पूर्वांचल के बाहुबलियों को मायावती का झटका, अब कैसे पार होगी चुनावी नैया

पूर्वांचल के बाहुबलियों को मायावती का झटका, अब कैसे पार होगी चुनावी नैया
mayawati, dayshankr and vineet

मायावती के एलान ने बढ़ाई मुश्किलें, बसपा के बूते ही सियासी सफर की थी तैयारी



विकास बागी

वाराणसी. उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय जाति की धुरी पर चल रही है। दयाशंकर  सिंह-मायावती प्रकरण के बाद दलित और क्षत्रियों के बीच आई खटास कम होने का नाम नहीं ले रहा। बसपा की बॉस मायावती ने मंगलवार को जो एलान किया उससे पूर्वांचल के बाहुबलियों में खलबली मच गई है। बसपा के हाथी पर चढ़कर पूर्वांचल के क्षत्रिय बाहुबली सियासी सफर की तैयारी में थे लेकिन बसपा के इस एलान ने बाहुबलियों का समीकरण बिगाड़ दिया है। 

बसपा ने एलान किया है कि क्षत्रियों को टिकट नहीं देगी। सवर्णों में वह सिर्फ ब्राह्मण से  नाता रखेगी। इतना ही नहीं अब बसपा उत्तर प्रदेश की लगभग 130 सीटों पर दलित प्रत्याशियों को उतारने की बात भी कह रही है। यदि बसपा इसपर कायम रहती है तो यकीनन उत्तर प्रदेश के इतिहास में वर्ष 2016-17 का विधानसभा चुनाव सबसे रोचक चुनाव होगा। 


बसपा द्वारा क्षत्रियों को टिकट न देने की घोषणा से पूर्वांचल के बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह को तगड़ा झटका लगा है। माफिया से माननीय का सफर तय करने वाले बृजेश सिंह तो वाराणसी से विधान परिषद पहुंच गए हैं। बृजेश सिंह इस समय अपनी पत्नी व बसपा की पूर्व एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह को चंदौली की सैयदराजा या सकलडीहा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने की तैयारी में थे। अन्नपूर्णा सिंह के मायावती से मधुर संबंध भी हैं। अब देखना होगा कि मायावती अन्नपूर्णा सिंह से अपने रिश्ते निभाती हैं या फिर सियासत की जंग में उनका साथ छोड़ देती हैं। 


क्षत्रियों को टिकट देने से बसपा के इंकार से सबसे बड़ा झटका माफिया विनीत सिंह को लगा है। पूर्व बसपा एमएलसी विनीत सिंह इस समय झारखंड की जेल में है, उसने कुछ दिनों पूर्व एक पुराने मामले में रांची की अदालत में आत्म समर्पण किया था। विनीत सिंह ने मायावती की गुड लिस्ट में शामिल होने के चक्कर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर पोस्टरवार किया था। वाराणसी पुलिस तभी से विनीत के पीछे पड़ी थी। रंगदारी के एक मामले में फरार चल रहे विनीत को उत्तर प्रदेश छोड़कर झारखंड में शरण लेनी पड़ी थी। 

 
पूर्वांचल के इन दो बाहुबलियों के अलावा जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह भी बसपा से टिकट हासिल करने के लिए एड़ी-चोटी लगाए थे। झांसी की जेल में मौजूद माफिया मुन्ना बजरंगी भी अपनी पत्नी सीमा सिंह के लिए बसपा से टिकट लेने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर रहा है। 

मायावती के एलान से बलिया के उमाशंकर सिंह का खेमा भी खासा परेशान हो चुका है। हालांकि दयाशंकर सिंह प्रकरण में उमाशंकर सिंह मायावती के साथ खड़े थे और उन्होंने दयाशंकर सिंह को समाज का कलंक तक बता दिया था लेकिन अब बदले हालात में उमाशंकर सिंह के सामने भी नई चुनौती सामने आ गई है।  
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