कर्जदार किसान को जेल भेजे जाने के मामले में योगी सरकार से जवाब तलब

कर्जदार किसान को जेल भेजे जाने के मामले में योगी सरकार से जवाब तलब
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Awesh Tiwary | Updated: 28 Jun 2017, 03:42:00 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

कर्जदार किसान को जेल भेजे जाने के मामले में योगी सरकार से जवाब तलब

वाराणसी। गाजीपुर के किसान को बैंक का कर्ज ने देने पर गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है न्यायालय ने इसे गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि किसान को सिविल कारागार में रखा जाना था तो उसे फिर जेल क्यों भेजा गया ?कोर्ट ने किसान के खिलाफ किसी भी किस्म की उत्पीडन की कारवाई किये जाने पर रोक लगा दी है ।साथ ही कहा है कि इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि किसान का किसी भी किस्म का शारीरिक मानसिक उत्पीडन न हो। किसान की गिरफ्तारी के इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीएस बघेल कर रहे थे। गौरतलब है कि प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में कर्जमाफी की घोषणा तो दो माह पूर्व ही कर दी थी लेकिन प्रदेश के किसानो को अब तक कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला है ।

याची के अधिवक्ता अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले के सम्बन्ध में बताया कि कुछ समय पूर्व अशोक ने खेती किसानी के लिए कर्ज लिया था जिसे न चुकाने के बाद बैंक ने उसका खिलाफ आर सी जारी कर दी गई और उसे गिरफ्तार करके 15 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया ।गौरतलब है कि कर्ज न चुकता कर पाना एक सिविल अपराध है और उत्तर प्रदेश  जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार एक्ट के तहत ऐसे मामलों में किसी को केवल सिविल कारागार में रखा जा सकता है उसे सामान्य अपराधियों की तरह जेल नहीं भेजा जा सकता। 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अप्रैल माह में कैबिनेट की एक बैठक में किसानों को एक लाख तक की कर्जमाफी किए जाने का ऐलान किया गया था लेकिन सच्चाई यह है कि लगभग दो माह बीतने के बावजूद अभी तक भी किसान की कर्जमाफी नहीं हुई है। नतीजा यह है कि हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है । स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 के अंत तक यूपी के किसानों पर बैंकों के 86 हजार 421 करोड़ रुपये बकाया थे । यूपी सरकार ने कर्जमाफी का जो प्रस्ताव तैयार किया ह वो 31 मार्च 2016 तक लघु व सीमांत किसानों द्वारा लिए गए फसली ऋण में से उनके द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान भुगतान की गई राशि को घटाकर है ऐसे में सोचा जा सकता है कि किसानो को इसका कितना लाभ मिलेगा और कर्जमाफी न होने तक बैंक किसानों से कैसे पेश आएगा ?

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