काशी में महाश्मशान की चिताओं पर सजती है नगर वधुओं की महफिल

काशी में महाश्मशान की चिताओं पर सजती है नगर वधुओं की महफिल
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जानिये कब से महादेव को प्रसन्न करने के लिये समाज में उपेक्षित नगर वधुएं सजा रहीं नृत्य संगीत की महफ़िल

वाराणसी. हां! ये काशी का अनंत वैभव है। यहाँ की हर परम्परा महादेव से जुड़ी है। आम तौर पर वेश्याओं का समाज में हर जगह तिरस्कार होता है लेकिन शिव की नगरी काशी की बात ही निराली है। यहाँ महादेव को प्रसन्न करने नगर वधुओं की महफ़िल सजती है। एक ओर महादेव चिता भस्म की होली खेलते हैं तो उसी महादेव के महाश्मशान रूप को प्रसन्न करने के लिए जलती चिताओं के बीच नगर वधुओं की महफ़िल सजती है। नृत्य- संगीत की महफ़िल रात भर चलती है लेकिन क्या मजाल की कोई अश्लील हरकत कर बैठे। बाबा महाश्मशान नाथ जी मणिकर्णिका घाट के श्रृंगार महोत्सव के आख़िरी दिन यानि नवरात्रि के सप्तमी को प्राचीन काल से चली आ रही गणिकाओं ( वेश्या) के नृत्य की परम्परा को देर रात फिर जीवित किया गया। चिता के बीच नगर वधुओं के नृत्य संगीत प्रस्तुत करने के पीछे एक रोचक कथा है

तब नगर के संगीतकारों ने कर दिया था इंकार

ऐसी मान्यता है कि जब दशाश्वमेध घाट पर राजा जयसिंह मान महल का निर्माण करा रहे थे तो उसी समय राजा द्वारा महाश्मशान जी के मंदिर का भी कराया गया था चूकिं हिन्दू परम्परा में में है कि हर शुभ कार्य में संगीत जरूर होता है तो उस समय राजा को सामाजिक भेदभाव की वजह से ऐसा कोई संगीतकार नहीं मिला जो महामशान पर संगीत प्रस्तुत कर सके। तब काशी की नगर वधुओं को इस बात की जानकारी हुई कि उनके ईश्वर के सामने कोई संगीतकार नहीं आना चाहता है तो उन्हें काफी दुःख पहुचा। संदेश वाहक से नगर वधुओं ने यह संदेश राजा जयसिंह को भिजवाया कि अगर आप को ऐतराज ना हो तो अपने आराध्य को हम काशी की गणिकाएं नृत्याजलीं व गीतांजलि के जरिये दरबार सजाना चाहते हैं जिसे राजा ने स्वीकार करते हुए निमंत्रण भिजवा दिया कि काशी की गणिकाएं ही सजाएंगी बाबा महाश्मशान नाथ का दरबार और एक नई परम्परा का इस तरह श्री गणेश हुआ। तब से अब तक महामशान पर काशी के अदभुत, अद्वितीय त्योहारों की तरह ही काशी की नगर वधुओं में यह मान्यता घर कर गई थी कि एक दिन सब को चार लोगों के कधें पर बाबा महाश्मशान नाथ जी के गोद मणिकर्णिका जाना ही है तो क्यों न अपने दुर्भाग्य को जो इस जन्म में मिला है नाचने वाली के रूप में उसे जीभर कर जी ले व जीते जी बाबा से अपने दुख भी बाट आए जिससे अगला जन्म तो ऐसा ना मिले। यह सब आपको आधुनिक दौर में विचलित कर देने वाला लग सकता है, आपको यह असह्य लग सकता है, आपको द्रवित भी कर सकता है कि महाश्मसान पर यह मेला आज भी सज रहा है। जिसके गवाह हम आप और ईश्वर भी है...।
इस क्रम में आज बाबा दरबार मदार व गुलाब के फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया था, व तान्त्रिंक विधि से पूजन सम्पन्न हुआ जिसमें बाबा को पंच मकार का भोग लगाकर खोपड़ी के खप्पर को मदिरा से भरा गया। और पूजनोपरांत प्रारम्भ हुआ नगर वधुओं की नृत्याजलीं, गीतांजली। उक्त कार्यक्रम में मंदिर प्रबंधक गुलशन कपूर, अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता, बिहारी लाल गुप्ता, दिलीप यादव, विजय शंकर पांडेय, मनोज शर्मा, दीपक तिवारी, अजय गुप्ता, बडकु यादव,संजय गुप्ता, राजू साव, सहीत काफी संख्या में क्षेत्रीय लोग शामिल थे।

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