यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को बड़ी राहत, वार्षिक परीक्षा के बदले नियम

यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को बड़ी राहत, वार्षिक परीक्षा के बदले नियम

Ajay Chaturvedi | Publish: Apr, 01 2018 04:11:47 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने के साथ ही अब एक साल का ही कोर्स पढ़ना होगा।

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू होने के साथ ही अब इन विद्यार्थियों को भी सीबीएसई की तरह ही देना होगा बोर्ड एग्जाम। नहीं होगी दुश्ववारियां। पढाई का बोझ भी घटेगा। ऐसे में पहले से बेहतर हो पाएगी पढाई और परीक्षा की तैयारी।

बता दें कि बोर्ड ने सोमवार से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू कर दिया है। इसके तहत अब सब कुछ ठीक वैसे ही होगा जैसे सीबीएसई में चल रहा है। यानी अब 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को दो साल का पाठ्यक्रम तैयार करने से छूट मिल जाएगी। अब वे केवल 10वीं और 12वीं का ही पाठ्यक्रम पढ़ कर परीक्षा दे पाएंगे। नौवीं और 11वीं की गृह परीक्षा होगी। इस संबंध में सनातन धर्म इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ हरेंद्र राय ने पत्रिका को यह जानकारी दी। बताया कि इससे छात्रों को बेहतर परिणाम देने का अवसर मिलेगा। अब तक उन्हें दो साल का कोर्स पढ़ना होता था। इसमें साल भर पुराना कोर्स भी था जिससे कोर्स काफी लेंदी हो जाता था जो परिणाम पर भी असर डाल रहा था। बता दें कि यह व्यवस्था अगले साल से लागू हो जाएगी।

यहां यह बता दें कि एक अप्रैल से माध्यमिक शिक्षा परिषद का नया सत्र शुरू हो जाएगा। दो अप्रैल से कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार कक्षा ग्यारह और बारह का कोर्स अलग-अलग कर दिया गया है। इससे बोर्ड परीक्षार्थियों को राहत मिली है। इसके अलावा इंटरमीडिएट में अब सभी विषयों के दो-दो पेपर नहीं कराए जाएंगे। हाईस्कूल की तरह सभी विषयों का एक-एक पेपर होगा। पांच पेपर में ही इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न हो जाएगी। वर्ष 2018-19 में आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षा में यह व्यवस्था लागू होने जा रही है। इससे जहां पढ़ाई का बोझ कम होगा, वहीं जल्द परीक्षाएं संपन्न हो सकेगी।

दरअसल यह सब छात्रहित में लिया गया फैसला है। इसके मूल में हैं कि यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को भी बेहतर मौका मिल सके। प्रतियोगी परीक्षाएं हों या प्रवेश परीक्षा दोनों में ही उनके लिए ऐसा पाठ्यक्रम हो जिससे उन्हें कोई दिक्कत न हो। समय से परीक्षा हो और समय से परिणाम घोषित हो सके। वे छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में समय पर कॉलेजों व विभिन्न तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में दाखिला ले सकें। सीबीएसई को टक्कर दे सकें।

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