कांग्रेस ने काशी में दिखाई पंजे की ताकत 

कांग्रेस ने काशी में दिखाई पंजे की ताकत 
sonia gandhi live road show

मुस्लिम आबादी में भीड़ ने बढ़ाया सोनिया का हौसलारैली से बढ़ी राजनीतिक दलों में सरगर्मी 

विकास बागी

वाराणसी. दर्द-ए-बनारस और सत्ताइस साल यूपी बेहाल का नारा लेकर उत्तर प्रदेश के सियासी संग्राम में कूदी कांग्रेस के लिए मंगलवार का दिन संजीवनी लेकर आया है तो कहना गलत नहीं होगा। सावन के महीने में महादेव की नगरी बनारस से चुनावी शंखनाद करने पहुंची कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को भी उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में तपती गर्मी के बीच हजारों की संख्या में लोग उनके स्वागत में खड़े होंगे। 
 वाराणसी के कचहरी क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद सोनिया गांधी ने रोड शो का आगाज किया। जैसे-जैसे कारवां बढ़ता गया सोनिया गांधी से लेकर अन्य कांग्रेसियों के चेहरे पर मुस्कान फैलती गई। स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी रोड के शुरूआती समय में तो कार के अंदर थी लेकिन कार्यकर्ताओं के जोश व भीड़ के चलते खुद को रोक नहीं सकीं और नदेसर इलाके में पहुंचने पर मुस्लिम बंधुओं का स्वागत देख कार का दरवाजा खोलना ही पड़ा। उसके बाद तो सोनिया गांधी कार के दरवाजे पर ही खड़ी हो गई और कारवां बढ़ता गया। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र पीलीकोठी पर जैसे ही काफिला पहुंचा भीड़ देख विरोधियों के भी पसीने छूट गए। हजारों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी थी। 

मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में कांग्रेसी पंजे में आई नई जान ने सोनिया गांधी का हौसला तो बढ़ाया ही विरोधियों को भी हैरानी में डाल दिया। बात की जाए तो सोनिया गांधी के इस रोड शो ने बसपा के खेमे में सबसे अधिक बेचैनी है। दयाशंकर सिंह प्रकरण से पूर्व मुस्लिम बसपा की ओर निगाह लगाए था क्योंकि उसे लग रहा था कि बसपा यूपी में जीत की ओर बढ़ रही है। बैकफुट पर आई बसपा के लिए सोनिया गांधी का रोड शो एक बहुत बड़ा झटका है क्योंकि मुस्लिम समाज जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष के स्वागत में सड़कों पर उमड़ा था उससे यह तो तय है कि एक बार फिर मुस्लिम कांग्रेस की ओर उम्मीद भरी नजरों के साथ खड़े हो गए हैं। 

वाराणसी में विधानसभा की आठ में से तीन सीटों पर भाजपा का कब्जा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट हैं। सोनिया गांधी का रोड शो कचहरी इलाके से शुरू हुआ और इंग्लिशिया लाइन जाकर समाप्त हुआ। कचहरी से लेकर इंग्लिशिया लाइन तक का इलाका  भाजपा के विधायकों का है। भाजपा विधायकों के क्षेत्र में यदि कांग्रेसियों ने अपनी ताकत दिखाई है तो निश्चित तौर पर यह भगवा ब्रिगेड के लिए खतरे का संकेत है। वाराणसी में गुटबाजी के चलते कांग्रेस के शो को फ्लाप मान रही बीजेपी के लिए भी सोनिया का रोड शो तगड़ा झटका था। मुस्लिम समाज के अलावा हिंदू सवर्णों का साथ देख भाजपा खेमे में बेचैनी है। कांग्रेस के मजबूत होने का सीधा असर भाजपा पर पड़ेगा। 

कहने में गुरेज नहीं कि अब बीजेपी समेत अन्य सभी विपक्षी दलों को अब कांग्रेस के सारथी बने पीके यानि प्रशांत किशोर का गेम प्लान समझ में आ गया होगा। शीला दीक्षित को जब पीके ने यूपी में मुख्यमंत्री का चेहरा बनवाया तो विपक्ष ने उनकी उम्र का हवाला देते हुए तंज किया लेकिन बनारस में हुए रोड शो में जिस तरह से ब्राह्मण- मुस्लिम समर्थकों का गठजोड़ देखने को मिला, सोनिया गांधी को भी टीम पीके के इस फैसले से अब खुशी हुई होगी। 

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