नुक्कड़ नाटक से उतारा यौन हिंसा के खिलाफ गुस्सा

Ajay Chaturvedi

Publish: Apr, 17 2018 07:11:01 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India
नुक्कड़ नाटक से उतारा यौन हिंसा के खिलाफ गुस्सा

ज्वाइंट एक्शन ग्रुप से जुड़े बीएचयू के छात्रों की पहल। नागरिकों की मिली सराहना।

वाराणसी. देश भर में लगातार बढ़ रही यौन हिंसा की घटनाओं के दुःखी काशी के ज्वाइंट एक्शन कमेटी से जुड़े छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से अपनी भवनाओं को उजागर करते हुए विरोध दर्ज कराया। अस्सी घाट पर आयोजित इस नाटक के मंचन में छात्र-छात्राओं ने जीवंत अभिनय कर दर्शकों के दिलों को भी झकझोर कर रख दिया। इस सजीव मंचन में सरकार पर भी करारा कटाक्ष किया गया। साथ ही विकृत मानसिकता के आम लोगों सहित जनप्रतिनिधियों की खिंचाई भी जम कर की गई। साथ ही कलाकारों ने इससे निबटने के उपाय भी दर्शाए।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा आज देश की स्थितियां आधी आबादी के रहने लायक नही रह गई है। महिलाओं एवं बच्चियों के साथ बलात्कार, हत्या, आत्म हत्या, शोषण, यौन हिंसा की घटनाओं ने संवेदनशील लोगों को स्तब्ध कर दिया है। पॉक्सो जैसे मजबूत कानून के रहते हुए भी आज औरतो, लड़कियां, बच्चियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी के प्रति सत्ता और प्रशासन की भूमिका में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कठुआ, उन्नाव, बारपेटा, सूरत, सासाराम आदि की हाल की की घटनाओं ने मानवता को शर्मसार कर दिया है और इन घटनाओं पर हो रही राजनीति और आरोप प्रत्यारोप के साथ साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश और भी शर्मनाक एवं निंदनीय है।

पीएम को समर्पित रहा नाटक, ये की गईं मांग
नुक्कड़ नाटक प्रधानमत्री को समर्पित किया गया। साथ ही मांग की गई कि उन्नाव कठुआ सासाराम सूरत और ऐसी तमाम घटनाओं में दोषियों के विरुद्ध जांच ,मुकदमे की कार्रवाई और फैसला चार माह के अंदर सुनाया जाए।
- शासन सत्ता या प्रसाशन में बैठे लोगों और जन प्रतिनिधियों के विरुद्ध शिकायतों की जांच तीव्र गति से मजिस्ट्रेट स्तर की स्वतन्त्र जांच कमेटी द्वारा की जाय।
- बलात्कार, हत्या, यौन शोषण के आरोपितों को विधानसभा या संसद में पहुचने के रास्ते देने वाली राजनीतिक पार्टियों के विरुद्ध चुनाव आयोग कोर्ट कार्रवाई करे।
-बच्चो और महिलाओं से जुड़ी शिकायतों को देखने वाली ग्राम, वार्ड, थाने, स्कूलों-कॉलेजों और जिले से ले कर प्रदेश-देश तक की समितियों की सक्रिय भूमिका का मूल्यांकन किया जाए।
- शिकायत निवारण के लिए बने सभी पदों यथा विशाखा समिति महिला एवं बाल आयोग और कार्य स्थलों पर सामाजिक कार्यकर्ता, महिला पुलिस एवं ज्यूडिशियल अफसर जज की नियुक्ति अविलम्ब की जाए
- सभी पुलिसकर्मियों की हर स्तर पर जेंडर और बाल अधिकारों मानवाधिकारों सम्बन्धी प्रशिक्षण एवं परीक्षा अनिवार्य की जाए.
-कारपोरेट रिस्पांसिबिलिटी के फंड द्वारा अभियान चला कर जनजागृति के संगठित प्रयास किये जाने को अनिवार्य किया जाए
- नई शिक्षा नीति में सभी बच्चो की प्राथमिक शिक्षा के पाठ्य क्रम में जेंडर सम्बन्धी समझदारी लाने वाले पाठ शामिल किए जाएं
- यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी, नेता या व्यक्ति स्वयं अपने विरुद्ध चल रहे मुकदमो शिकायतों को पद और सत्ता का लाभ ले कर स्वयं समाप्त करने का दोषी हो उसे पद से मुक्त किया जाए।

यौन हिंसा के खिलाफ नुक्कड़ नाटक
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