प्रसव के दौरान होने वाली मौत रोकने को BHU को मिली बड़ी सफलता

प्रसव के दौरान होने वाली मौत रोकने को BHU को मिली बड़ी सफलता

Ajay Chaturvedi | Publish: Dec, 05 2018 12:45:25 PM (IST) Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

भारत समेत 10 देशों में हो रहा है इस पर शोध।

वाराणसी. प्रसव के दौरान होने वाली महिलाओं की मौत चिकित्सा वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब बन गया है। इस मसले पर बीएचयू सहित दुनिया के तमाम विकसित और विकासशील देशों में शोध चल रहा है। बीएचयू का महिला रोग विभाग ने इस मामले बड़ी सफलता हासिल की है।

बता दें कि प्रसव के दौरान अत्याधिक रक्त स्राव से होने वाली मौत चिकित्सा वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बना है। ऐसी मौत पर अंकुश पाने के लिए एक साथ 10 देशों में शोध किया गया। इस जटिल समस्या से निबटने के लिए बीएचयू में दो दवाओं, कार्बेटोसिन और आक्सीटोसिन का तुलनात्मक शोध सफल रहा। कार्बेटोसिन दवा आरटीएस (रूम टेंपरेचर स्टेबल) यानी बिना फ्रिज के भी सुरक्षित है। हालांकि अभी यह तय होना बाकी है कार्बेटोसिन का निर्माण कौन देश करेगा।

यूपी में एक लाख पर 201 मौत
स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2014 से 2016 के बीच प्रति एक लाख में 130 महिलाओं की मौत पोस्टपार्टम से हुई। वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा प्रति लाख 201 है, जो 2004 व 2006 में 440 था। यानी उत्तर प्रदेश की स्थिति में अब काफी सुधार हुआ है। हालांकि विदेशों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 12 ही है।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान बीएचयू में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में शोध हुआ। इसकी प्रधान अन्वेषक डॉ उमा पांडेय थी। कोड वर्ड से हुआ दवाओं का उपयोग


जून 2016 से जनवरी 2018 तक 200 महिलाओं पर शोध किया गया। इसमें सह अन्वेषक डॉ संगीता राय, डॉ अंजनी रानी, डॉ ममता सहित सभी एसएस एवं जेआर ने शोध में सहयोग किया।

शोध में शामिल देश
भारत, सिंगापुर, इंग्लैंड, अर्जेटिना, इजिप्ट, केन्या, नाइजीरिया, साउथ अफ्रीका, थाइलैंड व यूगांडा। इसके साथ ही बेलगांव, कटक, नागपुर और बीएचयू के साथ ही भारत के छह सेंटर भी इसमें शामिल रहे।

'रिसर्च के दौरान इन दवाओं का नाम किसी को पता नहीं था। कोड वर्ड के माध्यम से दोनों दवाओं पर अध्ययन किया गया। रिजल्ट आने के बाद नाम पता चला। आक्सीटोसिन दवा पहले से ही उपयोग में हैं, लेकिन कार्बेटोसिन को अभी बाजार में नहीं उतारा गया है। कार्बेटोसिन में खास बात है कि इसको फ्रीज में रखने की जरूरत नहीं है। उम्मीद है यह दवा सस्ती दर पर उपलब्ध होगी।' - डा. उमा पांडेय, प्रधान अन्वेषक व स्त्री एवं प्रसूति विभाग की प्रभारी अध्यक्ष, बीएचयू।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned