BREAKING NEWS बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह ने सुरक्षा मानकों को ताख पर रखा 

BREAKING NEWS बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह ने सुरक्षा मानकों को ताख पर रखा 
amit shah

संकटमोचन मंदिर परिसर में प्रतिबंध के बावजूद मोबाइल से करते रहे अमित शाह बातचीत, सुरक्षाकर्मी भी असलहे के साथ किए प्रवेश

वाराणसी. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को सुरक्षा-व्यवस्था से संबंधित नियमों की धज्ज्यिां उड़ाई। संकट मोचन मंदिर परिसर में प्रतिबंध के बावजूद अमित शाह अपना मोबाइल लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश किए और परिसर में काफी देर तक मोबाइल फोन पर किसी से वार्ता करते नजर आए। इतना नहीं अमित शाह के सुरक्षा काफिले में चलने वाले सुरक्षाकर्मी भी शस्त्र के साथ मंदिर में प्रवेश किए। बात यहीं नहीं खत्म हुई, शाह ने अपने प्रशसंकों के साथ मंदिर परिसर में सेल्फी भी ली। पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी भी सारे वाकये को देखते रहे लेकिन किसी ने भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को टोकने की जहमत नहीं उठाई। पूर्वांचल के दो दिवसीय दौरे पर आए अमित शाह पहले से ही विरोधी पार्टियों के निशाने आ गए जब उनका हेलीकाप्टर बीएचयू की हवाई पट्टी पर उतरा। संकट मोचन मंदिर परिसर में असलहे और मोबाइल पर बातचीत की तस्वीर ने शाह के विरोधियों को एक और हथियार दे दिया है।
गौरतलब है कि सात मार्च 2006 को संकट मोचन मंदिर परिसर व कैंट रेलवे स्टेशन पर हुए आतंकी विस्फोट में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी। विस्फोट के बाद से ही मंदिर परिसर में हथियार, मोबाइल, कैमरा ले जाने पर पाबंदी है। 

मोदी नहीं आए, शाह पहुंचे
वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार वाराणसी आ चुके हैं। अपने वाराणसी दौरे के दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ दरबार से लेकर संकट मोचन मंदिर में मत्था टेका लेकिन काशी के कोतवाल यानि कालभैरव मंदिर कभी नहीं गए जिसके चलते काशी का संत समाज उन्हें इसके लिए कई बार टोक भी चुका है। मोदी तो कालभैरव मंदिर नहीं गए लेकिन उनके सिपहसलार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को काशी विश्वनाथ दरबार में हाजिरी लगाने के बाद कालभैरव के यहां मत्था टेका। 

बारिश हुई और चर्चा शुरू
वाराणसी में मोदी के तीन कार्यक्रम अब तक बारिश के चलते रद हो चुके हैं। डीएलब्ल्यू में तो एक मजदूर की मौत भी हो चुकी है। इस बार मोदी तो नहीं लेकिन उनका दाहिना हाथ माने जाने वाले शाह बनारस में मौजूद थे। शाह के आने के साथ ही मौसम ने करवट बदल ली थी। भाजपाइयों से लेकर आम लोगों में चर्चा रही कि भाजपा के बड़े नेताओं और बनारस की बारिश का संबंध बन गया है। 
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