Big Breaking-BHU के 5 संविदा कर्मियों ने मांगी इच्छा मृत्यु

राष्ट्रपति को भेजा,, मार्मिक पत्र 74 दिन से हैं धरना और अनशन पर, नौकरी की बहाली के लिए.

वाराणसी. ये है बीएचयू प्रशासन की हठधर्मिता जिसके चलते विश्वविद्यालय के पांच संविदा कर्मियों को राष्ट्रपति से मांगनी पड़ रही है इच्छा मृत्यु की इजाजत। इसमें से 45 ने नेत्र दान और अन्य सभी ने मृत्योपरांत देह दान का भी लिया है संकल्प। ये सभी 24 से 30 साल से बीएचयू की में अपनी सेवा दे रहे हैं। लेकिन इस बार कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें से ज्यादातर सेवानिवृत्ति की ओर हैं।

ये हैं जिन्होंने इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी
राष्ट्रपति को पत्र भेज कर इच्छा मृत्यु की मांग करने वालों में कृष्ण कांत मिश्र, उमा शंकर, छोटेलाल, नवीन और वीरेंद्र हैं। ये सभी 24 से 30 साल से बीएचयू की सेवा कर रहे हैं।

74 दिन से हैं धरना पर, कुछ तो 17 दिन से अनशन पर
ये वो संविदा कर्मचारी हैं जिनकी सेवा को नियमित करने के लिए राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष स्व. प्रो. हरिहर नाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली कमेटी अपनी संस्तुति दे चुकी है। विश्वविद्यालय कार्य परिषद प्रो. त्रिपाठी की संस्तुति पर मुहर लगा चुकी है। बावजूद इसके इन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया। अब उन्हें सेवा से बाहर करने का फरमान सुना दिया गया। ये कर्मचारी पिछले 75 दिनों से अनशन पर हैं। इसमें से 12 कर्मचारी पिछले 17 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। पर विश्वविद्यालय का कोई अधिकारी इनकी तरफ झांकने तक नहीं आया।  ऐसे में इन्होंने विश्वविद्यालय के विजिटर और राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है।

इनकी ये है पीड़ा
धरना और अनशनरत संविदा कर्मचारियों की पीड़ा यह है कि इसमें से कई तो सेवानिवृत्ति की  ओर हैं। बेटियों के हाथ पीले करने का वक्त है। घर गृहस्थी भी संभालनी हौ। अपनी या परिवार में किसी के बीमार होने की सूरत में इलाज की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर है। लेकिन इससे बीएचयू प्रशासन को कोई सरोकार नहीं।

राष्ट्रपति को भेजा गया पत्र
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में इन कर्मचारियों ने लिखा है, हम बीएचयू में तीन दशक से दैनिक वेतनभोगी के तौर पर कार्य कर रहे हैं। नियमतः कानून के मुताबिक ग्रुप डी की सभी भर्ती समस्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्व में ही हो जानी चाहिए थी। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अपने ही नियमों की अनदेखी करके हमें हमारे अधिकारों से वंचित कर रहा है। इसके संबंध में हम लोगों ने बार-बार बीएचयू प्रशासन, जिला प्रशासन, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं अन्य संबंधित पक्षों को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।  लगभग छह माह से अपने अधिकारों की मांग समय-समय पर उठाते रहे। लगातार हमारी उपेक्षा की जाती रही। विगत 74 दिनों से हम सिंहद्वार पर धरना दे रहे हैं। फिर भी हमारी सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में हम 17 दिनों से आमरण अशन पर बैठे हैं। अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन, जिला प्रशासन द्वारा हमारी कोई सुधि नहीं ली गई है। हमारा परिवार इस वक्त आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। हमें बतलाया गया कि आमरण अनशन से किसी की मृत्यु होती है तो परिवार को मृत्यु का कारण मान कर उन्हें पुलिस द्वारा परेशान किया जाएगा। इसलिए आपसे प्रार्थना है, हमें इच्छा मृत्यु की इजाजत दें ताकि हमारे मृत्यु के बाद हमारे घरवालों को मृत्यु को बाद किसी तरह की परेशानी से बचाया जा सके। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कृष्ण कांत मिश्र, उमाशंकर, छोटेलाल, नवीन और वीरेंद्र हैं।

45 ने नेत्रदान व शेष सभी ने लिया देहदान का संकल्प
इन संविदाकर्मचारियों में से गुरुवार को ही 45 ने नेत्रदान का संकल्प लिया। इसके अलावा सभी समवेत स्वर में देहदान का संकल्प लिया।


Ajay Chaturvedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned