प्रियंका इफेक्ट- बनारस के किसानों ने लिखा खून से खत, कहा, अब जान देने से भी नहीं हिचकेंगे

Ajay Chaturvedi

Publish: Feb, 10 2019 05:38:53 PM (IST)

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. प्रियंका गांधी के राजनीति में आने के बाद कांग्रेसी काफी उत्तेजित हो ही चुके हैं। अब तो प्रियंका की धमक यहां तक पहुंच चुकी है कि किसानों ने भी आक्रमक तेवर अख्तियार कर लिया है। खास तौर पर बनारस के किसान खासे गुस्से में हैं। उन्होंने रविवार को बैरवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित खत अपने खून से लिखा। साथ ही चेतावनी दी कि अब वो जिला मुख्यालय की ओर कूच करेंगे और या तो भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अपना हक हासिल करके लौटेंगे या वहीं अपनी जान दे देंगे। रविवार को 200 पुरुष एवं 165 महिला किसानों ने अपना खून निकाल कर प्रधानमंत्री को खून की पाती लिखी, जिसमें बयां करते हुए लिखा कि हमें वैधानिक अधिकार अपनी जमीन पर चाहिए।

बता दें कि बनारस के किसान साल भर से आंदोलित हैं। वो अपने हक के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले। वो अपने अधिकार के लिए किसान कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले से मिले। अब उन्हें उम्मीद है कि प्रियंका गांधी उनका साथ देंगी। उनका हक दिला कर रहेंगी। ऐसे में जैसे ही प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया वो उत्साहित हो उठे। जैसे ही उन्हें ये पता चला कि प्रियंका सोमवार को लखनऊ आ रही हैं, उसके बाद वह पूर्वांचल का भी रुखसत करेंगी तो वे रविवार को बैरवन में जुटे। उन्होंने प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद के नाम अपने खून से खत लिखा।

किसानों का कहना है कि वैधानिक रूप से अपनी ही जमीन से बेदखल होने के कारण से सरकारी योजनाओं से वंचित हो चुके हैं। सामाजिक तिरस्कार झेल रहे हैं। ऐसे में अब निर्णायक लड़ाई लड़ने को विवश हैं। ये हैं मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर योजना से प्रभावित किसान। बता दें कि ट्रांसपोर्ट नगर योजना दो दशक पहले आई लेकिन अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। मूर्त रूप लेना तो दूर उस परियोजना पर अब तक काम ही नहीं शुरू हुआ। ऐसे में प्रभावित किसान भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अपनी जमीन वापस करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वैधानिक रूप से हमें हमारी जमीन वापस चाहिए, हमें बजट के अनुसार 17 रुपये प्रति महीना नहीं चाहिए। हमें किसी सरकारी खैरात की जरूरत नहीं है।

ऐेसे में वो पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बैरवन, कन्नाडाडी, सरायमोहन एवं मिल्की चक के किसान बैरवन बगीचे में इकट्ठा हुए और अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पाती लिखी। किसानों ने खून की पाती में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह मांग की कि हमें भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के खण्ड 24 की धारा 5(1) के तहत ट्रांसपोर्ट नगर योजना रद्द करके मोहनसराय ट्रांसपोर्ट नगर से प्रभावित 1194 किसानों की जमीन वैधानिक रुप से वापस किया जाय।

अभियान का नेतृत्व करते हुए किसान कांग्रेस के नेता विनय शंकर राय "मुन्ना" ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के किसान लगातार अपने वैधानिक अधिकार के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं। आजिज़ आकर वसंत पंचमी के पावन पर्व के दिन खून से खत लिख रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की कुम्भकरणी नींद नहीं टूट रही है। नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में किसानों को वैधानिक अधिकार देने से भाजपा सरकार जिस तरह से नजरअंदाज कर रही है उससे सिद्ध हो रहा है कि भाजपा और नरेंद्र मोदी की नीति एवं नियत किसान विरोधी है। आज खून के खत के माध्यम से हम लोग अपने सांसद और देश के प्रधानमंत्री से यह मांग करते हैं कि किसानों के दर्द को गंभीरता से लीजिए और पूरे देश पर मन की बात थोपना छोड़ पहले अपने संसदीय क्षेत्र के अन्नदाता किसानों के मन की बात सुनते हुए उनकी जमीन जिसको लगभग बीस वर्षों से गैरकानूनी तरीके से नाम काटकर वैधानिक रूप से बेदखल कर दिया गया है को कानून का पालन कराते हुए वापस कराएं।

उन्होंने कहा कि जिस बहुफसली जमीन पर उक्त योजना से प्रभावित किसान आज भी खेती कर अपनी जीविका चलाते हैं, उसे वैधानिका रूप से राजस्व अभिलेखों में पुनः नाम दर्ज करा कर जमीन किसानों को वैधानिक रूप से वापस कराएं, अन्यथा किसान अब "करो मरो के नारे के साथ" अंतिम लड़ाई के लिए घरों का ताला बंद करके बनारस जिला मुख्यालय पर अनिश्चित काल के लिए सर पर कफन बांधकर सर पर कफन बांधकर अपना चूल्हा-चौकी,खटिया-मचिया, जच्चा-बच्चा, गाय, भैंस, बकरी इत्यादि पालतू जानवरों के साथ सड़क पर उतरकर धरने पर बैठने का कार्य इस संकल्प के साथ करेगा कि या तो प्राण त्याग देगें या वापस तभी आएंगे या जब जमीन वैधानिक रूप से वापस हो जायेगी तब।

इस मौके पर प्रमुख रूप से 80 वर्ष के बुजुर्ग बद्री यादव, बिटना देवी, दिनेश तिवारी, डाक्टर सुरेन्द्र, सुन्नर पटेल, बलिराम पटेल, शिवशंकर, छेदी पटेल, हुब्बी देवी, विजय पटेल, शिव कुमार गुप्ता, हरिशंकर पटेल, प्रदीप यादव, धनीराम पटेल के साथ भाई लाल, संजय ,छोटयी, बिरजू, फूल पत्ती, शीतला देवी ,बेला देवी, सावित्री देवी, मंजू , दुलारी, फूलचन्द गुप्ता, मुन्ना यादव, श्याम नारायण, लल्लू प्रसाद, खंझाटी, जय,मूरत पटेल, सीया राम पटेल सहित सैकड़ों किसानों ने खून से पाती लिखी। संचालन मेवा पटेल ने किया और प्रेम शाह ने आभार जताया।

 

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