scriptAppeal to PM Modi to withdraw 11 percent increase in prices of life saving drugs | जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में PM MODI के संसीदय क्षेत्र वाराणसी से उठी आवाज, मू्ल्य वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग | Patrika News

जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में PM MODI के संसीदय क्षेत्र वाराणसी से उठी आवाज, मू्ल्य वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग

यूं तो भोजन से लेकर सफर तक का खर्च बेहिसाब बढ़ गया है। लगभग हर चीज की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ये सिलिला निरंतर जारी है। इसी कड़ी में जीवन ररक्षक दवाओं की कीमतों में भी 11 फीसद तक की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। यानी कमजोर और मध्यमवर्गीय तबका बीमारी का समुचित इलाज भी नहीं कर सकता। इसका विरोध शुरू हुआ है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM MODI) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में।

वाराणसी

Published: April 01, 2022 04:31:25 pm

वाराणसी. जीवन रक्षक दवाओं की कीमत में 11 फीसद की बढ़ोत्तरी ने इलाज भी महंगा कर दिया है। खाने की थाली से तो वैसे ही इम्युनिटी बूस्टर गायब हैं। अब निहायत जरूरी दवाएं भी आमजन की पहुंच से दूर हो रही हैं। ऐसे में आम आदमी अपना इलाज कैसे करे। इसी सोच के साथ शुक्रवार को तपती दोपहरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM MODI) के संसदीय क्षेत्र काशी के लोगों ने जरूरी दवाओं की कीमत में हुई वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में मार्च
जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में मार्च
जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में कचहरी में प्रदर्शनआर्थिक मंदी के दौर में आवश्यक दवाओं की मूल्य वृद्धि अमानवीय

अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि विगत दिनों राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमणों एवं हृदय, किडनी, अस्थमा, टीबी , संक्रमण, त्वचा, एनीमिया, डायबिटीज, रक्त चाप, एलर्जी, विषरोधी, खून पतला करने की दवा, कुष्ठ रोग, माइग्रेन, पार्किंसन, डिमेंशिया, साइकोथेरैपी, हार्मोन, उदर रोग आदि से संबंदित लगभग 800 आवश्यक दवाओं के मूल्य को नए वित्तीय वर्ष में लगभग 11 प्रतिशत बढाने की संस्तुति की है। इसके बाद आज यानी पहली अप्रैल से दवाओं के दाम बढ़ गए। इस भारी वृद्धि से देश के आम आदमी पर बड़ा बोझ पड़ेगा. विगत दो तीन वर्षों से व्याप्त कोरोना संक्रमण के संकट, बेतहाशा बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी के दौर में आवश्यक दवाओं के मूल्य में वृद्धि किया जाना अमानवीय और अव्यावहारिक है। इससे आम जनता बुरी तरह प्रभावित होगी। डीजल, पेट्रोल, गैस आदि के मूल्य वृद्धि का असर लगभग सभी वस्तुओं पर पड़ रहा ऐसे में दवाओं के मूल्य में बढ़ोत्तरी होना काफी कष्टकारक होगी। वरिष्ठ नागरिको पर भी इस वृद्धि से काफी प्रभाव पड़ेगा।
जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य में हुई 11 प्रतिशत वृद्धि के विरोध में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शनआम उपयोग में आने वाली दवाओं के दाम में हुई है वृद्धि जिसका प्रभाव सब पर पड़ेगा

वक्ताओं ने कहा कि जिन दवाओं के दाम में इजाफा होने वाला है उनमें सबसे आम उपयोग में लाई जाने वाली पैरासिटामॉल के अलावा एजिथ्रोमाइसिन, मेट्रोनिडाजोल, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड, फेनोबार्बिटोने जैसी दवाएं शामिल हैं। साथ ही कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जानें वाली दवाओं के अलावा कई विटामिन, खून बढ़ाने वाली दवाएं, मिनरल, एंजाइम आदि को भी इस परिधि में रखा गया है। इस प्रकार देश में प्रयोग होने वाली कुल दवाओं के लगभग 16 फीसदी पर इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ेगा, जो आम आदमी को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
पूर्व के वर्षों में इन दवाओं के मूल्य में वार्षिक वृद्धि की दर एक से दो प्रतिशत ही हुआ करती थी

वक्ताओं ने बताया कि पूर्व के वर्षों में इन दवाओं के मूल्य में वार्षिक वृद्धि की दर एक से दो प्रतिशत ही हुआ करती थी। उदाहरण के लिए वर्ष 2019 में ने दवाओं की कीमतों में दो प्रतिशत, 2020 में मात्र 0.5 प्रतिशत की ही वृद्धि की गई थी लेकिन इस बार एक साथ 11 प्रतिशत दाम बढाना घोर निंदनीय है।
देश में स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाने की मांग

स्वास्थ्य का अधिकार का कानून बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता सुलभ और बेहतर बनाने, स्वास्थ्य का बजट बढाने, हर गांव में एंबुलेंस सेवा आदि की विभिन्न मांगों के पोस्टर के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे इन सामाजिक कार्यकर्ताओं का ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने स्वीकार किया और उसे प्रधान मंत्री को प्रेषित करने का आश्वासन दिया। ज्ञापन में दवाओं की मूल्य वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग के साथ ही देश में स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाने के लिए आवश्यक पहल उठाने की भी अपील की गई।
स्वास्थ्य का अधिकार अभियान के कार्यकर्ताओं ने भेजा प्रधानमंत्री को ज्ञापन

प्रदर्शनकारी सामाजिक कार्यकर्ताओं (स्वास्थ्य का अधिकार अभियान के कार्यकर्ता) ने प्रधानमंत्री और अपने सासंद से देश में स्वास्थ्य का अधिकार कानून बनाने और सभी के लिए समान, सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की गुहार लगाई। इसकी खातिर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को सौंपा।
विरोध प्रदर्शन में ये रहे शामिल

विरोध प्रदर्शन करने वालों में महेश कुमार, वल्लभाचार्य पांडेय, नंदलाल मास्टर, फादर आनंद, रामजनम, सूरज पांडेय , दीपक पुजारी, नीलम पटेल, मिथलेश दूबे, विनय कुमार सिंह, धनंजय त्रिपाठी, दीन दयाल सिंह, इंदु पाण्डेय, विशाल त्रिवेदी, मैत्री, नीति, अशोक सिंह, ममता यादव आदि प्रमुख रहे।

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