दबंग मुख्तार के गढ़ में बाहुबली बृजेश की धमक

दबंग मुख्तार के गढ़ में बाहुबली बृजेश की धमक
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कृष्णानंद के सियासी वारिस आनंद के लिए अंसारी बंधुओं को घेरने गाजीपुर पहुंचे बीजेपी नेता

वाराणसी. दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में जेल की चहारदीवारी के पीछे कैद दबंग विधायक मुख्तार अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। यूपी की राजनीति में मुख्य धारा में आने की कोशिश में लगे अंसारी बंधुओं की घेरेबंदी तेज हो गई है। सपा के किनारे कसने के बाद अंसारी बंधु पहले से ही परेशान चल रहे थे, दूसरी तरफ एआईएमआईएम की यूपी में तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने भी कौमी एकता दल को संकट में ला दिया है। इन सबसे बड़ी मुश्किल अब अंसारी बंधुओं के सामने जो खड़ी हुई है उससे उनके राजनीतिक महात्वाकांक्षा पर संकट के बादल छा गए हैं। 

मुख्तार अंसारी के विरोधी अब एकजुट होकर गाजीपुर में अपनी पैठ बना रहे हैं। कृष्णानंद राय के भतीजे व सियासी वारिस आनंद राय मुन्ना के चुनाव प्रचार अभियान और मनोज सिन्हा की गाजीपुर में चल रही रेल ने पहले ही अंसारी बंधुओं की नींद उड़ा रखी थी, अब धुर विरोधी व एमएलसी बृजेश सिंह के समर्थकों ने भी गाजीपुर में कदम रख दिया है। बृजेश सिंह भी भले ही मुख्तार की तरह जेल में हैं लेकिन उनका सियासी कुनबा इस समय तेजी से बढ़ा है जो विरोधियों के लिए चिंता का सबब बना है। बृजेश सिंह के विधायक भतीजे सुशील सिंह व उनके समर्थकों की गाजीपुर में राजनीतिक मौजूदगी ने मुख्तार अंसारी खेमे में हलचल बढ़ा दी है। 


दरअसल बीजेपी ने अंसारी बंधुओं को घेरने के लिए सधी चाल चली है। दिवंगत कृष्णानंद राय के भतीजे आंनद राय को उम्मीदवार के रूप में आर्शीवाद दे दिया। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा पहले से ही विकास की रेल गाजीपुर में दौड़ा रहे हैं। तिरंगा यात्रा के समापन के अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी ओम माथुर समेत पूर्वांचल के तमाम दिग्गज भाजपाई आनंद राय के बुलावे पर रविवार को वाराणसी के बाद सीधे गाजीपुर पहुंच गए। वहां वीर अब्दुल हमीद के गांव हमीरपुर में आयोजित कार्यक्रम में शरीक हुए। 

भाजपा के शीर्ष नेताओं के काफिले में 0001 नंबर की गाडिय़ों का एक काफिला ऐसा भी था जिसे देखते ही गाजीपुर में चर्चाओं का बाजार गरम हो गया। यह काफिला था बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह के विधायक भतीजे सुशील सिंह का। सुशील सिंह की गाजीपुर में मौजूदगी की खबर जब अंसारी बंधुओं के खेमे तक पहुंची तो बेचैनी बढ़ गई। आंनद राय और सुशील सिंह तिरंगा यात्रा के समापन पर आयोजित कार्यक्रम में साथ-साथ रहे। 

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के बाद हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी अलका राय चुनाव मैदान में उतरी थीं और बाजी उनके हाथ भी आई लेकिन इसे वह दोहरा नहीं पाई। 2007 में हुए आम चुनाव में उन्हें शिकस्त मिली। इस शिकस्त के बाद अंसारी बंधुओं ने एक बार फिर गाजीपुर से लेकर मऊ, बलिया तक अपनी पैठ बनाई।

मुख्तार अंसारी व उनके भाइयों का साम्राज्य बढ़ता रहा लेकिन इस बीच मोदी लहर ने उनकी नाव पलट दी। पहले मनोज सिन्हा सांसद के रूप में चुने गए और उन्हें मोदी सरकार ने रेल राज्य मंत्री के पद से नवाजा। मनोज सिन्हा ने गाजीपुर समेत पूर्वांचल में रेल की व्यवस्था को ऐसा दुरूस्त किया कि गाजीपुर से लेकर आसपास की सीटों पर भी इसका खासा प्रभाव दिखने लगा है। इसी प्रभाव के बीच मनोज सिन्हा ने अपने अभिन्न मित्र दिवंगत कृष्णानंद राय के भतीजे को उनके सियासी वारिस के रूप में प्रोजेक्ट कर दिया। आंनद राय के चुनावी जंग में कूदते ही कृष्णानंद राय के समर्थक जो खामोशी की चादर ओढ़कर सही समय का इंतजार कर रहे थे, नई ताकत व जोश के साथ खुले मैदान में आ गए । 

 

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