CM योगी पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में, संविधान संशोधन बिल को निरस्त कराने की करेंगे पहल

CM योगी पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में, संविधान संशोधन बिल को निरस्त कराने की करेंगे पहल
CM Yogi Adityanath

प्रोन्नति में आरक्षण के विरोध में कर्मचारियों और शिक्षकों ने CM को सौंपा ज्ञापन, संविधान संशोधन बिल रद कराने की मांग

वाराणसी. प्रदेश के शिक्षकों और राज्य कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मिला मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से। कर्मचारियों और शिक्षकों ने पदोन्नति में आरक्षण की मुखालफत की। उन्होंने मुख्यमंत्री से पदोन्नति में आरक्षण संबंधी 117वें संविधान संशोधन बिल को पूरी तरह निरस्त कराने और बेसिक शिक्षा सहित सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार पदावनतियां करने की मांग की।


सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने पत्रिका को बताया कि अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि मुख्यमन्त्री ने 117 वे संविधान संशोधन बिल को पूरी तरह निरस्त कराने के लिए समुचित सार्थक कार्रवाई करने और बेसिक शिक्षा सहित सभी विभागों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार जूनियर कार्मिकों व शिक्षकों को रिवर्ट कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

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दुबे ने बताया कि मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि केंद्र सरकार की पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए 117 वे संविधान संशोधन बिल को लोकसभा से पारित कराने की कोशिश का उत्तर प्रदेश को व्यापक राष्ट्रहित में प्रबल विरोध करना चाहिए। समिति ने मुख्य मंत्री से मांग की कि वे इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार से वार्ता कर 117 वे संविधान संशोधन बिल को पूरी तरह निरस्त कराएं। समिति ने ज्ञापन में लिखा है कि 27 अप्रैल 2012 के सर्वोच्च न्यायालय के पदोन्नति में आरक्षण को असंवैधानिक करार देने के निर्णय को निष्प्रभावी करने के लिए वोट की राजनीति के चलते संविधान संशोधन की कोशिश हो रही है जिससे उत्तर प्रदेश के 18 लाख कर्मचारियों, अधिकारियों और 06 लाख शिक्षकों में भारी गुस्सा और कुंठा व्याप्त है।


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समिति ने मुख्यमन्त्री से यह भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पालन सुनिश्चित किया जाए जिससे बेसिक शिक्षा विभाग सहित सभी विभागों में पदोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता का लाभ पाकर पदोन्नति पाए एससी, एसटी कार्मिकों और शिक्षकों को रिवर्ट कर इससे रिक्त होने वाले पदों पर सामान्य व अन्य पिछड़ी जाति के वरिष्ठ कार्मिकों और शिक्षकों की पदोन्नति हो सके और उन्हें न्याय मिल सके। समिति ने अवगत कराया कि खासकर बेसिक शिक्षा विभाग में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का आज तक पालन नहीं किया गया है जिससे सामान्य व अन्य पिछड़ी जाति के लाखों शिक्षकों को अपने से काफी जूनियर एससी, एसटी शिक्षकों के नीचे काम करना पड़ रहा है और वरिष्ठ होते हुए भी उनका वेतन काफी कम है। सातवें वेतनमान में वेतन निर्धारण हो रहा है और यदि जूनियर शिक्षकों को रिवर्ट न किया गया तो और गंभीर वेतन विसंगतियां उत्पन्न हो जाएंगी।


मुख्यमंत्री से हुई वार्ता में राजीव सिंह, राम प्रकाश और रीना त्रिपाठी शामिल थे।



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