पूर्वांचल के बाहुबलियों को साधेंगे शिवपाल

पूर्वांचल के बाहुबलियों को साधेंगे शिवपाल
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क्या मुलायम का यह फार्मूला करेगा सपा को संकट से बाहर

वाराणसी
चुनाव के लिए साम-दाम-दंड-भेद की रणनीति अपनानी पड़ती है। चुनाव के लिए लिए सिर्फ आपका काम जीत नहीं दिला सकता है। धनबल के साथ ही बाहुबल  भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सपा सुप्रीमो इसी फार्मूले पर उत्तर प्रदेश में सपा का फिर से डंका बजाने की तैयारी में हैं। मुलायम सिंह यादव ने यहीं फार्मूला अपने अपने परिवार को जीत के मंत्र के रूप में दिया है। पूर्वांचल का माफिया डॉन दबंग विधायक मो तार अंसारी, क्षत्रियों के नेता बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भईया, अतीक अहमद, ओमप्रकाश, नारद राय जैसे दबंग सपाई समेत पूर्वांचल व पश्चिम के बाहुबलियों को शिवपाल यादव साधेंगे। सपा के सियासी संग्राम के दौरान राजा भईया से लेकर ओमप्रकाश, मो तार खेमा शिवपाल के साथ खड़ा रहा।

समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान से व्यथित मुलायम सिंह यादव को पता है कि बीते चार सालों में सपा की छवि बदली है जिसका सारा श्रेय अखिलेश यादव को है। कभी सपा पर गुंडों की पार्टी का ठप्पा लगा थाा। हल्ला बोल सपा का पुराना नारा है। पार्टी की छवि बदलने के लिए ही मुलायम ने अखिलेश को मु यमंत्री बनाया था और अखिलेश अपने पिता के सपने के अनुरुप उसमें सफल भी हुए लेकिन भाई की महत्वाकांक्षाएं भी कम नहीं थी। मुलायम भी इसे बेबाकी से स्वीकार करते हैं कि शिवपाल ने पार्टी को खड़ा करने में अपना खून-पसीना बहाया है। एक ओर सपा की लगातार बढ़ती ताकत तो दूसरी तरफ उस ताकत का लीडर बनने के लिए चाचा-भतीजे के बीच चल रही जंग ने सपा मुखिया को परेशान कर रखा है। मुलायम की मजबूरी है कि बेटे को डांट सकते हैं लेकिन उस भाई को नहीं जिसने पार्टी के शुरूआती दिनों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है। अमर सिंह को क्यों साथ रख रहे हैं, यह बीते 24 अक्टूबर को सपा की बैठक में साफ हो गया जब मुलायम ने कहा कि अमर सिंह ने उन्हें जेल जाने से बचाया था।

यूपी की कई बार कमान संभाल चुके पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव को पता है कि  चुनाव में जीत आपको सिर्फ काम के आधार पर जीत नहीं दिला सकते हैं अन्यथा अटल सरकार को दोबारा सत्ता में आने से कोई नहीं रोक नहीं सकता है। मुलायम के तरकश में वो सारे तीर मौजूद हैं जो सपा को यूपी में दोबारा सत्ता दिलाने में मदद कर सकती है लेकिन तरकश के तीर आपस में ही उलझ गए हैं। सूत्रों के अनुसार मुलायम अपने परिवार को यह बात समझा नहीं पा रहे हैं क्योंकि कई ऐसी बातें हैं जो अब उनके हाथ से निकल चुकी है मसलन, सपा के अधिकतर मंत्री, विधायक अखिलेश यादव के साथ हैं तो सपा के बाहुबली नेताओं ने शिवपाल पर भरोसा जिताया है।

कार्रवाई, बर्खास्तगी के बीच सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल, अखिलेश को एक होकर पार्टी को चलाने का संदेश दिया है। मुलायम ने अपने परिवार को जीत का जो फार्मूला दिया है उसे यदि चाचा-भतीजे ने फालो किया तो सपा के सत्ता में वापस आने की संभावना बढ़ जाएगी। मुलायम फार्मूला के अनुसार शिवपाल यूपी के बाहुबलियों को साधेंगे तो अखिलेश अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के आधार पर वोट मांगेंगे। धनबल के साथ चुनाव में प्रचार-प्रसार के दौरान तड़का लगाने की जि मेदारी अमर सिंह के पास होगी।

मुलायम सिंह यादव के इस फार्मूले पर चाचा-भतीजे की सहमति है कि पार्टी संगठन भाई और सरकार बेटा चलाए लेकिन मामला विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर अटक गया है। अखिलेश अपने हिसाब से तो शिवपाल अपने तरीके से टिकट वितरण का अधिकार चाहते हैं। मुलायम फिलवक्त इस समय टिकट वितरण का फार्मूला खोजने में लगे हैं क्योंकि चाचा-भतीजे की रार इसीपर आकर टिक गई है। संभव है कि आने वाले दिनों में मुलायम सिंह टिकट वितरण का अधिकार अपने पास रखें ताकि चाचा-भतीजे यानि शिवपाल और अखिलेश दोनों को शांत किया जा सके क्योंकि मुलायम के पास यह अधिकार आया तो दोनों के बीच रार समाप्त हो जाएगी।

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