KRISHNA JANMASTAMI:  52 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग, रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेंगे कन्हैया

 KRISHNA JANMASTAMI:  52 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग, रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेंगे कन्हैया
Shree Krishna

रोहिणी नक्षत्र मे इस साल कान्हा का जन्मदिवस बहुत ही ज्यादा खास है

वाराणसी. भगवान श्रीकृष्ण के 5243 वें जन्मोत्सव पर 52 साल बाद ऐसा संयोग आया है। जब एक बार उसी नक्षत्र में कृष्ण का जन्म होगा। जन्माष्टमी के दिन अष्टमी उदया तिथि और मध्य रात्रि जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का संयोग है जो बहुत शुभ माना जा रहा है।



वैसे तो श्रावण मास से हिंदु धर्म का व्रत-त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसी क्रम में भादो मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर 25 अगस्त को कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रहेगी। रोहिणी नक्षत्र मे इस साल कान्हा का जन्मदिवस बहुत ही ज्यादा खास हो गया है। इस दिन कन्हैया को धनिया का चूरन और खीरा प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है। इस बार इसके साथ कान्हा का पसंदीदा माखन चढ़ाने पर मनोकामनाएं पूर्ण होगी। 

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ऐसा योग 52 साल पहले 1958 में बना था। 52 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है। पंडितों के मुताबिक, कृतिका नक्षत्र का काल क्रम नौ घंटे 32 मिनट का होता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात्रि रोहिणी नक्षत्र के आरंभ काल के संयोग में हुआ। रोहिणी नक्षत्र की स्थिति में मामूली अंतर भर आया है।




ब्राह्मण वर्ग का मानना है कि इस बार जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है। जन्माष्टमी के दिन 25 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि की शुरूआत हो रही है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त की रात 8.13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी। पंडितों ने बताया कि 24 अगस्त बुधवार की रात 10.13 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस वजह से तिथि काल मानने वाले बुधवार को भी जन्मोत्सव मनाएंगे, लेकिन गुरुवार उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।

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इस वक्त उपवास रखने वाले पूजा करके प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं, जबकि पारण का समय 26 तारीख को सुबह 10 बजकर 52 मिनट है लेकिन जो लोग पारण को नहीं मानते वो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद और पूजा करने के बाद यानी कि रात 12ः45 बजे के बाद अपना व्रत तोड़ सकते हैं।
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