यूपी में भड़क सकती है जातीय हिंसा

यूपी में भड़क सकती है जातीय हिंसा
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क्षत्रिय व दलितों के बीच बढ़ी रार, खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की धुकधुकी

वाराणसी. सियासी संग्राम का अखाड़ा बने उत्तर प्रदेश को हिंसा की आग में झोंकने की तैयारी चल रही है। राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए उत्तर प्रदेश में दंगा कराने की फिराक में हैं। भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की एक शर्मनाक टिप्पणी के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति का जो परिदृश्य बदला है उसका सर्वाधिक असर प्रदेश की दो मुख्य जातियों क्षत्रिय व दलित समाज पर पड़ा है। दोनों ही जातियों के बीच में बीते कुछ दिनों से चल रहे प्रकरण को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। आक्रोश का दायरा उत्तर प्रदेश से बढ़ते हुए राजस्थान से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रहा है। 

दयाशंकर सिंह की पत्नी व राजनीति के गलियारे की नई क्षत्राणी स्वाति सिंह के तेवर व उन्हें मिल रहे समर्थन से भाजपा ही नहीं अन्य दल भी सकते हैं। स्वाति सिंह की तबीयत खराब होने के कारण उनके साथ सहानभूति की लहर भी दौड़ रही है। क्षत्रियों का एक बड़ा धड़ा स्वाति के साथ खड़ा हो गया है। इससे बड़ी बात यह कि क्षत्रियों का यह धड़ा किसी एक राजनीतिक दल से नहीं है। कमोवेश हर राजनीति दल से जुड़े क्षत्रिय नेता इस मामले में तल्ख रवैया अपनाए हुए हैं। खुफिया विभाग ने प्रदेश सरकार को जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक प्रदेश में जिस तरह का माहौल अचानक पैदा हुआ है उससे जातीय हिंसा भड़कने के आसार बन रहे हैं। 


प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग को दलित बस्तियों पर खास नजर रखने को कहा है। शहरी क्षेत्र के मुकाबले गांव में अत्यधिक सतर्कता के साथ चौबीस घंटे गश्त के निर्देश जारी किए गए हैं। सूत्रों की माने तो उन गांवों पर विशेष नजर रखने का कहा गया है जहां पर ठाकुर बस्ती व दलित बस्ती के बीच पूर्व में भी हिंसा हो चुकी है। 


उत्तर प्रदेश में ठाकुर बनाम दलित की राजनीति के दांव ने सोशल मीडिया पर भी गुल खिलाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी जातिवाद को लेकर तमाम संदेश चल रहे हैं। दोनों वर्ग की ओर से एक दूसरे के खिलाफ हद से अधिक आपत्तिजनक टिप्पणी की जा रही है। पुलिस की साइबर सेल को भी सोशल मीडिया पर चलने वाले संदेशों को गंभीरता से लेते हुए नजर बनाए रखने को कहा गया है। 


क्षत्रिय व दलित समाज के बीच आई खटास के बीच कुछ लोगों ने डकैत से जन प्रतिनिधि बनी फूलन देवी के हत्यारोपी शेर सिंह राणा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों ने माहौल को और गरमा दिया है। शेर सिंह राणा का प्रकरण उछलने से भी सरकार की नींद उड़ी है। 

उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव पहले ही आशंका जता चुके हैं कि यूपी की सत्ता हासिल करने के लिए कुछ राजनीतिक दल प्रदेश में दंगा कराने की फिराक में हैं। फिलहाल प्रदेश में जो हालात बन रहे हैं, उस बीच यदि प्रदेश में जातीय हिंसा हुई तो सीधा नुकसान बीजेपी और बसपा को ही होगा। दोनों ही दल नहीं चाहेंगे कि उनके नेताओं के बड़बोलेपन के चलते उपजे हालात और बिगड़ें व वोट पर इसका असर पड़े। 

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