की, बुजुर्गों का आशीर्वाद पाने को श्रवण यात्रा शुरू कराई। 

आधुनिकता व इलेक्ट्रानिक उत्पादों के बीच अपना वजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहे सूबे के शिल्पकारों की मदद को उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना हाथ आगे बढ़ाया है। बीते कुछ सालों में बढ़ी बेतहाशा महंगाई के चलते हस्त शिल्पी अपने व्यवसाय से मुंह मोड़ रहे हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के उद्योग निदेशालय की तरफ से सरकार हस्त शिल्पियों की पेंशन योजना में वृद्धि की है। प्रमुख सचिव रजनीश दुबे की अनुसार हस्तशिल्पियों का पलायन रोकने, उनके जीवन स्तर में वृद्धि के लिए सरकार ने विशिष्ट शिल्पकारों को दी जानी वाली पेंशन राशि दो गुनी कर दी है। 

विशिष्ठ शिल्पकारों को प्रदेश सरकार की तरफ से प्रतिमाह एक हजार रुपये की धनराशि बतौर पेंशन दी जा रही थी। वर्ष 2008 से जारी इस पेंशन व्यवस्था में सुधार करते हुए सपा सरकार ने इसे दो गुना कर दिया है। सूबे के शिल्पकारों को अब सरकार प्रतिमाह दो हजार रुपये अपने खजाने से अदा करेगी। 

उत्तर प्रदेश के हस्त शिल्पकारों को अखिलेश यादव की सरकार ने एक और तोहफा दिया है। हस्त शिल्पकार अपने उत्पाद की बिक्री के लिए प्रतिवर्ष दो बार मेले में प्रतिभाग कर सकते हैं। हस्तशिल्प विपणन प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश सरकार वर्ष में एक बार मेले का आयोजन कराती है। अब शिल्पकार सरकारी मेले में साल में दो बार अपने उत्पाद का स्टाल मेले में लगा सकेंगे। सरकार की इस पहल से शिल्पकारों में खासी उम्मीद जगी है क्योंकि दो बार उन्हें मेले में प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा तो निश्चित तौर पर सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नई जान मिलेगी। 
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Vikas Verma
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