चचा से पीडब्ल्यूडी छीन अखिलेश ने शुरू की ताबड़तोड़ बैटिंग

चचा से पीडब्ल्यूडी छीन अखिलेश ने शुरू की ताबड़तोड़ बैटिंग
akhilesh and shivpal

मुख्यमंत्री की चेतावनी से सहमे राज्यमंत्री, अफसर, पंद्रह नंवबर तक का अल्टीमेटम 

वाराणसी. सियासी संकट से उबरे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समझौते के तहत चाचा शिवपाल यादव को पीडब्ल्यूडी छोड़कर सभी मंत्रालय लौटाने के साथ ही दो अन्य विभाग भी सौंप दिए थे। मुख्यमंत्री ने शिवपाल का सबसे पसंदीदा और मलाईदार विभाग पीडब्ल्यूडी जब दोबारा नहीं सौंपा और उसे अपने पास रखा था तभी विभागीय अधिकारी समझ गए थे कि मलाई काटने के दिन अब लदने वाले हैं। हुआ भी कुछ ऐसा ही। 


अखिलेश यादव के सख्त तेवर से चाचा शिवपाल यादव के खासमखास मंत्री माने जाने वाले सिंचाई व लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल की हालत भी कुछ ठीक नहीं है। मंत्री जी अपने क्षेत्र में भी कोई निर्माण निर्धारित सीमा में पूरा नहीं करा पाए। बनारस की क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर काशीवासियों के निशाने पर हमेशा अखिलेश ही रहते थे और मुख्यमंत्री को यह अच्छे से पता था कि इसके पीछे की वजह कौन-कौन लोग हैं। विभाग में सड़कों के निर्माण, पुर्नद्धार के नाम पर कैसे बंदरबांट हो रही है। अब मंत्री जी और उनके समर्थकों में बेचैनी है कि कहीं मुख्यमंत्री ने जांच बिठा दी तब क्या होगा। 


अखिलेश यादव ने पीडब्ल्यूडी की कमान संभालने के साथ ही ताबड़तोड़ बैटिंग शुरू कर दी है। विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे को पंद्रह नवंबर तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश देने के साथ ही चेताया है कि निर्धारित सीमा के बाद वह किसी भी दिन लोकापर्ण करके ट्रैफिक संचालन करा देंगे इसलिए तय तिथि के भीतर हर हाल में निर्माण पूरा हो। बीएचयू-लंका होते होते हुए सामनेघाट पर निर्माणाधीन पुल जो रामनगर से जुडऩा है, को भी नंवबर तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने गाजीपुर, बलिया, मीरजापुर में गंगा पर निर्माणाधीन सेतुओं के पूर्ण निर्माण के लिए मार्च 2017 अंतिम तिथि घोषित की है। 


सड़कों के निर्माण में होने वाले घालमेल व शिवपाल यादव के समर्थकों की खुलेआम चल रही धांधली का खेल कुछ दिनों पहले ही वाराणसी के जिलाधिकारी ने पकड़ा था। एक शिकायत पर वह चौबेपुर पहुंचे पीएमजीएसवाई के तहत बनी दस किलोमीटर सड़क की जांच करने। पता चला कि मंत्री जी के खास ने पूरी सड़क ही नहीं बनाई थी। एक तरफ से सड़क बनती गई और दूसरी तरफ से उखड़ती गई। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री बीएचयू भेजी थी जांच को। मामले में बीएचयू की रिपोर्ट भी आ गई है जिसमें कहा गया है कि ठेकेदार ने सड़क का निर्माण मानक के विपरीत किया है।
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