देव दीपावली पर इस बार वाराणसी में टूटेगी 25 साल की परंपरा, दशाश्वमेध घाट पर नहीं होगी महाआरती

गंगा में स्टेज बनाने से रोके जाने के बाद संस्था ने व्यक्त की असमर्थता
-संस्था ने कहा, रोजाना की तरह 7 ब्राह्मण ही करेंगे आरती

 

वाराणसी. देव दीपावली पर काशी में इस बार 25 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी। एक तरफ जहां शासन और प्रशासन अगले वर्ष यहां की देव दीपावली को गिनिज वर्ल्ड ऑफ रिकार्ड में दर्ज कराने की तैयारी में वहीं जिला प्रशासन के एक फरमान ने दशाश्वमेध घाट पर 25 साल से होने वाली महा आरती न करने का ऐलान कर दिया है।

बता दें कि गंगा सेवा निधि पिछले 25 साल से दशाश्वमेध घाट पर देव दीपावली पर भव्य महा आरती का आयोजन करता रही है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। समिति ने प्रशासन को पत्र भेजने के साथ ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को भी पत्र सौंप कर मौजूदा हालात में महा आरती कराने में असमर्थता जताई थी। उन्होंने मध्यस्थता कर रास्ता निकालने का आश्वासन भी दिया था लेकिन हुआ कुछ नहीं।

देव दीपावली पर होने वाली महा आरती का दृश्य (फाइल फोटो)

गंगा सेवा निधि के प्रवक्ता शिवम ने बताया कि इस बार देव दीपावली के मौके पर भव्य कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा बल्कि सामान्य दिनों की तरह ही दशाश्वमेध घाट पर सात अर्चकों द्वारा ही सामान्‍य आरती की जाएगी। शिवम ने बताया कि प्रशासन ने इस बार पहले तो देव दीपावली के लिए गंगा में पीपा का मंच बनाने से पूरी तरह से मना कर दिया था। बाद में तीन पीपे का मंच बनाने की इजाजत दी है। ऐसे में संस्था की इस आरती में आने वाले अतिथियों को पर्याप्त स्थान न दे पाने की सूरत में संस्था ने महा आरती न करने का फैसला किया है।

समिति के प्रवक्ता शिवम का कहना है कि रोक के बाद हम लोगों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से आग्रह किया था। बताया गया कि मंच के लिए अतिथियों को निमंत्रण कार्ड वितरित कर दिया गया है। मंच नहीं बनाया जाएगा तो छवि खराब होगी। बालीवुड सेलिब्रिटी भी आने वाले हैं। शिवम ने बताया कि उप मुख्यमंत्री ने पूर्व की भांति छह पीपा पर मंच बनाने की सहमति जताई। इसी आधार पर हम लोग छह पीपा पर मंच बनाने लगे। अब तीन पर बनाने के लिए कहा जा रहा है। काफी काम हो चुका है।

ऐसे में तीन पर मंच बनाने और तीन को अलग करने का समय नहीं है। ऐसा होगा तो हम लोग बिना मंच के ही देव दीपावली मनाएंगे। हमने मंच पर बैकड्राप भी नहीं लगाने का आदेश मान लिया है।

बता दें कि कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर गंगा में पीपा का मंच बनाने पर रोक लगा दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दशाश्वमेघ व शीतलाघाट पर मंच बनाए जाने के कारण देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को नाव से देव दीपावली की छटा देखने में बाधा आती थी। साथ ही गंगा में मंच बनाना तकनीकी, विधिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी गलत है। पुलिस सुरक्षा के दृष्टिगत भी गंगा में कोई मंच बनाने के पक्ष में नहीं है। इसी के मद्देनजर मंच बनाने पर गत दिनों रोक लगा दी गई थी।

Ajay Chaturvedi
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