कांग्रेस ने जारी की प्रत्याशियों की पहली सूची, अजय राय पिंडरा से, जौनपुर से नदीम को टिकट

जानिये सूची में और किसके नाम...

वाराणसी. गठबंधन की पशोपेश के बीच कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पहले चरण में सभी सीटिंग विधायकों को उनके उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी है। इसके तहत बनारस के पिंडरा से अजय राय, जौनपुर से नदीम जावेद का टिकट पक्का हो गया है। इसके साथ ही पार्टी के सीटिंग एमएलए के विधानसभा क्षेत्र बदलने की कवायदतों पर विराम लग गया है।




इनके टिकट को मिली मंजूरी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक वाराणसी के पिंडरा से अजय राय, जौनपुर सदर से नदीम जावेद, इलाहाबाद उत्तरी से अनुग्रह नारायण सिहं, मड़िहान से ललितेशपति त्रिपाठी, तमकुहीराज से अजय कुमार लल्लू, रुद्रपुर से अखिलेश प्रताप सिंह का टिकट फाइनल हो गया है। स्टेट इलेक्शन कमेटी ने इन सभी के नामों पर हरी झंडी की पुष्टि की है।




कांग्रेस में स्क्रूटनी का काम अंतिम दौर में
इस बीच सपा संग चुनावी गठबंधन को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अन्य सीटों के लिए तीन-तीन नामों के पैनल तैयार करने के काम में भी तेजी ला दी है। शुक्रवार को स्क्रूटनी का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। सुबह से ही कमेटी के सभी सदस्यों के बीच मंथन जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक दो दिन में ये पैनल केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी को भेज दिए जाएंगे।




अजय राय का राजनीतिक करियर
अजय राय ने राजनीतिक जीवन की शुरूआत 1996 में कोलअसला विधानसभा क्षेत्र में जीत के साथ की। उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और नौ बार के विधायक वामपंथी ऊदल को हराया। इस जीत के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 1996 से 2009 तक लगातार चाहे आम चुनाव हो या उप चुनाव सभी में जीत हासिल की। इस तरह 2009 तक चार बार कोलअसला के विधायक रहे। अजय राय ने 2009 में भाजपा का दामन छोड़ा और वाराणसी लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर मैदान में उतरे। लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। हालांकि भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी और कौमी एकता दल के प्रत्याशी मोख्तार अंसारी के बाद बाद अजय राय ही रहे, यहां तक कि कांग्रेस के पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र को भी उन्होंने पीछे छोड़ दिया था। उसके बाद 2009 में पुनः कोलअसला सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और बसपा के जेपी मिश्र को पराजित कर जीत हासिल की। इसी विजय के कुछ ही दिनों बाद तमाम विरोध के बावजूद वह कांग्रेस में शामिल हुए। लेकिन उन्हें कांग्रेस विधानमंडल दल से संबद्ध विधायक ही बताया जाता रहा। लेकिन नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई पिंडरा विधानसभा से 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल से कांग्रेस के टिकट पर मुकाबला किया। हालांकि उन्हें इस बार भी संसदीय चुनाव में पराजय का ही सामना करना पड़ा। लेकिन विधानसभा क्षेत्र में उनका दबदबा कायम है। इसी आधार पर कांग्रेस ने उन्हें फिर से मैदान में उतारने का फैसला किया और उन्हें पुनः पिंडरा विधानसभा से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।


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