Chhath 2018: इस बार छठ पर बन रहा शुभ संयोग, जानिए कब है यह पर्व

Chhath 2018: इस बार छठ पर बन रहा शुभ संयोग, जानिए कब है यह पर्व

Sarweshwari Mishra | Publish: Nov, 10 2018 12:17:59 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा (Chhath Puja 2018) का विशेष विधान है

वाराणसी. दिवाली के बाद छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। इस पूजा की शुरुआत मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से हुई है, जो अब देश-विदेश तक फ़ैल चुकी है। कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ पूजा (Chhath Puja 2018) का विशेष विधान है। अंग देश के महाराज कर्ण सूर्य देव के उपासक थे। अतः परम्परा के रूप में सूर्य पूजा का विशेष प्रभाव इन इलाकों पर दिखता है। अतः सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाती हैं। इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाए रख सकते हैं। इस बार छठ पूजा 13 नवंबर को की जाएगी।

छठ की पूजा विधि क्या है?
यह पर्व चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को "नहा-खा" के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है। इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है। इस दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है।

दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है। खीर गन्ने के रस की बनी होती है। इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता।


तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। साथ में विशेष प्रकार का पकवान "ठेकुवा" और मौसमी फल चढाएं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है।


चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।


इस बार पहला अर्घ्य 13 नवंबर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को अरुणोदय में दिया जाएगा।

छठ पर्व की तारीख
नहाय-खाए- 11 नवंबर
खरना (लोहंडा)- 12 नवंबर
सायंकालीन अर्घ्य- 13नवंबर
प्रात:कालीन अर्घ्य- 14 नवंबर

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