अखिलेश सरकार ने शिक्षकों के लिए दो सौ करोड़ की पोटली खोली

अखिलेश सरकार ने शिक्षकों के लिए दो सौ करोड़ की पोटली खोली
cm akhilesh yadav

चार साल बाद सियासी संग्राम के बीच वित्तविहीन शिक्षकों की आई याद, 1.92 लाख शिक्षकों की भरेगी झोली

वाराणसी. लैपटॉप का लालीपॉप देकर सत्ता में आए अखिलेश सरकार ने वित्तविहीन शिक्षकों को भी मानदेय देने की घोषणा की थी। वर्ष 2012 के चुनावी घोषणा पत्र को अमलीजामा पहनाने में सपा सरकार को चार साल लग गए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा सरकार ने सरकारी खजाने से दो सौ करोड़ रुपये वित्तविहीन शिक्षकों के लिए निकाले हैं। इस राशि से प्रदेश के लगभग 1.92 शिक्षकों को मानदेय का वितरण किया जाएगा। 

परिवार में मचे सियासी संग्राम के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वित्तविहीन विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के लिए शासनादेश जारी किया है। संयुक्त सचिव अनिल कुमार बाजपेयी की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के अंशकालिक शिक्षकों को मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रावधानित दो सौ करोड़ रुपये अवमुक्त करने का अनुरोध किया गया था। राज्यपाल ने हुए प्रथम किस्त के रूप में एक सौ करोड़ रुपये अवमुक्त करने की अनमुति दे दी है। इस राशि से प्रदेश में मौजूद वित्तविहीन स्कूलों के 1 लाख 92 हजार 123 अंशकालिक शिक्षकों व प्रधानाचार्यों को प्रोत्साहन मानदेय दिया जाएगा जिसमें इंटर कॉलेज के 7431 प्रधानाचार्य, हाईस्कूल के 8036 प्रधानाध्यापक , 68387 प्रवक्ता व 1 लाख 8 हजार 269 सहायक अध्यापकों को योग्य माना गया है। 

चुनावी बयार में ही सही अखिलेश यादव को वित्तविहीन शिक्षकों की याद तो आई लेकिन वित्तविहीन विद्यालयों में तैनात शिक्षक अखिलेश सरकार के कागजी दांव-पेच से नाराज हैं। शिक्षकों ने बताया कि मासिक वेतन समय सीमा में बांध दिया गया है। सरकार ने मानदेय का वादा किया था लेकिन शासनादेश में इसे प्रोत्साहन मानदेय का नाम दिया गया है। इतना नहीं सरकार ने ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया है जिससे अगली सरकार इस योजना को जारी रखे। इतना ही नहीं सरकार छह-छह महीने पर मानेदय का भुगतान करेगी। यानि शिक्षकों को सितंबर और मार्च में मानदेय मिलेगा। प्रोत्साहन मानदेय से वर्ष 2012 के बाद वित्तविहीन विद्यालयों में  नियुक्त शिक्षकों को वंचित रखा गया है।

सपा सरकार के इस दांव-पेच से शिक्षक गुट भी खासे नाराज हैं। शिक्षक नेताओं का कहना है कि जब तक इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट में संशोधन कर हमें अंशकालिक से पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा नहीं मिलता, सरकार का यह लॉलीपॉप  शिक्षकों के साथ धोखा है। चुनाव से पहले अखिलेश सरकार ने वित्तविहीन विघालायों में तैनात शिक्षकों के साथ इंसाफ नहीं किया तो अगले चुनाव में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 
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