… ताकि प्रधानमंत्री न देख पाएं हकीकत, असि नदी पुलिया पर लगा दिया शामियाना

चालाकी जिला प्रशासन की, नदी से नाले में तब्दील असि नदी की हकीकत जानने से फिर चूक गए पीएम।

 

By: Ajay Chaturvedi

Published: 23 Sep 2017, 01:04 PM IST

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. वरुणा और असि नदी के बीच बसे शहर का नाम है वाराणसी। इस नामकरण के पीछे की हकीकत यही है। लेकिन वरुणा के जीर्णोद्धार का काम तो पिछली अखिलेश सरकार ने शुरू किया। भले ही वह योजना प्राकृतिक आपदा के चलते समय से पूर्णता न प्राप्त कर सकी। लेकिन असि नदी का तो अस्तित्व ही खत्म हो गया है। अब वह नाले में तब्दील हो चुकी हैं। सरकारी दस्तावेजों में तक में इसे असि नाला दर्ज कर दिया गया है। लेकिन ताज्जुब तो यह कि इस नदी का स्वरूप या अपनी खामियों को इस तरह से छिपाया जाएगा यह किसी काशीवासी ने सोचा भी नहीं होगा। यह सोच कि प्रधानमंत्री जब संकटमोचन के रास्ते तुलसी मानस मंदिर और दुर्गा मंदिर जाएंगे तो यह नाला अगर दिख जाएगा तो वह पूछेंगे इसके बारे में तो क्या जवाब दिया जाएगा, इसलिए उसे ढक दिया गया।

 

 

 

काशी के नागरिक हों या संकट मोचन फाउंडेशन के चेयरमैन प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र एक बात तीन साल से लगातार कहते आ रहे हैं कि गंगा स्वच्छता के बारे में क्या होना चाहिए, क्या योजना बने, कैसे काम हो इस बाबत न तो यहां का प्रशासन प्रधानमंत्री को सही सूचना दे रहा न बीजेपी के लोग। हर कोई प्रधानमंत्री को गुमराह करने में जुटा है। ऐसे में पीएम का सपना साकार नहीं हो पा रहा। लेकिन वह जिला प्रशासन ऐसी चाल चलेगा पीएम से सच छिपाने के लिए यह किसी ने सोचा तक नहीं होगा। अपनी खामियों को ऐसा ढंक दिया कि असि पुलिया से गुजरने वाला हर बनारसी उसे देख कर हंस रहा था।

 

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दोपहर बाद बनारस आए। बड़ा लालपुर में ट्रेड फेसिलिटी सेंटर का लोकार्पण करने के बाद वह डीरेका गेस्ट हाउस में बीजेपी कार्यकर्ताओं से मिले फिर शाम को रामायण पर डाक टिकट जारी करने उन्हें तुलसी मानस मंदिर जाना था। यहां से पीएम को दुर्गा मंदिर में दर्शन पूजन को जाना था। ऐसे में संकट मोचन से तुलसी मानस मंदिर के बीच की असि पुलिया से ही हो कर गुजरना था। ऐसे में प्रशासन को लगा कि अगर इस रास्ते से पीएम गुजरेंगे तो नदी से नाले में तब्दील असि नदी के स्वरूप देख कर वह पूछेंगे जरूर, तो क्या जवाब दिया जाएगा। ऐसे में प्रशासन ने उसे ढंक दिया। असि पुलिया पर शामियाना लगा दिया ताकि वह कुछ देख ही नहीं सकें। प्रशासन अपने इस चाल से पीएम को असि नदी की हकीकत जानने से तो बचा लिया लेकिन शहरियों के बीच हास्यास्पद बन गए। हालांकि कुछ लोगों ने इस शामियाने को अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया। इस टिप्पणी के साथ पोस्ट किया कि ऐसा कभी नहीं देखा कि कोई प्रशासन अपनी खामियों को छिपाने के लिए ऐसा भी कर सकता है। हालांकि यह हकीकत है कि वाराणसी में रोजाना गैर शोधित सीवेज गंगा में लगातार गिर रहा है। इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हो रही है। इस सीवेज के चलते गंगा दिन ब दिन बद से बदतर स्थिति में पहुंचती जा रही हैं। लेकिन वही प्रशासन इस दिशा में नहीं सोचता कि मां गंगा के उद्धार के लिए कुछ कंक्रीट काम किया जाए। कंक्रीट योजना बनाई जाए। उल्टे अपनी गल्ती, अपनी खामियों को छिपाने में लगा है। ऐसे तो गंगा कभी साफ नहीं हो पाएंगी। वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी असि नदी तो विलुप्त हो ही चुकी हैं लगभग।

 

 

 

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