भगवान जगन्नाथ के अभिषेक को उमड़ा भक्तों का सैलाब

-अतिशय स्नान के बाद 15 दिनों के लिए बीमार हो जाएंगे प्रभु
-एक पखवारे तक तक भगवान का पूजन-अर्चन, आरती रहेगी बंद
-औषधीय जड़ी-बूटियों का भोग लगेगा
-स्वस्थ होने पर 3 जुलाई को निकलेगी डोली यात्रा
-4 जुलाई से शुरू होगा तीन दिवसीय रथयात्रा मेला

By: Ajay Chaturvedi

Published: 17 Jun 2019, 01:02 PM IST

वाराणसी. धर्म नगरी काशी में वास्तव में लघु भारत का नजारा देखने को मिलता रहता है। है ये शिव की नगरी पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों की आराधना पूरे आस्था के साथ की जाती है। देश का ऐसा कोई त्योहार नहीं जो यहां की मिट्टी में रचा-बसा न हो। इसी कड़ी में सोमवार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का अभिषेक हुआ। भगवान के अभिषेक को अल सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई थी अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में। सुबह से शुरू भगवान के अभिषेक का यह क्रम देर शाम तक चलेगा। ऐसा अभिषेक कि अब भगवान जगन्नाथ 15 दिन तक बीमार रहेंगे। पूजन-अर्चन, आरती सब बंद रहेगा। सिर्फ भगवान को जड़ी बूटियों का भोग लगाया जाएगा।

प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि बीमार भगवान के इलाज के तौर पर जड़ी बूटी दी जाएगी। मेवा मिश्री, तुलसी, लौंग, जायफर के औषधीय काढ़े का भगवान को अर्पित किया जाएगा। भगवान के स्वस्थ्य होते ही भव्य पालकी यात्रा निकलेगी।

पुजारी पांडेय ने बताया कि छोटी, बड़ी इलायची, जायफर, लौंग, तुलसी पत्ता, गंगा जल से काढ़ा बनता है, जो रोज 3.30 बजे भक्तो में बटता हैं। तीनों प्रभु इस दौरान शयनकक्ष में लेटे रहते हैं। घंटा घड़ियाल आरती नहीं होती है। बताया कि, आषाढ़ कृष्ण अमावस्या को प्रभु ठीक होकर भक्तों को दर्शन देंगे। आषाण कृष्ण प्रतिपदा के दिन नए वस्त्रों के साथ प्रभु का श्रृंगार होगा, आरती की जाएगी फिर अनेक मिष्ठान-फलों का भोग लगाया जाएगा।

अगले दिन (तीन जुलाई) आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा को डोली यात्रा से नगर भ्रमण करते हुए रथयात्रा स्थित बेनी राम के बगीचे पहुंचेंगे। यह भगवान की ससुराल मानी जाती है। दोपहर बाद पालकी यात्रा निकलती है, जो रथयात्रा पर खत्म होती है। भगवान स्वस्थ होकर नगर भ्रमण करते हैं। तीन दिवसीय रथयात्रा मेला शुरू हो जाता है। मेला 4 जुलाई से 6 जुलाई तक चलेगा।

 

Ajay Chaturvedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned