महागठबंधन खेल सकता इस मुख्यमंत्री पर दाव, फंस जायेगी पीएम मोदी की संसदीय सीट

लोसभा चुनाव 2019 में पीएम मोदी को घेरने की योजना, आसान नहीं होगा भगवा दल का पार पाना

By: Devesh Singh

Published: 04 Jun 2018, 12:27 PM IST

वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी की लहर व अमित शाह की रणनीति के चलते ही बीजेपी को इतने राज्यों में चुनावी जीत मिली है। लोकसभा चुनाव 2019 में फिर से बीजेपी को सत्ता में वापसी करनी है तो पीएम मोदी को अपना जादू दिखाना होगा। बीजेपी को हराने के लिए महागठबंधन की नीव तैयार हो गयी है। महागठबंधन ने पीएम मोदी को उनके संसदीय क्षेत्र बनारस में हराने के लिए इस मुख्यमंत्री को प्रत्याशी बनाने की तैयारी की है यदि महागठबंधन का दांव सही बैठ जाता है तो बनारस सीट फंस जायेगी।
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बीजेपी को चुनाव हराने के लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव , मायावती , अजीत सिंह के साथ अरविंद केजरीवाल भी आ आने वाले हैं। आप ने पहले ही ऐलान किया है कि देश को बचाने के लिए और बीजेपी को हराने के लिए वह महागठबंधन का समर्थन करेंगे। ऐसे में सियासी जगत में इस बात की चर्चा तेज हो गयी है कि क्या फिर से पीएम मोदी के खिलाफ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ेंगे। बनारस से महागठबंधन किसी बड़े नाम को प्रत्याशी बनाना चाहता है जो पीएम मोदी को सीधी चुनौती दे सके। ऐसे में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ऐसे प्रत्याशी हो सकते हैं जो पीएम मोदी को चुनौती देने में सक्षम है। संसदीय चुनाव 2014 में अरविंद केजरीवाल ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ ही चुनाव लड़ा था और द्वितीय स्थान पर रहे थे। ऐसे में इस बार दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को महागठबंधन का साथ मिल जाता है तो पीएम मोदी की राह कठिन हो जायेगी। आप के पूर्वांचल संयोजक संजीव सिंह का कहना है कि देश हित को ध्यान में रखते हुए ही पार्टी ने महागठबंधन का समर्थन किया है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पहले ही ऐलान किया है कि वह पांच साल तक दिल्ली की जनता की सेवा करेंगे। ऐसे में अरविंद केजरीवाल के संसदीय चुनाव लडऩे की संभावना नहीं दिखती है।
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PM Narendra Modi and Arvind kejriwal
IMAGE CREDIT: Patrika

2014 के वोटों को देखे तो आसान नहीं होगी पीएम मोदी की जीत
संसदीय चुनाव 2014 में नरेन्द्र मोदी की लहर में बीजेपी ने यूपी की 73 सीट जीत थी लेकिन उसके बाद 2018 में तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। सीएम योगी आदित्यनाथ , डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या तक अपनी सीट नहीं बचा पाये हैं और कैराना भी बीजेपी के हाथ से निकल चुका है इसलिए कहा जा सकता है कि अब पहले जैसी लहर नहीं है ऐसे में बनारस में 2014में मिले वोटों को देखे तो थोड़ा फेरबदल सभी समीकरणों को ध्वस्त कर सकता है।
नरेन्द्र मोदी-5,81,022
अरविंद केजरीवाल-2,09,238
कांग्रेस के अजय राय-75,614
बसपा के विजय प्रकाश जायसवाल-60,579
सपा के कैलाश चौरसिया-45,291
पीएम मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिला था और वह 3,71,784 वोट से चुनाव जीते थे। उस चुनाव में महागठबंधन के वोटों को जोड़ दिया जाये तो भी पीएम मोदी के बराबर वोट नहीं होंगे। लेकिन अब स्थिति बदल गयी है इसलिए महागठबंधन के वोटों का थोड़ा प्रतिशत भी बड़ा तो कहानी बदल जायेगी।
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पीएम मोदी के दो सीट से चुनाव लडऩे की लग रही अटकले
पीएम नरेन्द्र मोदी के बनारस के साथ एक अन्य सीट पर चुनाव लडऩे की अटकले लग रही है। बीजेपी जानती है कि पीएम मोदी के खिलाफ महागठबंधन दमदार प्रत्याशी उतारेगी। ऐसे में बीजेपी किसी तरह का रिस्क नहीं लेगी और पीएम मोदी को दो जगह से चुनाव लड़ाया जा सकता है। बीजेपी नेताओं ने पीएम मोदी के दो जगहों से चुनाव लडऩे की बात को खारिज तो किया है लेकिन राजनीति में समय के हिसाब से किसी भी दल की रणनीति भी बदल जाती है।
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