उत्तर प्रदेश में शराब पर बैन को सड़क पर उतरेगी भाजपा

उत्तर प्रदेश में शराब पर बैन को सड़क पर उतरेगी भाजपा
liquor ban

महादेव की नगरी काशी से शुरू होगा अभियानमोदी मंत्र के बाद मुहिम की तैयारी में जुटे जनप्रतिनिधि

विकास बागी

वाराणसी. शराब ने न जितने परिवार बिखेर दिए। शराब के चलते न जाने कितने परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गए। किसी का बेटा छीन गया तो किसी के सिर से पिता का साया इस शराब ने उठा दिया। बनारस में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाविकों को ई-बोट बांटने आए थे। नाविकों को ई-बोट देते समय उनके मन में एक भय था जिसे उन्होंने मंच से साझा भी किया। मोदी ने कहा कि ई-बोट से आपकी कमाई बढ़ेगी तो उसे घर और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में खर्च करना मगर शराब नहीं पीना। शराब पिओगे तो मेरा सपना अधूरा रह जाएगा, मुझसे वादा करो कि तुम अपनी कमाई शराब पीने में खर्च नहीं करोगे। शराब को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री का यह संदेश कई परिवारों को झकझोर गया। अस्सी घाट तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। 

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने उत्तर प्रदेश भाजपाइयों को एक नई दिशा दिखा दी है। भाजपा अब उत्तर प्रदेश में शराब बैन करने के लिए मुहिम छेड़ेगी। शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से होगी। भाजपा सबसे पहले महादेव की नगरी काशी को शराब ुमुक्त करने के लिए अभियान चलाएगी। भाजपा का दावा है कि भले ही हम अभी पूरे उत्तर प्रदेश में शराब बंद न करवा पाए लेकिन धर्म व संस्कृति की नगरी में शराब की बिक्री पर बैन लगवाने के लिए संघर्ष करेंगे। 

दो बार कोशिश कर चुका अब सड़क पर उतरने की तैयारी
शहर उत्तरी के विधायक रविंद्र जायसवाल विधानसभा में दो बार उत्तर प्रदेश में शराब को बैन करने के बाबत सवाल कर चुके हैं। रविंद्र जायसवाल की मांग पर आजम खां ने राजस्व का हवाला देते हुए कहा था कि सरकार को पैसा कहां से आएगा। रविंद्र जायसवाल ने आजम के सवाल पर उत्तराखंड के हरिद्वार, पंजाब के स्वर्ण मंदिर क्षेत्र का हवाला देते हुए काशी में शराब बैन किए जाने की मांग रखी। विधायक ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि जब बिहार में शराब पूर्ण रूप से बंद हो सकती है तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं, बनारस तो पूरे विश्व धर्म, शिक्षा औ संस्कृति की राजधानी मानी जाती है। हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थल पर शराब बंदी के लिए अब सड़क पर उतरने की तैयारी है। प्रधानमंत्री के मंत्र ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। शराब के चलते आज कई परिवार तबह हो गए हैं। छेडख़ानी, दुराचार, सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं शराब वजह बनती है। 

काशी में अक्सर होता है विरोध 
वाराणसी में शराब की एक दर्जन से अधिक दुकानों पर ताला लग चुका है। यहां के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां अनुज्ञापी शराब की दुकान खोलने से भय खाता है। भेलूपुर थाना क्षेत्र के कुछ इलाकों में तो आबकारी टीम ने शराब की दुकान खुलवाने के लिए हर तरह के पैंतरे आजमाए लेकिन सफलता नहीं मिली। भाजपा अब इन महिलाओं के साथ मिलकर पूरे नगर में अभियान चलाएगी। बीते साल सारनाथ इलाके के एक गांव की महिलाओं ने शराब के ठेका की तरफ रूख करने वालों की ऐसी-तैसी कर दी थी। 

नहीं भूलता वह साल
वर्ष 2010 को सत्रह फरवरी की रात काशीवासियों के जेहन में अब भी ताजा है जब सोयेपुर गांव में जहरीली शराब के सेवन के कारण दो दर्जन से अधिक महिला-पुरूष की मौत हो गई। घटना के कुछ दिन बाद ही वाराणसी के एक अन्य गांव मिर्जामुराद में छह लोगों के अलावा मीरजापुर जिले में भी एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत जहरीली शराब के कारण हो गई थी। 
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