काशी विश्वनाथ के चरणों में त्याग दिए प्राण

काशी विश्वनाथ के चरणों में त्याग दिए प्राण
dead woman

सावन के तीसरे सोमवार पर जौनपुर से आई वृद्धा की मोक्ष नगरी में मौत

वाराणसी. काशी को मोक्ष नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि महादेव के श्रावण मास में उनके चरणों में ही प्राण निकलें तो फिर स्वर्ग के दरवाजे सीधे खुलते हैं। सावन के तीसरे सोमवार पर काशी विश्वनाथ के दर्शन-पूजन को करने आई वृद्धा की अंतिम इच्छा काशी में मोक्ष, की पूरी हो गई।

जौनपुर के मछली शहर की रहने वाली 75 वर्षीय वृद्धा कमला देवी गांव की महिलाओं व परिवार के सदस्यों के साथ काशी आई थी बाबा दरबार में मत्था टेकने। ज्ञानवापी क्रासिंग के समीप वह कतार में अपनी महिला सखियों के साथ खड़ी थी। श्रज्ञ्द्धालुओं की भीड़ में मौजूद कमला देवी को लगभग 11 बजे अचानक बेचैनी महसूस हुई। 


बेरिकेटिंग के भीतर मौजूद कमला देवी गश खाकर गिर पड़ी। कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु   जब तक उनके लिए चिकित्सकीय सहायता के लिए गुहार लगाते, कमला देवी का शरीर निर्जीव हो गया। आशंका है कि हृदयाघात के चलते उनकी मौत हो गई। 

कमला देवी के साथ आईं महिलाओं ने पुलिस की मदद से लाश को मंडलीय अस्पाल कबीरचौरा भिजवाया और परिजनों को सूचना दी। लोगबाग चर्चा करते रहे कि महादेव के दर्शन को आईं कमला देवी भले ही काशी विश्वनाथ के दर्शन नहीं कर सकीं लेकिन काशी में उन्हें मोक्ष जरूर मिल गया। बाबा के दरबार के बाहर ही उन्होंने प्राण त्यागे हैं तो निश्चित ही वह बैंकुठ धाम को जाएंगी।  
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