मंत्री की सिफारिश पर लग्जरा कंपनी को मिला है सीवर सफाई का जिम्मा, बद से बदतर हो गई स्थिति

Ajay Chaturvedi

Publish: Aug, 12 2018 05:34:33 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. शहर बनारस की दशा दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। सूबे का इस सबसे स्वच्छ शहर का हाल यह कि पहले से तीन गुना ज्यादा खर्च के बाद इसकी हालत बद से बदतर हो चली है। हर गली, हर मोहल्ला नाला-नाली के पानी से बजबजा रहा है। नालियां ऊपर तक भरी हैं। नतीजतन मैनहोल ओवरफ्लो कर रहे हैं। कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां महीनों से वाटर लॉगिंग है पर उसका निराकरण नहीं हो रहा। ऐसा भी नहीं कि नगर निगम और जलकल के अफसरों को इसकी जानकारी नहीं लेकिन वो खामोश हैं। वजह है सरकार की नजदीकियां।

गुणगांव की कंपनी लग्जरा के साथ 40 लाख रुपये में हुआ है सीवर सफाई का अनुबंध
शहर की सीवर समस्या को दुरुस्त करने के लिए पहले नगर निगम या जलकल विभाग 14 लाख रुपये महीना खर्च करता था। समस्या विकराल हुई तो इसे गुड़गांव की कंपनी लग्जरा से अनुबंध कर लिया गया वह भी प्रतिमाह 40 लाख रुपये में। यह अनुबंध मई 2018 में गुपचुप तरीके से ऑनलाइन टेंडरिंग से हुआ है, वह भी बनारस से नहीं बल्कि सीधे राजधानी लखनऊ से। अब नगर निगम ने सीवर सफाई का बजट भी बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि जिस कंपनी से अनुबंध हुआ है वह प्रदेश के एक मंत्री के करीबी की कंपनी है। लेकिन मंत्री के करीबी की कंपनी के लिए पैसा तो तीन गुना बढ़ा दिया गया नतीजा सफाई होने की बजाय शिकायतें भी उसी अनुपात में बढ़ गईं।

लखनऊ में हुआ था ई टेंडर
बताया जा रहा है कि यह ई- टेंडर लखनऊ में हुआ था। सिर्फ तीन कंपनियों ने ही टेंडर डाला था। निगम प्रशासन के मुताबिक गुड़गांव की कंपनी का टेंडर सबसे किफायती था लिहाजा उसके काम सौंप दिया गया। वैसे चर्चा यह भी है कि कंपनी को ठेका दिलवाने में राज्य मंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। निगम सूत्रों के मुताबिक तय हुआ था कि कंपनी आउट सोर्सिंग पर प्रति वार्ड तीन सफाई कर्मचारी और दो वार्ड पर एक सुपरवाइजर रखेगी। सफाई कर्मचारी को प्रतिदिन के हिसाब से 265 रुपेय और सुपरवाइजर को 325 रुपये दिए जाने थे। लेकिन इतनी कम दिहाड़ी पर कोई काम करने को तैयार ही नहीं हो रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कर्मचारियों को वक्त से दिहाड़ी भी नहीं मिलती।

नगर आयुक्त तीन नोटिस जारी कर चुके हैं
शहर की सीवर समस्या की शिकायतें सुन-सुन कर परेशान नगर आयुक्त डॉ नितिन बंसल तीन नोटिस जारी कर चुके हैं कार्यदायी संस्था को। अब उन्होंने 31 अगस्त तक की मोहलत दी है। इस अवधि में सुधार न होने की सूरत में अनुबंध समाप्त हो सकता है। साथ ही जमानत राशि भी जब्त कर ली जाएगी।

जलकल विभाग भी रख रहा निगरानी
नगर आयुक्त के निर्देश पर जलकल विभाग भी कार्यदायी संस्था के कामों पर निगरानी रख रहा है। रोजाना की रिपोर्ट नगर आयुक्त को भेजी जा रही है। व

ये हैं सीवर सफाई की हकीकत
50 प्रतिशत से ज्यादा मोहल्ले प्रभावित
40 लाख रुपये सीवर सफाई के मद में हो रहा भुगतान
14 लाख रुपये पहले दिया जाता रहा है
270 सफाई कर्मचारी देने थे नई कंपनी को
25 सुपरवाइजर्स को लगाना था निगरानी को
60 लाख रुपये कंपनी ने जमा की है जमानत राशि
03 बार दिया जा चुका है नोटिस
03 बार के बाद खत्म हो सकता है ठेका
150 शिकायतें रोज आ रही हैं सीवर समस्या की शिकायतें
3400 से अधिक शिकायतें केवल जुलाई में

आधा शहर बजबजा रहा
इस पूरी दुर्व्यवस्था पर नगर निगम कार्यकारिणी समिति के सदस्य और काजी सादुल्लापुरा वार्ड के पार्षद रमजान अली ने पत्रिका को बताया कि जैतपुरा वार्ड मे "जलकल वाराणसी" ने "सीवर सफाई" का काम रोक दिया है। जनता के हित में संघर्ष जारी है। वैसे जैतपुरा ही नहीं बल्कि आधा शहर सीवर समस्या से जूझ रहा है। हर नाला नाली उफना रहे हैं। सीवर लाइन साफ न होने के चलते चोक हो चुकी है। मसलन जैतपुरा, आदमपुरा, रेवड़ीतालाब, लल्लापुरा, हबीबपुरा, लक्सा, जद्दूमंडी, औरंगाबाद, भेलूपुर, सिगरा, सुंदरपुर, सुदामापुर, सरायनंदन, बजरडीहा की ऐसी दुर्दशा पहले नहीं रही। ऐसे में इस समस्या से निजात मिलने की फिलहाल कोई राह नजर नहीं आ रही।

शाही नाला की सफाई भी बंद है
उधर शाही नाले की सफाई का काम पहले से बंद चल रहा है जिसके चलते सारी व्यवस्था ध्वस्त है। अब तो शाही नाले की सफाई करने वाली राष्ट्रीय कंपनी के खिलाफ मुख्यमंत्री स्वयं एफआईआर दर्ज कराने की हिदायद दे चुके हैं। माने वह काम इस साल भी पूरा नहीं होने वाला।

 

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