यूपी के चुनावी संग्राम में 'हाथी' छोड़ेगा माया का साथ!

यूपी के चुनावी संग्राम में 'हाथी' छोड़ेगा माया का साथ!
bsp leader mayawati

बगावत झेल रही मायावती को हाइकोर्ट ने दिया झटका, चुनाव आयोग अब करेगा बसपा के चुनाव चिह्न हाथी पर फैसला

वाराणसी.
उत्तर प्रदेश की चुनावी तपिश में जिस तेजी से बसपा का ग्राफ बढ़ रहा रहा था, अब सेंसेक्स की तरह उतनी ही तेजी से ग्राफ गिरने लगा है। पार्टी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। तोड़फोड़ की राजनीती में पार्टी के भीतर बगावत झेल रही बसपा सुप्रीमो मायावती से उनका प्रिय साथी गजराज भी छिन सकता है। पार्टी के सिम्बल हाथी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाइकोर्ट ने मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया है। हाइकोर्ट की टिप्पणी देखकर राजनितिक दलों को लग रहा है कि इस बार उत्तर प्रदेश के चुनावी संग्राम में हाथी माया का साथ छोड़ सकता है। ऐसा हुआ तो मायावती के लिए यह सबसे तगड़ा झटका होगा।

बहुजन समाज पार्टी का हाल इन दिनों बहुत बुरा है। पार्टी चौतरफा बगावत झेल रही है, अब शायद पार्टी से उसका चुनाव चिन्ह भी वापस लिया जा सकता है। बसपा  के अन्दर चौतरफा बगावत का माहौल पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए मुसीबत बना है।
अब इस बार पार्टी के चुनाव चिन्ह ने ही पार्टी की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने उस याचिका को वापस चुनाव आयोग को भेज दिया जिसमें पूर्ववर्ती मायावती सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में हाथी की प्रतिमाएं लगाने के लिए सार्वजनिक कोषों के कथित दुरूपयोग को लेकर पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘हाथी’ रद्द किए जाने की मांग की गयी है.न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला ने कहा,' मैं मामले को वापस भारत के चुनाव आयोग को भेज रहा हूं' अदालत ने एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर यह आदेश दिया जिसने कहा था कि सार्वजनिक स्थलों पर हाथी की प्रतिमा लगाये जाने से चुनावी संघर्ष में दूसरे पक्ष को बराबरी का मौका नहीं मिलता। दिल्ली हाई कोर्ट ने साथ ही चुनाव आयोग को ये सुनिश्चित करने को कहा है कि, जनता के पैसे बरबाद करने वाली पार्टियों पर कैसे रोक लगायी जाये।

क्या कहा था याचिका में :

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की गयी याचिका में कहा गया है कि, बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी है। बसपा प्रमुख ने जनता के पैसों से स्मारकों और पार्कों में पत्थर के हाथी लगवाए हैं
जिसे याचिका में जनता के पैसे की बर्बादी करने वाला बताया गया है। याचिका के सन्दर्भ में दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि, ऐसी पार्टियों के चुनाव चिन्ह तत्काल रद्द किये जाएँ।
इसके साथ ही चुनाव चिन्ह सम्बंधित गाइडलाइन जारी करने के साथ ही बसपा को नोटिस जारी करने का भी आग्रह किया गया है।

हाथी छूटा तो बिखर जायेगा दलित वोट
बसपा को भय सता रहा है कि यदि चुनाव से पहले पार्टी के सिम्बल को लेकर उनके पक्ष में फैसला नहीं आया तो सत्ता का ख्वाब चकनाचूर हो जायेगा। पार्टी का दलित वोटबैंक अधिक पढ़ालिखा नहीं है। अधिकतर वोटरों को बस नीला झंडा और हाथी ही पता है। उनके लिए हाथी मतलब उनकी पार्टी। ऐसे में यदि पार्टी का चुनाव चिह्न बदल गया तो वोटबैंक बिकार जायेगा।

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned