गजब का है बनारस-बिहार का क्राइम कनेक्शन 

गजब का है बनारस-बिहार का क्राइम कनेक्शन 
up bihar crime connection

अपराधियों की शरणस्थली बनी काशी, बिहार, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में वारदात के बाद काशी में काटते हैं फरारी 

वाराणसी. बनारस और बिहार का गहरा नाता है। बात चाहे अध्यात्म की हो, रिश्तेदारी-स्वास्थ्य की, राजनीति की या फिर अपराध की। तीनों लोक से न्यारी कही जाने वाली काशी आजकल अपराधियों की सैरगाह बन गई है। बिहार समेत अन्य राज्यों में आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी वाराणसी में फरारी काटते हैं। 
बनारसियों और बिहारियों के बीच का यह संबंध इस समय दो कारणों से चर्चा में है। एक तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल फूंकने के लिए सबसे पहले बनारस की धरती पर कदम रखा। बीते दिनों बिहार टापर्स घोटाला प्रकरण के मुख्य आरोपी लालकेश्वर सिंह व ऊषा सिंह को वाराणसी के एक आश्रम के पास से गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी ने वाराणसी पुलिस की सुस्ती, कार्यप्रणाली पर तो सवाल खड़े किए ही, यह भी साफ हो गया कि बिहार में वारदात के बाद छिपने के लिए अपराधी वाराणसी की गलियों में खुद को गुम कर देते हैं। बिहार के अपराधियों ने तो वाराणसी में कई हैरतंगेज वारदात को अंजाम देकर चर्चा बटोरी। कुछ ऐसा ही हाल बनारस व पूर्वांचल के अन्य जिलों के अपराधियों का है। बनारस में वारदात के बाद पुलिस से बचने के लिए सफेदपोश अपराधी तक बिहार की शरण में पहुंच जाते हैं। मुख्यमंत्री पर विवादित पोस्टर जारी करने के बाद पूर्व एमएलसी और बसपा विस प्रत्याशी विनीत सिंह पर जब पुलिस का दबाव बढ़ा तो वह भी गिरफ्तारी से बचने को बिहार निकल गए थे। 

अजब-गजब का क्राइम कनेक्शन
बिहार के अपराधी बनारस में वारदात करते हैं तो पुलिस को चौबीस घंटे के अंदर पता लगा लेती है लेकिन बिहार में घटना को अंजाम देने के बाद वाराणसी में शरण लेने वाले अपराधियों को स्थानीय पुलिस सूंघ तक नहीं पाती। बीते दिनों भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित एक शो रूम से लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य की घडिय़ां चोरी हो जाती है। चौबीस घंटे के अंदर वाराणसी पुलिस ने बिहार के मोतिहारी से उक्त घडिय़ां बरामद कर ली। दो साल पहले सितंबर में वाराणसी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य लक्ष्मण दास का बिहार के अपराधी गैंग ने जमीन की पूजा के नाम पर सामनेघाट इलाके से अपहरण कर लिया था। लगभग एक माह की मशक्कत के बाद पुलिस ज्योतिषाचार्य को बिहारी अपराधियों की कैद से आजाद करा सकी। दो साल पहले ही बिहार के सराफ कारोबारी दुर्गेश सेठ का रामनगर इलाके से बिहार की गैंग ने अपहरण कर लिया था। बिहार के अपराधियों ने वाराणसी में घुसकर वारदात को अंजाम तो दिया ही, अन्य स्थानों पर घटना को अंजाम देने के बाद बनारस को छिपने का ठिकाना भी बनाया। मुंबई के चित्रकार हेमा की हत्या के बाद बिहार का रहने वाला आरोपी शिवकुमार वाराणसी में फरारी काटते धरा गया था। बिहार में चार साल पहले नववर्ष की संध्या पर युवतियों से सरेआम छेडख़ानी का आरोपी अ मरज्योति को भी पुलिस ने बनारस से ही गिरफ्तार किया था। 

मुंगेर के असलहे ने जोड़ा गहरा नाता

पूर्व पुलिस अधिकारी डीपी सिंह बताते हैं कि यूं तो बिहार और यूपी के बड़े अपराधियों के बीच बहुत पहले से सांठगांठ रही है लेकिन मुंगेर के असलहों ने तो बनारस के साथ-साथ पूरे यूपी के छुटभैया अपराधियों के बीच एक ऐसा संबंध कायम किया जो आज तक बदस्तूर जारी है। आज भी अधिकतर अपराधी मुंगेर ब्रांड असलहों के साथ ही पुलिस के हाथ गिरफ्तार होते हैं। 
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