आरुषि-हेमराज हत्याकाण्ड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी, पढ़िये पूरा मामला विस्तार से

Rafatuddin Faridi

Publish: Oct, 12 2017 11:16:58 (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India
आरुषि-हेमराज हत्याकाण्ड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपति को किया बरी, पढ़िये पूरा मामला विस्तार से

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पलटा सीबीआई अदालत का फैसला, आरुषि-हेमराज हत्याकाण्ड में तलवार दम्पति को किया बरी।

इलाहाबाद. देश की सबसे चर्चित मर्डर मिस्ट्री आरुषि-हेमराज हत्याकाण्ड में राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर तलवार को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के सजा के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई अभियोजन केस को साबित नहीं कर सकी। इस कारण तलवार दम्पति को लाभ देते हुए उन्हें बरी किये जाने का आदेश दिया गाय है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा प्रथम की खण्डपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जो साक्ष्य दिया उससे वह कड़ी से कड़ी साक्ष्य को साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ अपीलार्थी तलवार दम्पति को दिया जाना चाहिए। इस नाते साक्ष्य के अभाव में उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने दंत चिकित्सकों को बरी कर दिया तथा सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के आदेश दिनांक 26 नवम्बर 13 को रद्द कर दिया है। दोनों अपीलार्थी इस समय डासना जेल गाजियाबाद में बंद है। कोर्ट ने उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक बार निर्णय सुरक्षित कर लिया था तथा आदेश की प्रतीक्षा की जा रही थी लेकिन कोर्ट ने मामले को रेयर एण्ड रेयरेस्ट (विरल से विरलतम) केस मानते हुए इस मामले की कुछ मुद्दों पर दोबारा सुनवाई की थी। गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ पति-पत्नी दोनों ने हाईकोर्ट में अपील थी।

 

क्या है मामला
16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला। जबकि 17 मई को नौकर हेमराज 45 की डेड बाडी छत पर मिली थी। आरूषि का गला रेता गया था। 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड में अदालत आरुषि के माता-पिता नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दिया। उस वक्त की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। नूपुर और राजेश तलवार गाजियाबाद की डासना जेल में अपनी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

 

 

पहले फैसला सुरक्षित रखा था हाईकोर्ट ने
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने छह नवम्बर 2013 को नुपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दंपति ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा ने इस साल सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई 18 महीने तक चली थी। तलवार दंपति दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे। डॉ. राजेश पंजाबी परिवार से हैं और नुपुर महाराष्ट्रियन फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं और डॉ. राजेश हार्ट स्पेशलिस्ट के बेटे हैं। आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था। सीबीआई की दो टीमों ने जांच कीं, जिनमें से एक ने क्लीन चिट दीया तो दूसरी ने तलवार दंपति को सस्पेक्ट माना। इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपति को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। इस केस की जांच 31 मई 2008 को उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपति को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना। इसके बाद सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपति को प्राइम सस्पेक्ट माना।

 

 

16 मई 2008 को आरुषि की मिली बाडी
16 मई 2008 आरुषि तलवार की बाडी उनके घर में मिली और 17 मई को नेपाल के रहने वाले नौकर हेमराज की लाश छत पर मिलीए उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप राजेश तलवार ने लगाया था। 18 मई 2008 को जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही पुलिस ने माना की मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है और 19 मई को तलवार परिवार के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जाहिर किया। 21 मई को यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी मर्डर की जांच में शामिल हुई और 22 मई को आरुषि की हत्या आनर किलिंग होने का शक पुलिस ने जाहिर किया। इस पहलू से भी जांच शुरु की गई। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।

 

 

 

23 मईको डा राजेश तलवार को मर्डर अरेस्ट किया
23 मई 2008 को पुलिस ने डॉ राजेश तलवार को मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया और 29 मई को जांच सीबीआई के हवाले हुई। एक जून 2008 को सीबीआई ने जांच शुरू की। तीन जूनए 2008 को कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया। 27 जूनए 2008 को नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया। 12 जुलाई 2008 को नौकर विजय मंडल अरेस्ट डाण् तलवार को जमानत मिली। 29 दिसंबर 2010 सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए। नौ फरवरी 2011 को मामले में तलवार दंपति को आरोपी बनाया गया। 21 फरवरी 2011 को दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए। 19 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट गएए यहां भी राहत नहीं मिली। 11 जूनए 2012 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की और 26 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा हुई। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।

 

 

आरूषि.हेमराज मर्डर मिस्ट्री को लेकर हाईकोर्ट में जबरदस्त सुरक्षा
मर्डर मिस्ट्री के नाम पर चर्चित रही आरूषि.हेमराज हत्याकांड की आज फैसले को देखते हुए हाईकोर्ट के चारों तरफ भरपुर सुरक्षा का इंतजाम रहा। पैरामिलिट्री फोर्स के साथ.साथ प्रांतीय पुलिस के जवान कोर्ट के अंदर और बाहर मौजूद रहे। कोर्ट में तैनात सुरक्षा गार्डों ने वकीलों के अलावा बिना पास के किसी भी नागरिक को कोर्ट में घुसने नहीं दिया। 40 नंबर की अदालत जहां इस मर्डर मिस्ट्री का फैसला आना था वहां सुबह से ही वकीलों की काफी भीड़ रही। 40 नंबर अदालत खचाखच भरी थी जब दो 45 पर दोनों जजों ने आकर इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट में भीड़ का आलम यह था कि फैसला सुनाने के लिए जज के स्टेनो जिसके पास बंद लिफाफे में आदेश था अंदर नहीं घुस पा रहे थे। इस नाते सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें न्यायाधीशों के प्रवेश द्वार से प्रवेश कराया तब जाकर जजों ने आदेश को पढ़कर फैसले के आपरेटिव अंश को सुनाया और दंत चिकित्सकों की अपील मंजूर करते हुए उन्हें निर्दोष करार देते हुए उनकी तत्काल रिहायी का आदेश दिया।

 

फैसले के समय कोर्ट में रहे उनके चिकित्सकों के रिश्तेदार
सुबह से ही आरोपी डॉ. तलवार के रिश्तेदार और नजदीकी सगे संबंधी सिविल ड्रेस में कोर्ट के अंदर वादकारियों के लिए बनी बेंच पर बैठे रहे। उन्हें उम्मीद थी कि फैसला दो बजे सुनाया जायेगा। इस नाते वे लंच के पहले ही आकर बेंच पर बैठ गये थे। और फैसले का इंतजार कर रहे थे। कुछ समय के लिए उन्हें झटका लगा जब दो बजे जज के पेशकार ने भीड़ में घोषणा की कि फैसला दो बजे नहीं अब फैसला दो बजकर 45 मिनट पर सुनाया जायेगा। यह सुनकर कोर्ट में खड़ी वकीलों की भीड़ को कुछ समय के लिए मायूसी आयी। कुछ वकीलों का कहना था। कि लगता है कि अभी न्यायाधीश गण इसमें और विलम्ब करेंगें और फैसला चार बजे आयेगा। लेकिन जज ठीक दो बजकर 35 मिनट पर अदालत में आ गए और उन्होंने 2.45 बजे बजे के निर्धारित समय पर ही फैसले का आपरेटिव अंश सुनाया और कोर्ट से उठकर अपने चैम्बरों में चले गये।

 

रिहाई में लगेगा समय
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में जेल में बंद तलवार दम्पति राजेश और उनकी पत्नी नुपूर तलवार की रिहायी में अभी कुछ दिन का वक्त लग सकता है। हाईकोर्ट के आज के आदेश में तत्काल रिहायी का आदेश है। पर रिहायी की प्रक्रिया से गुजरते हुए कुछ दिन का वक्त लग सकता है। प्रक्रिया के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणिक प्रति जब उपलब्ध होगी तभी वह मुहर लगाकर निचली अदालत में जायेगी, जहां पर प्रक्रियाओं का पालन करते हुए रिहायी का आदेश डासना जेल के लिए जारी होगा। जेल अथारिटी भी अपनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही दंत चिकित्सकों से जेल से रिहा करेगी। मर्डर मिस्ट्री के नाम से विख्यात नोएडा के इस चर्चित आरूषि हेमराज हत्याकांड को लेकर न केवल आम जन मानस में उत्सुकता थी बल्कि वकालत के क्षेत्र से जुड़े विधि के जानकारों में भी इस निर्णय को लेकर आतुरता दिखी। वकील और विधि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग भी इस फैसले को लेकर उत्साहित थे कि आखिर इस मर्डर मिस्ट्री का पटाक्षेप अदालत किस प्रकार करेगी। इस फैसले को लेकर विधि के जानकारों का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए ताकि इस मामले में रहस्य का सही पर्दाफाश हो। क्रिमिनल साइट में वकालत कर रहे वकीलों का कहना है कि मकान के अंदर आरूषि हेमराज की हत्या होती है और अंदर से गेट बंद है तो अवश्य ही हत्या करने वाले हत्या के समय अंदर ही मौजूद रहे होंगे। ऐसे में विधि के जानकारों का कहना है कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में जाना चाहिए और इसके खिलाफ सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट में अपील करना चाहिए ताकि इस हत्याकांड के रहस्य का सही उद्घाटन हो सके।

by PRASOON PANDEY

 

 

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