UP ELECTION 2017 टिकट का पता नहीं, उम्मीदवारी का हो रहा प्रचार

UP ELECTION 2017 टिकट का पता नहीं, उम्मीदवारी का हो रहा प्रचार
poster of leaders

भाजपा-कांग्रेस के नेताओं का यह दांव बना हंसी का माध्यम

वाराणसी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 अपने आप में एक अनूठा चुनाव बन चुका है। पोस्टरवार से शुरू हुई चुनावी जंग जातिवाद से लेकर तमाम रोचक किस्सों के साथ आगे बढ़ रहा है। इन्हीं रोचक किस्सों में बनारस के दो नेताओं ने ऐसा काम किया है कि जिससे बाजार में चर्चाओं के दौरान हंसी-ठिठोली का माध्यम बन गया है। 

अमूमन तो जब तक राजनीतिक पार्टी किसी को टिकट थमा नहीं देती, उम्मीदवार दिल थाम कर बैठे रहते हैं आसपास के लोगों को भी भनक नहीं लगने देते कि उन्होंने भी टिकट के लिए आवेदन किया है लेकिन इस बार के चुनाव में वाराणसी में दो राजनीतिक दल से जुड़े दो नेताओं ने परिपाटी ही बदल डाली है जो बनारस में चाय की अडिय़ों पर चर्चा का विषय बना है। ये दोनों महाशय टिकट मिलने से पहले ही सोशल मीडिया व पोस्टर के जरिए अपनी उम्मीदवारी का ढोल पीटते प्रचार-प्रसार में लगे हैं। 


भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री सुजीत सिंह टीका सोशल मीडिया पर चुनावी पोस्टर जारी करने के साथ ही खुद को क्षेत्रीय उम्मीदवार बता डाला है। पोस्टर में क्षेत्रीय उम्मीदवार सुजीत सिंह टीका लिखा है। मजे की बात यह कि टीका ने उत्तरी विस क्षेत्र से उम्मीदवारी की ताल ठोंकी है। उत्तरी विधानसभा सीट से रविंद्र जायसवाल भाजपा के विधायक हैं। सुजीत सिंह टीका और विधायक रविंद्र जायसवाल के बीच काफी समय से मनमुटाव चल रहा है। ऐसे में गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी कहे जाने वाले भाजपा नेता टीका की ओर से शुरू किया गया पोस्टरवार भाजपाइयों में चर्चा का विषय बना है। पार्टी कार्यालय से लेकर चाय की अडिय़ों पर पोस्टर को लेकर गपबाजी चल रही है। 

भाजपा नेता सुजीत सिंह टीका की तरह ही कांग्रेस के एक नेता वीसी राय आवेदित प्रत्याशी के तौर पर प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से ही वीसी राय ने भी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लडऩे के लिए आवेदन किया है। कांग्रेस विधायक अजय राय के खेमे से खुद को जुड़ा बताने वाले वीसी राय ने उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में आवेदित प्रत्याशी के रूप में पोस्टर चिपकाये हैं। 


सत्ताइस साल से यूपी में वापसी के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस के लिए तो यह कम से कम सुुकून वाली बात है कि उनकी पार्टी का एक कार्यकर्ता खुद को आवेदित प्रत्याशी के रूप में प्रचारित कर रहा है जिससे कम से कम लोगों के बीच यह संदेश पहुंच रहा है कि पार्टी के सिंबल पर चुनाव लडऩे वालों की लाइन लगी है। 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के लिए सुजीत सिंह टीका का यह दांव पार्टी के लिए चिंता का सबब बन सकता है और प्रत्याशी घोषित होने के बाद स्वयं टीका की फजीहत हो सकती है। बीजेपी अपने अनुशासन के लिए जानी जाती है। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता द्वारा उस क्षेत्र के लिए दावेदारी का प्रचार-प्रसार करना जिस क्षेत्र से उन्हीं की पार्टी का विधायक है, जनता के बीच गलत संदेश दे सकता है। 
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