मारीशस की आज़ादी की स्वर्ण जयंती पर नागेपुर में उत्सव

मजूर से हजुर बनने की संघर्ष यात्रा का जीवंत दास्तान है गिरमिटिया देश मारीशस, गिरमिटिया भाषा भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा देने की मांग।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 11 Mar 2018, 08:14 PM IST

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. विश्व भोजपुरी संघ (W.B.O.) द्वारा देव एक्सेल फाउंडेशन व आशा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री के सांसद आदर्श गांव नागेपुर में गिरमिटिया देश रहे मारीशस की आजादी के 50वीं सालगिरह पर उत्सव मनाया गया। मारीशस की आजादी के स्वर्ण जयन्ती वर्षगांठ की याद अक्षुण्ण रखने के लिए उनके पुरखों के देश भारत के वाराणसी स्थित नागेपुर गांव में नीम, आम, आँवला के पौधे लगाए गए। साथ ही पर्यावरण रक्षा व हरित पुर्वान्चल का संकल्प लिया गया। घोषणा की गई कि इस वर्ष के उत्तरार्ध में मारीशस में होगा विश्व भोजपुरी महोत्सव।

मुख्य अतिथि डब्ल्यूबीओ के मारीशस इकाई की अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख (कला व संस्कृति) हुशिला देवी रिसौल ने कहा कि मारीशस के लोग काशी को अपना सबसे पवित्र तीर्थ धाम मानते हैं तथा वहां भी काशी व बनारस नाम के इलाके हैं और गंगा तालाब में काशी विश्वनाथ मंगल महादेव सबसे पुज्यनीय शिव मन्दिर हैं। उन्होंने काशी में यूपी मारीशस प्रवासी भवन निर्माण के लिए हेतु भूखंड व धनराशी के आवंटन की खातिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को मारीशस के तरफ से कोटि कोटि धन्यवाद दिया। इसके पश्चात आराजी लाईन ब्लाक सभागार मे होली मिलन समारोह में भोजपुरी को जीवंत करने के लिए विविध आयोजन हुआ। वक्ताओं ने लोकभाषा भोजपुरी, पुरबिया संस्कृति व दर्शन की भारतीय पहचान मारीशस को बताते हुए उसे हिन्द महासागर का मोती करार दिया।

समारोह के अध्यक्ष विश्व भोजपुरी संघ (W.B.O.) के महासचिव डॉ अपूर्ण नारायण तिवारी “बनारसी बाबू” ने कहा कि मजूर से हुजूर बनने की संघर्ष यात्रा की जीवंत दास्तान है गिरमिटिया देश मारीशस, जिसे लघु भारत भी कहा जाता है। वहां की भोजपुरी बनारसी “काशिका” से प्रभावित है और आजादी के 50 सालों तक आज भी वहां पुरबिया भोजपुरियों का सरकार, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व शीर्ष मंत्रिमंडल में पूर्व आधिपत्य रहा है. जो उनके पुरखों के देश भारत के लिये गौरव की बात है। डॉ. नारायण तिवारी ने मारीशस की आजादी की स्वर्ण जयन्ती वर्ष में इस वर्ष के उत्तरार्ध में विश्व भोजपुरी महोत्सव मारीशस में कराये जाने की घोषणा की।

सभा में सर्वसम्मती से 30 देशों की गिरमिटिया भाषा रूप में बोले जाने वाली सनातनी पुरबिया भाषा “काशिका” भोजपुरी को भारत में संवैधानिक दर्जा दिए जाने की काशी के सांसद प्रधानमंत्री से मांग की गई। साथ ही दो करोड़ अप्रवासी पुरबिया भारतीयों के लिए काशी में एक गिरमिटिया शोध केन्द्र स्थापना की भी पुरजौर अपील की गई। भारत सरकार को पत्रक दिए जाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर रसासिक्त मनोहारी रचनाओं व गीत गवनई की प्रस्तुतियां दी गईं। गीतकारों में जीतेन्द्? नाथ ?? सिंह “जीत”, बनारसी बाबू, हुशिला रिसौल, शिवशंकर सिंह आदि प्रमुख थे।

इस मौके पर बल्लभाचार्य पाडेय, विनय सिंह, शिवशंकर सिंह, डॉ. दिनेश सिंह, विनय कुमार सिंह, सुरेश राठौर, विनय सिंह, होशील रसौल, अपुर्व तिवारी, पूनम बरनवाल, कृष्ण बरनवाल, मुकेश प्रधान, राजकुमार गुप्ता, नन्दलाल मास्टर, रेनू, नगीना सिंह, ब्लाक प्रमुख डॉ महेंद्र सिंह पटेल, महेंद्र राठौर आदि मौजूद थे।

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