उत्तर प्रदेश नहीं अपराधियों का प्रदेश का कहिए जनाब 

उत्तर प्रदेश नहीं अपराधियों का प्रदेश का कहिए जनाब 
bikers robbed two million

जमीन के लिए निकाली जमा-पूंजी, पिस्तौल सटाकर छीन ले गए बदमाश

वाराणसी. उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सपा उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का दावा कर रही है जबकि अपराधी लगातार कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए इसे अपराधी प्रदेश बनाने पर तुले हैं। 
वूमेन पॉवर लाइन के दम पर महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा देने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बनारस छोड़े चौबीस घंटे भी नहीं गुजरे कि शुक्रवार को सरेराह बदमाशों ने एक महिला से असलहे के नोंक पर रुपयों से भरा बैग लूट ले गए और पुलिस वहीं पुराने ढर्रे पर अपनी गाड़ी दौड़ाती नजर आई।
जानकारी के अनुसार जौनपुर की मूल निवासी रेहाना जैतपुरा थाना क्षेत्र के दोषीपुरा इलाके में रहती हैं। एक जमीन खरीदने के लिए वह कई वर्षों से अपनी पूंजी जमा कर रही थीं। एक जमीन का सौदा तय होने पर शुक्रवार को रेहाना नेे सारनाथ थाना क्षेत्र के आशापुर स्थित एक बैंक से दो लाख रुपये निकाले। रुपये बैग में रखकर वह घर को निकलीं। जैतपुरा में अलईपुरा रेलवे स्टेशन के समीप बाइक सवार दो बदमाश पहुंचे और रेहाना को पहले बातों में उलझाने की कोशिश की। युवकों पर शक हुआ तो रेहाना आगे बढ़ गईं, इस बीच एक बदमाश ने पिस्तौल निकाल ली और रेहाना को सटाकर रुपयों से भरा बैग छीनने के बाद फरार हो गए। बदमाशों के जाने पर रेहाना ने शोर मचाया। क्षेत्रीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने इलाके में लगे सीसी कैमरों की मदद से अपराधियों को पकडऩे की कवायद शुरू कर दी। 

वीवीआईपी जिले का हाल हुआ बदहाल
मंदिरों का शहर बनारस प्रमुख तीर्थ स्थल होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। इस नाते वाराणसी पूरे देश में सबसे वीवीआईपी संसदीय क्षेत्र हुआ। काशी में प्रतिदिन देश-विदेश के किसी न किसी गणमान्य नागरिक का आगमन होता ही रहता है। गुरुवार को ही देश के महामहिम राष्ट्रपति के साथ ही सूबे के राज्यपाल राम नाईक, सीएम अखिलेश यादव के अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद थे। वीवीआईपी आगमन के बीच लगातार हो रही आपराधिक वारदात पुलिस के इकबाल पर सवाल उठा रही है। 

पुलिस का अपना रोना
चालीस लाख की आबादी वाले बनारस शहर में सिविल पुलिसकर्मियों की संख्या बमुश्किल चार हजार है। ऐसे में कानून-व्यवस्था का हाल क्या होगा, समझ सकते हैं। पुलिस का दर्द है कि यहां रोज कोई न कोई वीआईपी आता है। आधी से अधिक फोर्स तो सिर्फ वीआइपी की सुरक्षा से लेकर अन्य तामझाम में फंसी रहती है। वाराणसी पुलिस की परेशानी को समझते हुए शासन ने भरोसा दिलाया था कि वीआईपी ड्यूटी के लिए यहां अलग से फोर्स उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का यह भरोसा भी चुनावी जुमला निकला। महीने छोडि़ए साल पर साल बीते लेकिन बनारस पुलिस को वीआईपी ड्यूटी के लिए अलग से फोर्स नहीं मिली।
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