डाला छठ, 08 दिन बाकी, घाटों पर दिया जाता है सूर्य नारायण को अर्घ्य, वहां जमा है मिट्टी का पहाड़, श्रद्धालुओं में आक्रोश

Ajay Chaturvedi

Publish: Nov, 04 2018 03:01:35 PM (IST)

Varanasi, Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. डाला छठ यानी सूर्य नारायण की आराधना का पर्व। ऐसा पर्व जिसके लिए सुचिता, पवित्रता, साफ-सफाई का खास महत्व है। हर व्रती डरा-सहमा रहता है कि इस पूजन, अनुष्ठान में कहीं गंदगी का पुट न आने पाए। लेकिन बनारस नगर निगम को इससे कोई सरोकार नहीं। बता दें कि डाला छठ के लिए लाखों महिलाएं और पुरुष तीन दिन तक गंगा घाट, शहर के कुंडों, सरोवरों पर जुटते हैं। घाट पर ही स्नान के बाद जल में कमर तक खड़े हो कर पहले चंद्रमा फिर दो दिनों तक सूर्य नारायण को अर्घ्य दिया जाता है। वहीं पूजा होती है। पूजा वेदी बनाई जाती है। लेकिन हाल यह है कि शहर के लगभग सभी घाटों पर ऊपर तक मिट्टी जमा है। कुंडों, सरोवरों, तालाबों का बुरा हाल है। गंगा घाटों का हाल यह कि पूजा तो दूर टहलना भी मुश्किल है। मिट्टी का ढूहा ही नहीं, गंदगी चारों तरफ फैली है। ऐसे में कैसे होगा डाला छठ का पूजन इसे लेकर श्रद्धालुजन खासे परेशान है। ये हाल तब है जब घाट सफाई का निर्देश खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दे चुके है।

बता दें कि आठ दिन बाद से ही शुरू हो जाएगा डाला छठ अनुष्ठान पर्व। खरना यानी चंद्रमा को अर्घ्य दान 12 नवंबर को होगा। फिर अगले दिन षष्ठी तिथि को (13 नवंबर) को डाला छठ का पहला अर्घ्य (अस्ताचलगामी सूर्य) दिया जाना है। चार दिवसीय पर्व की शुरूआत नहाय खाय शारीरिक, मानसिक शुद्धता के साथ होती है। ऐस में मानें तो पर्व की शुरूआत 11 नवंबर से ही हो जाएगी। लेकिन इस धार्मिक नगरी में न गंगा घाटों पर कहीं साफ-सफाई नजर आ रही है न तालाबों,कुंडों और सरोवरों में। यहां तक कि सबसे स्वच्छ और मुफीद माने जाने वाले डीरेका का सूर्य सरोवर का आलम यह है कि तीन दिन पहले तक तो उहापोह की स्थिति थी कि इस सरोवर में इस बार डाला छठ का अर्घ्य दिया भी जाएगा कि नहीं। डीरेका प्रशासन ने सरोवर के पानी को गंदा बताते हुए पानी निकासी शुरू करा दी थी। किसी तरह अनुमति तो मिल गई पर सरोवर में अभी तक पर्याप्त पानी ही नहीं भरा जा सका है। सरोवर में जो पानी बचा है उससे दुर्घंध आ रही है।

घाटों का हाल तो बहुत ही बुरा है। बाढ़ के बाद गंगा का पानी नीचे उतरे दो महीना से ज्यादा बीत चुका है। लेकिन घाटों पर मिट्टी का ढूहा जस का तस है। ऐसे में घाट आने वालों के लिए ये मुसीबत का पहाड़ बन गया है। अस्सी घाट की सीढ़ियों पर जमा मिट्टी हटाने का काम तो हो रहा है पर कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। वहीं नगर निगम प्रशासन का दावा है कि घाटों की सफाई शुरू करा दी गई है। इसकी निगरानी भी की जा रही है। कोशिश है कि गंगा स्नान के लिए आने वालों को किसी तरह की दिक्कत न हो।


ये हाल तब है जब घाटों की सफाई के लिए नगर निगम कार्यकारिणी समिति अपनी तरफ से मंजूरी भी दे चुकी है। बजट भी जारी हो गया है। दीपावली से पहले सभी घाटों को साफ करने का लक्ष्य रखा गया था। वह भी तकरीबन एक महीना पहले। लेकिन अस्सी और दशाश्वमेध घाट पर तो कुछ रस्म अदायगी हुई भी है सफाई की लेकिन शेष घाटों की सीड़ियों पर मिट्टी वैसे ही जमा है।

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घाट तो घाट, शहर के सरोवर, तालाब और कुंडों का भी बुरा हाल है। कोई ऐसा तालब, सरोवर ऐसा नहीं जहां सूर्य नारायण की पूजा की जा सके। तालाबों, सरोवरों, कुंडों की सीढ़ियां चलने काबिल नहीं गंदगी के मारे। कुंडों, सरोवरों में मोटी-मोटी काई जमा है। पानी से दुर्घंध आ रहा है, पर इसकी परवाह नगर निगम को नहीं। चाहे शंकुल धारा तालाब की बात करें या लक्ष्मी कुंड, ईश्वरगंग, कुरुक्षेत्र सूर्य सरोवर जितने भी नाम गिनाए जा सकते हैं सभी दुर्दशाग्रस्त हैं। ये हाल तब है जब इन कुंडों, सरोवरों, तालाबों की सफाई के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त धनराशि भी है।

काशी के सभी 84 घाटों की सफाई की जिम्मेदारी है नगर निगम की
136 छोटे-बड़े सरोवर हैं जिनकी हालत खराब है
16 लाख रुपये है घाट सफाई का बजट
05-08 फीट तक जमा है मिट्टी

इस बीच कांग्रेस नेता अजय राय भी रविवार को पहुंचे गंगा घाट, उनके साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी थे। सभी ने एक जुट हो कर मां गंगा की पूजा की। साथ ही स्थानीय प्रशासन से गंगा घाटों की सफाई की मांग भी की।

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काशी का गंगा घाट
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